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Lok Sabha Election 2024: क्या 2 जून के बाद केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा हैदराबाद, KTR के दावे में कितना दम?

KTR Claim about Hyderabad become Union territory amid Lok Sabha Polls: बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने तेलंगाना में लोकसभा चुनावों से ठीक पहले हैदराबाद के केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने को लेकर सनसनीखेज दावा कर दिया है।

तेलंगाना में लोकसभा की 17 सीटें हैं, जिसके लिए 13 मई को चुनाव होने हैं। लेकिन, इससे पहले राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता की ओर से यह दावा किया गया है कि 2 जून के बाद केंद्र की बीजेपी सरकार हैदराबाद को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर सकती है।

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2 जून के बाद हैदराबाद को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जा सकता है- केटीआर
उनका दावा है हैदराबाद को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की योजना में कांग्रेस की भी दिलचस्पी है। रविवार को बीआरएस नेता ने दावा किया कि उन्हें इस बात की पक्की जानकारी है। दरअसल, उनका तर्क है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत हैदराबाद सिर्फ 10 वर्षों के लिए ही दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी है।

बीआरएस जीती तो वह ऐसा नहीं होने देगी- केटी रामा राव
रविवार को तेलंगाना के करीमनगर लोकसभा क्षेत्र में बीआरएस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर संसद में बीआरएस का एक भी सांसद नहीं होगा तो केंद्र सरकार हैदराबाद को केंद्र शासित प्रदेश बना सकती है।

उनके मुताबिक अगर तेलंगाना की जनता बीआरएस सांसदों को चुनकर लोकसभा भेजे तो वह हैदराबाद को केंद्र शासित प्रदेश बनाने या आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की साझा राजधानी बनाए रखने की कोशिशों को नाकाम कर देगी। उनका दावा है कि सिर्फ बीआरएस ही ऐसी किसी कोशिश को रोक सकती है।

12 सांसद जीतने पर केसीआर सरकार की वापसी का भी किया दावा
यही नहीं, उनका यह भी कहना है कि अगर तेलंगाना की जनता कम से कम 12 बीआरएस सांसद चुन ले तो राज्य में के चंद्रशेखर राव (केसीआर) की सरकार एक साल के अंदर वापस आ जाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने की भी कोशिश कर रही है, जिसे सिर्फ भारत राष्ट्र समिति ही रोक सकती है।

आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में क्या है?
तथ्य यह है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के मुताबिक हैदराबाद तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की साझा राजधानी 2 जून, 2024 तक के लिए ही बनाई गई है। इस अधिनियम के मुताबिक यह व्यवस्था 10 वर्षों के लिए ही की गई थी, जिसकी मियाद पूरी होने वाली है।

सचिवालय समेत सारे महत्वपूर्ण दफ्तर पहले ही आंध्र प्रदेश शिफ्ट हो चुके हैं
लेकिन, केटीआर का दावा पूरी तरह से चुनावी नजर आ रहा है, जिसकी खास वजह है। क्योंकि, हैदराबाद सिर्फ तेलंगाना की राजधानी रह जाएगी, आम लोगों के लिए यह कोई खास मुद्दा नहीं रह गया है। क्योंकि, सचिवालय समेत सारे प्रमुख दफ्तर काफी पहले आंध्र प्रदेश शिफ्ट हो चुके हैं।

हैदराबाद के संयुक्त राजधानी क्षेत्र में तेलंगाना के राज्यपाल के पास कुछ शक्तियां हैं, लेकिन पिछले 10 साल में ऐसा कोई खास विवाद सामने नहीं आया, जिसकी वजह से उसके इस्तेमाल की जरूरत पड़ी हो।

राज्यपाल की इस जिम्मेदारी में जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की सुरक्षा शामिल है। लेकिन, 10 वर्षों में ऐसी कोई भी विपरीत स्थिति पैदा नहीं हुई, जब इस तरह की शक्तियों के इस्तेमाल की जरूरत पड़ी हो।

चुनावों की वजह से केटीआर ने छोड़ा शिगूफा?
दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश में भी हैदराबाद राजधानी पर दावा कभी राजनीतिक मुद्दे के रूप में नजर नहीं आया है। तेलंगाना में मौजूद कुछ प्रमुख और प्रतिष्ठित सरकारी संस्थाओं और फैक्टि्रियों का मुद्दा दोनों राज्यों के बीच जरूर लंबित है, लेकिन हैदराबाद राजधानी को लेकर ऐसा कोई विवाद सामने नहीं है, जिसकी वजह से इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने की आशंका जाहिर की गई है।

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