Exit Poll कब आएगा? इसमें अनुमान कैसे लगाया जाता है, कितने सटीक होते हैं इसके नतीजे? सबकुछ जानिए
Lok Sabha Election: सोमवार यानी 13 मई को चार चरणों का चुनाव खत्म हो गया है। आगे 20 मई, 25 मई और 1 जून को अंतिम तीन चरणों के लिए मतदान होना है। जैसे-जैसे लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौर खत्म होते जा रहे हैं, एग्जिट पोल (Exit Poll) के नतीजों को लेकर बेसब्री बढ़ती जा रही है।
सात चरणों के चुनाव का आखिरी चरण 1 जून को है और वोटों की गिनती 4 जून को होगी। ईवीएम से चुनाव होने की वजह से सारे आधिकारिक नतीजे उसी दिन घोषित होने की संभावना है। लेकिन, वोटों की गिनती से पहले एग्जिट पोल की भविष्यवाणियों को लेकर एक अलग ही दिलचस्पी रहती है।

एग्जिट पोल क्या है?
एग्जिट पोल की अवधारणा उस मतदाता की राय पर आधारित है, जो वोट डालने के बाद मतदान केंद्र से बाहर निकलता है। इसमें एग्जिट पोल करने वालों को वोटरों से मतदान के बाद जो जवाब मिलता है, उससे एक अनुमान लगाया जाता है कि चुनावी हवा का रुख किस दिशा में है। माना जाता है कि इस समय मतदाता जो भी जवाब देते हैं, वह सही होता है और उसमें बनावटीपन की गुंजाइश कम होती है।
ओपिनियन पोल से इस मायने में एग्जिट पोल अलग है कि यह वास्तव में वोटिंग के बाद मतदाताओं के जवाब पर आधारित होता है, इसलिए इसे अधिक सटीक और सत्य मना जाता है।
एग्जिट पोल का क्या महत्त्व है?
एग्जिट पोल से वास्तविक चुनाव परिणाम आने से पहले ही उसका एक अनुमान मिल सकता है। कई बार राजनीतिक दल इसके आधार पर अपनी अगली रणनीति भी तैयार करने लगते हैं तो बाजार पर भी इसका बहुत गहरा असर पड़ता है। अगर मतदान खत्म होने से पहले इसके नतीजे जारी किए जाते हैं, तो इससे चुनाव प्रभावित होने की गुंजाइश रहती है।
जहां तक राजनीतिक दलों की बात है तो अक्सर जिनके पक्ष में एग्जिट पोल के आंकड़े होते हैं, वे इससे खुश होते हैं। लेकिन, जिनका पलड़ा इसमें कमजोर दिखता है, वह इसके नतीजों और इसके विज्ञान पर सवाल उठाने शुरू कर देते हैं।
एग्जिट पोल के नतीजे कब आएंगे?
चुनाव आयोग की ओर से मतदान की अंतिम तारीख के आखिरी समय तक एग्जिट पोल के नतीजे घोषित करने पर रोक होती है। इसके जारी करने के समय के लिए मीडिया गाइडलाइंस जारी की जाती हैं और जबतक इसपर रोक होती है, इसकी भविष्यवाणी घोषित नहीं की जा सकती।
इस बार 1 जून को सातवें और अंतिम चरण का चुनाव है और उसी दिन मतदान खत्म होने के बाद निर्धारित समय पर एग्जिट पोल के नतीजे जारी किए जा सकते हैं। चुनाव आयोग ने इस तरह के सर्वे पर 19 अप्रैल को सुबह 7 बजे से 1 जून शाम 6.30 बजे तक रोक लगा रखी है।
एग्जिट पोल कैसे किया जाता है?
सैंपलिंग: एग्जिट पोल के बेहतर और सटीक नतीजों के लिए सर्वेक्षण करने वाले लोग एक चुनाव क्षेत्र के विभिन्न इलाकों के अलग-अलग मतदान केंद्रों से सैंपल जुटाते हैं, ताकि परिणाम ज्यादा प्रमाणिक रहे।
साक्षात्कार: इसमें वोट डालकर निकलने वालों से सवाल पूछा जाता है कि आपने किसे वोट दिया। मतदाताओं का चुनाव इस तरह से किया जाता है, ताकि ज्यादा व्यापक रुझान मिल सके और सर्वे की प्रमाणिकता सुनिश्चित हो सके।
प्रश्नों का चुनाव: सवाल पूछने वालों के पास एक विस्तृत प्रश्नावली होती है, जिसमें किसे वोट दिया, क्यों दिया, मुद्दे क्या थे आदि जैसे प्रश्न होते हैं। सर्वेक्षण विशेषज्ञों को इन सूचनाओं के आधार पर एक विस्तृत राय बनाना सुलभ होता है।
आंकड़ों को अंतिम रूप देना: उत्तरों के सारे सैंपल को एक जगह जुटा लिया जाता है और फिर उसमें चुनाव विश्लेषक मौजूदा आंकड़ों के आधार पर आने वाले चुनाव परिणामों का एक पूर्वानुमान जारी करते हैं।
क्या एग्जिट पोल के गलत होने की संभावना होती?
एग्जिट पोल के नतीजों के लिए भी सैंपल साइज बहुत मायने रखता है। जितना ज्यादा और बहुआयामी सैंपल होता है, नतीजों के उतने ही सत्यता के करीब होने की संभावना रहती है। हालांकि, यह हमेशा मानकर चलना चाहिए कि एग्जिट पोल भी सिर्फ एक अनुमान ही होता है और इसके गलत होने की भी संभावना बनी रहती है।
एग्जिट पोल के नतीजों में त्रुटियों की कई वजहें हो सकती हैं, जिनमें सैंपल जुटाने में गलती, पूर्वाग्रह, अलग-अलग डेमोग्राफी वाले वोटरों की राय को जगह नहीं मिल पाना जैसी बातें हो सकती हैं।
भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत कब हुई?
भारत में 1960 के दशक में ही सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) ने यह तकनीक विकसित कर ली थी। 1980 के दशक में इसे चुनाव विश्लेषक प्रणय रॉय ने डेविड बटलर के साथ मिलकर आगे बढ़ाया। 1996 में जब सैटेलाइट टीवी आ गए, तो दूरदर्शन के कहने पर सीएसडीएस ने एक राष्ट्रव्यापी एग्जिट पोल किया और यह काफी लोकप्रिय बन गया।












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