Lok Sabha Chunav 2024: नॉर्थ बंगाल में BJP,TMC में किसका पलड़ा भारी? कूचबिहार की सरगर्मी बहुत कुछ कह रही है
Lok Sabha Chunav West Bengal: उत्तर बंगाल का कूचबिहार सत्ताधारी टीएमसी और मुख्य विपक्षी बीजेपी के बीच चुनावी घमासान का केंद्र बना है। गुरुवार को प्राधनमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री कुछ ही किलोमीटर के अंतर पर एक ही दिन रैलियां कर रहे हैं। दरअसल, 2019 में भाजपा ने पूरे उत्तर बंगाल को अपने गढ़ में बदल दिया था।
उत्तर बंगाल की तीन महत्वपूर्ण लोकसभा सीटों कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में पहले चरण में 19 अप्रैल को मतदान होना है। इनमें से पहली दोनों सीटें अनुसूति जाति के लिए और तीसरी सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य में सातों चरणों में चुनाव होने हैं।

उत्तर बंगाल की 8 में से 7 सीटें जीती थी बीजेपी
2019 में कूचबिहार से बीजेपी के निसिथ प्रमाणिक को जीत मिली थी और अलीपुरद्वार से जॉन बार्ला लोकसभा पहुंचे थे। ये दोनों ही मोदी सरकार में मंत्री हैं। अगर भाजपा के लिए इस इलाके के महत्त्व को समझना है तो यह जानना भी आवश्यक है कि उत्तर बंगाल में लोकसभा की कुल 8 सीटें हैं, जिनमें से पिछली बार बीजेपी ने 7 सीटें जीत ली थी।
उत्तर बंगाल बन चुका है भाजपा का गढ़
अबकी बार पार्टी ने बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 35+ सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। पिछली बार पार्टी को बंगाल में कुल 18 सीटें मिलीं थीं। सिर्फ 2019 में ही नहीं, 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने उत्तर बंगाल के 8 जिलों की 54 विधानसभा सीटों में से 30 सीटें जीत ली थी। जबकि, कुल 294 सीटों में उसका आंकड़ा सिर्फ 77 सीटों तक ही पहुंच पाया था।
सीएए लागू होने से भाजपा का दावा मजबूत
मोदी सरकार ने लोकसभा चुनावों के ऐलान से ठीक पहले नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लागू कर दिया है। बंगाल में अनुसूचित जाति में आने वाले मतुआ और राजबंशी समुदायों पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला है। पिछली बार सिर्फ इस कानून को संसद से पास कराने के वादे पर ही भाजपा को इन समुदायों का समर्थन मिला था।
अगर मतुआ समुदाय दक्षिण बंगाल की कई लोकसभा सीटों पर जीत और हार सुनिश्चित कर सकता है तो राजबंशी समुदाय के हाथों में उत्तर बंगाल में जीत और हार की चाबी रहती है।
उत्तर बंगाल में राजबंशी समुदाय की आबादी अनुमानित तौर 30%
राजबंशी समुदाय पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी आबादी वाला दलित समुदाय है। उत्तर बंगाल में इनकी जनसंख्या अनुमानित तौर पर 30% बताई जाती है। बंगाल में 5 लोकसभा सीटों पर इस समुदाय की जनसंख्या 15% से अधिक है। यह सारी सीटें पिछली बार बीजेपी जीती थी।
राजबंशी प्रमाणिक के खिलाफ टीएमसी ने भी इसी समुदाय को दिया टिकट
ममता बनर्जी को भाजपा की इस ताकत का अंदाजा लग चुका है। इसलिए इस बार कूचबिहार में टीएमसी ने राजबंशी समुदाय से आने वाले केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक के खिलाफ इसी समुदाय से आने वाले सताई विधानसभा के एमएमएल जगदीश बर्मा बसुनिया को उतारा है।
यह सीट भाजपा और तृणमूल के लिए इस बार इस वजह से भी प्रतिष्ठा की सीट बन गई है, क्योंकि हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रमाणिक और टीएमसी नेता उद्यन गुहा के समर्थकों में झड़प तक हो चुकी है।
उत्तर बंगाल में लगातार कैंप कर रही हैं टीएमसी सुप्रीमो
उत्तर बंगाल में भाजपा के प्रभाव को काटने के लिए टीएमसी सुप्रीमो पिछले कई दिनों से इलाके के दौरे पर हैं। वह चाय बागानों में जा रही हैं, चाय की पत्तियां तोड़ रही हैं और यहां तक कि स्थानीय चाय की दुकान पर चाय तक बनाकर परोसती नजर आ चुकी हैं।
अप्रैल की शुरुआत में जब इस इलाके ने आंधी और तूफान का सामना किया तो मुख्यमंत्री चंद घंटों में ही चार्टर्ड विमान से कोलकाता से जलपाईगुड़ी पहुंच गईं। आंधी-तूफान से यह क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां 5 लोगों की मौत भी हुई है।












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