तो UP में अटकेगा 'INDIA' गठबंधन? जानिए 80 सीटों का बंटवारा क्यों है सपा-कांग्रेस और आरएलडी की टेंशन?
INDIA bloc seat sharing: दिल्ली के अशोका होटल में मंगलवार को जब विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की बैठक हुई, तो कुछ नेताओं ने दावा किया कि 31 दिसंबर से पहले सीट शेयरिंग पर फैसला हो जाएगा, तो वहीं कुछ नेताओं ने कहा कि इसपर जनवरी तक ही अंतिम फैसला संभव है।
हालांकि, गठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा इतना आसान नहीं है, क्योंकि कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां हालात बेहद पेचीदा हैं। बात हो रही है 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश की, जो 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए सबसे अहम राज्य है।

अगर लोकसभा चुनाव के लिए 'इंडिया' ब्लॉक का मौजूदा स्वरूप वैसा ही रहता है जैसा अभी है, तो सीटों का बंटवारा समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के बीच होगा, जिसमें सबसे बड़ी दावेदारी समाजवादी पार्टी की मानी जा रही है। मंगलवार की बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आरएलडी के मुखिया जयंत चौधरी भी मौजूद थे। यूपी में सीट शेयरिंग पर पेच क्यों फंस सकता है, इसकी कुछ बड़ी वजहें हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों दलों के बीच पिछले कुछ महीनों के सियासी हालात अच्छे नहीं रहे हैं। हाल ही में जब मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव हो रहे थे तो समाजवादी पार्टी चाहती थी कि कांग्रेस उसके साथ सीटों का बंटवारा करे, लेकिन कांग्रेस की तरफ से इस मांग को ठुकरा दिया गया। इस रवैये से समाजवादी पार्टी इस कदर नाराज हुई कि उसने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस के साथ यूपी में 'जैसे को तैसा' वाला रुख अपनाया जा सकता है।
कुछ ऐसा ही बर्ताव कांग्रेस का राजस्थान में आरएलडी के साथ रहा। आरएलडी इस बात से नाखुश थी कि कांग्रेस ने राजस्थान में उसके लिए महज एक सीट ही छोड़ी। हालांकि आरएलडी ने इस सीट पर जीत हासिल की, लेकिन कांग्रेस को राजस्थान चुनाव में हार मिली। वहीं मध्य प्रदेश चुनाव के नतीजों में भी कांग्रेस को हार मिली और समाजवादी पार्टी को तंज कसने का मौका मिल गया।
कुछ खटास पुरानी भी है....
तीनों दलों के बीच की कड़वाहट को समझने के लिए, अब थोड़ा और पीछे जाते हैं, जब यूपी में नगर निगम के चुनाव थे और सपा-आरएलडी के बीच खींचतान देखने को मिली। आरएलडी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने उसे सम्मानजनक सीटें नहीं दी। वहीं, सपा का कहना था कि ये छोटा चुनाव है और वो अपने कार्यकर्ताओं का दिल नहीं तोड़ सकते।
क्या माना जाएगा कांग्रेस का 2009 वाला दावा?
तो ऐसे में जब बात लोकसभा चुनाव के लिए यूपी की 80 सीटों के बंटवारे की होगी, तो तीनों दलों के बीच इस कड़वाहट का असर नहीं दिखेगा, कहना मुश्किल है। यहां एक बात और गौर करने वाली होगी कि कांग्रेस अपने लिए इन 80 में से कितनी सीटें सोचकर बैठी है? यूपी कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि पार्टी का दावा 20 से 25 सीटों पर होगा, क्योंकि 2009 के लोकसभा चुनाव में उसने यहां 21 सीटों पर जीत हासिल की थी।
सपा और आरएलडी का दावा कितनी सीटों पर?
अब अगर, कांग्रेस को उसके मन मुताबिक यानी 25 सीटें मिलती हैं, तो फिर सपा दूसरे घटक दल आरएलडी को कम सीटों पर कैसे मनाएगी? वो आरएलडी, जिसने 2022 के विधानसभा चुनाव में 33 सीटों पर लड़कर 9 सीटें जीती थीं और 2024 में उनका दावा 12 लोकसभा सीटों का है। वहीं, समाजवादी पार्टी की बात करें तो उनका दावा भी 50 से 60 सीटों का है। पार्टी के एक सीनियर नेता ने बताया कि अंतिम फैसला अखिलेश यादव ही लेंगे, लेकिन हाल की बैठकों में चर्चा कम से कम 50 सीटों पर लड़ने की हो रही है।
सभी दलों को दो टूक- कांग्रेस दिखाए बड़ा दिल
इंडिया ब्लॉक की अभी तक ही बैठकों में एक बात जो सबसे ज्यादा बार सुनने को मिली है, वो यही है कि अगर किसी राज्य में कोई क्षेत्रीय दल मजूबत है, तो कांग्रेस वहां गठबंधन में बड़ा दिल दिखाए और खुद को पीछे रखे। हालांकि ना ही सपा, ना ही आरएलडी और ना ही कांग्रेस...किसी की तरफ से अभी आधिकारिक तौर पर सीटों को लेकर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन एक बात तय है कि यूपी की ये 80 लोकसभा सीटें इस गठबंधन के लिए अहम कड़ी साबित होने जा रही हैं।












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