Lok Sabha Chunav: मतुआ के गढ़ में 'बोड़ो मां' के घर पर भिड़ी TMC-BJP, कौन कितने पानी में?
Lok Sabha Chunav 2024 West Bengal: पश्चिम बंगाल में इस बार भाजपा-टीएमसी की चुनावी लड़ाई एक घर को लेकर एक पारिवारिक जंग में भी तब्दील हो गई है। यह जिस मतुआ परिवार का मामला है, वह वोट बैंक के लिहाज से बंगाल की राजनीति में बहुत ही भारी पड़ता है और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से जुड़ी सियासत भी इसके इर्द-गिर्द ही घूमती है।
रविवार को टीएमसी ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें दिखा कि केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर और उनके समर्थक उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में एक घर का ताला तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। यह घर किसी सामान्य आदमी का नहीं है, बल्कि दिवंगत बीनापाणी देवी का है, जो मतुआ समुदाय की 'कुलमाता' रही हैं और 'बोड़ो मां' के रूप में लोकप्रिय हैं।

'बोड़ो मां' के घर को लेकर चाची-भतीजे में विवाद
बनगांव के भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर मतुआ महासभा के प्रमुख हैं और बीनापाणी देवी के पोते भी। जबकि, जिस घर का ताला तोड़ने का उनपर आरोप लगा है, वहां उनकी चाची और बीनापाणी देवी की बहू तृणमूल की राज्यसभा सांसद ममता बाला ठाकुर रहती हैं। एक ही परिवार के दोनों पक्ष मतुआ महासभा को लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर पर पर ताला तोड़ने का आरोप
इस घटना के बाद टीएमसी सांसद ममता बाला ने कहा, 'मैंने ऐसा कभी नहीं देखा। एक केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद होते हुए, उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों और समर्थकों के साथ हथौड़े से गेट तोड़ दिया और जूते पहनकर बोड़ो मां के कमरे में घुस गए। अगर बीजेपी मेरे साथ ऐसा कर सकती है तो आम लोगों के साथ क्या होगा?' बहरहाल इनकी शिकायत पर बंगाल पुलिस ने शांतनु ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
बोड़ो मां का पोता होने की वजह से घर पर मेरा अधिकार- शांतनु ठाकुर
लेकिन, केंद्रीय मंत्री की दलील है कि वह घर उनकी दादी का है, इसलिए उसपर उनका अधिकार है। उनके मुताबिक, 'बोड़ो मां के साथ मेरा क्या संबंध है? मैं उनका पोता हूं। मुझे उनके घर में रहने का भी अधिकार है। कोई भी कानून मुझसे यह हक नहीं छीन सकता।'
'बोड़ो मां' के घर को टीएमसी दफ्तर बनाने का लगाया आरोप
वे बोले, 'मैंने (ममता बाला से) कई बार गेट खोलने का अनुरोध किया। लेकिन, यदि इस घर में कोई गुंडों को रखता है, तो मुझे देखना होगा। उन्होंने गैर-कानूनी तरीके से पूरी प्रॉपर्टी पर कब्जा कर रखा है और यहां तक कि एक हिस्से को टीएमसी के दफ्तर में बदल रही हैं।' इस मामले को लेकर बीजेपी और टीएमसी में पार्टी स्तर पर भी आरोप-प्रत्यारोप जारी है।
कौन हैं बीनापाणी देवी यो बोड़ो मां?
बीनापाणी देवी मतुआ संप्रदाय के संस्थापक हरिचंद ठाकुर के परपोते प्रमथ रंजन ठाकुर की पत्नी थीं। 2019 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले उसी साल मार्च में 'बोड़ो मां' का निधन हो गया था। उसके बाद से ही परिवार में उनकी संपत्ति को लेकर घमासान और बढ़ गया। लेकिन, यह सिर्फ एक परिवार की बात नहीं है। यह मतुआ वोट बैंक का सवाल है, जिसपर भाजपा और टीएमसी दोनों की नजरें लगी रहती हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 'बोड़ो मां' से मिले थे पीएम मोदी
मतुआ समुदाय पर मतुआ महासभा के माध्यम से इस परिवार का हमेशा से दबदबा रहा है। इसकी अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि फरवरी 2019 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मतुआ समुदाय के मुख्यालय ठाकुरनगर पहुंचे थे और बोड़ो मां बीणापाणी ठाकुर से आशीर्वाद लिया था। उस चुनाव में भाजपा को इस समुदाय का जमकर समर्थन भी मिला था।
मतुआ वोट बैंक पर बीजेपी-टीएमसी दोनों की नजर
कुछ अनुमानों के मुताबिक मतुआ समुदाय की आबादी बंगाल में करीब 1.75 करोड़ है। यह बनगांव, बारासात, राणाघाट, कृष्णानगर, कूचबिहार,नादिया, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर और मालदा इलाकों में चुनाव को प्रभावित करने का दम रखते हैं। यही वजह है पिछले करीब डेढ़ दशकों से ठाकुर परिवार के लोग टीएमसी और भाजपा के माध्यम से लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा में पहुंचते रहे हैं।
कौन कितने पानी में?
मतुआ समुदाय मूल रूप से बांग्लादेश से आए शरणार्थी हैं, जिनके लिए नागरिकता संशोधन कानून (CAA) बहुत बड़ा मुद्दा रहा है। 2019 में भाजपा को इसे ही संसद से पास कराने के वादे का फायदा मिला। इस बार पार्टी अपने वादे को पूरा करने के दावे के साथ चुनाव मैदान में उतरी है और इस वजह से उसका मनोबल भी ऊंचा है।
वहीं, टीएमसी की ओर से चुनावों में मतुआ समुदाय के लोगों को यह समझाने की कोशिश हो रही है कि कथित रूप से सीएए की वजह से उन्हें 'घुसपैठिया' करार दिया जा सकता है। जबकि, यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि सीएए नागरिकता देने का कानून है, किसी को इसके अधिकार से वंचित करने का नहीं।












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