वरुण को गोद में लेकर मेनका ने एक झटके में छोड़ा था गांधी परिवार, जानिए क्या हुआ उस रात?
Varun Gandhi News: यूपी की पीलीभीत सीट से टिकट कटने के बाद वरुण गांधी इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। वरुण अपनी मां मेनका गांधी के लिए प्रचार करते नजर आएंगे। इसी के साथ उन सभी अटकलों पर भी विराम लग गया जो वरुण गांधी के राजनीतिक भविष्य को लेकर लगाई जा रही थी।
हालांकि इस बीच चर्चा यहां तक पहुंच गई कि देश की राजनीति का सबसे पुराना गांधी परिवार 40 साल के बाद एक हो सकता है? दरअसल, अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी करके चर्चाओं में रहने वाले वरुण गांधी का भाजपा ने टिकट काट दिया, उनकी जगह पार्टी ने जितिन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि वरुण गांधी की मां मेनका गांधी को बीजेपी ने सुल्तानपुर सीट से फिर से मैदान में उतारा है।

ऐसे में वरुण गांधी के राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की कयासबाजी होने लगी। क्योंकि हाल ही में टिकट कटने के बाद कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने वरुण गांधी का अपनी पार्टी में स्वागत करने की बात कही। हालांकि वरुण गांधी के चुनाव ना लड़ने से यह सब चर्चाएं खत्म हो गईं।
सबसे बड़े परिवार के अलग होने की कहानी..
इस गहमागहमी के बीच एक वो किस्सा भी है, जब दो साल के वरुण को गोद में लेकर उनकी मां मेनका एक झटके में गांधी परिवार का घर छोड़ गई। क्या थी सियासत के सबसे बड़े परिवार की वो कहानी जानिए...
पत्रकार और प्रसिद्ध लेखक खुशवंत सिंह ने अपनी आत्मकथा में उस घटना का जिक्र किया है, जिसमें गांधी परिवार में दो फाड़ हुई। 28 मार्च 1982 की आधी रात गांधी परिवार दो धड़ों में बंट गया। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने छोटे बेटे संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी को घर से बाहर निकाल दिया था।
राजनीतिक विरासत से बढ़ी कलह
1980 में संजय गांधी की विमान हादसे में मौत के बाद सबकुछ बदल गया और कभी कांग्रेस की राजनीति के हर फैसले के पीछे काम करने वाले संजय गांधी की राजनीतिक विरासत दूसरे हाथों में जा रही थी। जिसके बाद परिवार में कलह बढ़ती गई।
स्पेनिश लेखक जेवियर मोरो अपनी किताब The Red Sari में इस पूरी घटना का जिक्र किया है। जिस वक्त मेनका गांधी को घर से निकाला गया था, तब वरुण गांधी महज दो साल के थे। उसके बाद से राजनीतिक में वरुण गांधी को उनके पिता की छवि के रूप में देखा जाता है कि वो ही अपने पिता की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ा रहे हैं।
राजीव गांधी को बढ़ाया राजनीति में आगे
दरअसल, संजय गांधी की मौत के बाद इंदिरा गांधी ने राजनीति में ना रूचि ना रखने वाले उनके बड़े भाई राजीव गांधी को आगे कर दिया, संजय गांधी की राजनीतिक उत्तराधिकरी के रूप में राजीव गांधी को देखने के बाद परिवार में कलह बढ़ने लगी।
एक बार जब इंदिरा गांधी विदेश दौरे पर थी, तब अपने समर्थकों के साथ मेनका गांधी ने लखनऊ में एक रैली की, जिसके बाद इंदिरा गांधी ने बड़ा एक्शन लेते हुए मेनका गांधी को परिवार से अलग कर दिया।
जेवियर मोरो के अनुसार इंदिरा गांधी 28 मार्च 1982 की सुबह लंदन से वापस आईं, उसी दिन रात को देश में एक बड़ी राजनीतिक घटना घटी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को बुलाया और मेनका गांधी से घर छोड़ने तक के लिए कह दिया था।
जेठ के सामने लड़ा पहला चुनाव
मेनका गांधी की इसी साल यानी 1982 में राजनीति में एंट्री हुई। उन्होंने अपना पहला चुनाव अमेठी संसदीय सीट से जेठ राजीव गांधी के खिलाफ निर्दलीय लड़ा था, जहां उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद मेनका 1988 में जनता दल में शामिल हो गई थीं।












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