Lok Sabha Chunav 2024: Alappuzha में केसी वेणुगोपाल की किस्मत इस बार BJP के भरोसे क्यों है?
Kerala Lok Sabha Election 2024 Alappuzha: कांग्रेस पार्टी में आज अगर राहुल गांधी के बाद किसी नेता का सबसे ज्यादा दबदबा है तो वह उनके बहुत ही खास केसी वेणुगोपाल हैं। कांग्रेस महासचिव (संगठन) वेणुगोपाल एक बार फिर से केरल के अलाप्पुझा से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। 2019 में केरल की 20 में से एकमात्र यही सीट सीपीएम जीती थी।
वैसे राहुल गांधी के दाहिने हाथ माने जाने वाले वेणुगोपाल के लिए अलाप्पुझा कोई नई जगह नहीं है। वे 1996 से यहां से लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं और 2009 और 2014 में लोकसभा चुनाव में भी विजयी रह चुके हैं।

अलाप्पुझा एकमात्र सीट जहां 2019 में जीता लेफ्ट
वैसे अलाप्पुझा को लेफ्ट का गढ़ माना जाता है और पिछली बार सीपीएम के मौजूदा सांसद एएम आरिफ ने इस सीट पर कांग्रेस के शनीमोल उस्मान को 10,474 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। लेकिन, इस बार कांग्रेस के दिग्गज नेता की मौजूदगी से यहां का चुनाव दिलचस्प हो गया है।
लोकतंत्र, संविधान बचाने का चुनाव- केसी वेणुगोपाल
खुद वेणुगोपाल ने अपनी लड़ाई के बारे में ईटी से कहा है, 'यह चुनाव भारतीय लोकतंत्र को बचाने और संविधान की हिफाजत के लिए है।' उनका कहना है,'कांग्रेस इंडिया अलायंस की पार्टियों के साथ मोदी सरकार के खिलाफ इस लड़ाई की अगुवाई कर रही है। हर एक वोट, हर एक सीट का महत्त्व है। मुझे भरोसा है कि अलाप्पुझा के लोग इस ऐतिहासिक जंग में कांग्रेस के साथ खड़े होंगे।'
अलाप्पुझा में बीजेपी के प्रदर्शन से तय होगा वेणुगोपाल का भाग्य!
सीपीएम ने फिर से मौजूदा सांसद आरिफ को ही अलाप्पुझा के मैदान में उतारा है। लेकिन, भाजपा ने अपने जिस वरिष्ठ नेता शोभा सुरेंद्रन को टिकट दिया है, उनका ट्रैक रिकॉर्ड ऐसा है, जिसपर राहुल गांधी के खास नेता की जीत या हार निर्भर कर सकती है।
शोभा सुरेंद्रन का वोट शेयर बढ़ाने वाला ट्रैक रिकॉर्ड
शोभा सुरेंद्रन का रिकॉर्ड रहा है कि वह खुद चुनाव भले ही नहीं जीत पातीं, लेकिन जहां से भी लड़ती हैं, वहां बीजेपी का वोट शेयर काफी बढ़ा देती हैं। ऐसे में उनकी वजह से इस बार अलाप्पुझा में बीजेपी को जितना भी अतिरिक्त वोट मिलेगा, उससे कांग्रेस या सीपीएम में किसे फायद होगा और किसे नुकसान यह देखने वाली बात होगी।
बीजेपी को हिंदू और कुछ ईसाई वोट मिलने की संभावना
2019 के लोकसभा चुनाव में यहां पर बीजेपी के डॉ केएस राधाकृष्णन को 1,87,729 (17.22%) वोट मिले थे। अलाप्पुझा जिले में करीब 68.9% हिंदू, 20.5% मुस्लिम और 10.6% ईसाई आबादी है।
स्थानीय स्तर पर अनुमान लगााया जा रहा कि ईसाइयों का अधिकतर वोट वेणुगोपाल को मिल सकता है। जबकि, मुस्लिम होने की वजह से आरिफ को मुसलमानों का ज्यादातर वोट मिलने की संभावना है।
तब मुश्किल में फंस सकता है वेणुगोपाल का चुनाव
सिर्फ हिंदू वोट ही है, जिसके तीनों ही दलों के बीच बंटने की संभावना लग रही है। अगर पीएम मोदी के चेहरे और केरल में भाजपा की ओर से हो रहे संघर्ष की वजह से शोभा सुरेंद्रन को ज्यादा हिंदू वोट मिले और ईसाइयों में पार्टी के बढ़े संपर्क और कुछ ईसाई नेताओं के भाजपा में शामिल होने की वजह से इस समुदाय का भी कुछ वोट आ गया तो वेणुगोपाल के लिए बहुत ही कठिन परिस्थिति पैदा हो सकती है।
वेणुगोपाल को हराना भाजपा की भी प्राथमिकताओं में शामिल है और इसकी वजह से वह इस सीट पर हर तरह से अपनी पूरी ऊर्जा भी झोंक रही है। वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि पार्टी का संगठन चलाने वाले वेणुगोपाल खुद में इतने सक्षम हैं कि वह यहां का समीकरण अपने पक्ष में कर सकते हैं।
वेणुगोपाल के लिए व्यक्तिगत तौर पर भी महत्वपूर्ण चुनाव
वेणुगोपाल के लिए यह व्यक्तिगत तौर पर भी महत्वपूर्ण चुनाव है। उनकी जीत पार्टी में पहले से ही उनकी पकड़ को और मजबूत कर सकती है। दिल्ली के सियासी गलियारे में यह भी अटकलें हैं कि अगर कांग्रेस को फिर से विपक्ष में ही रहना पड़ा तो वेणुगोपाल अपनी जगह लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता के रूप में देख रहे हैं; और अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो उनकी सरकार में अहम भूमिका तय है।
सीपीएम के प्रत्याशी 59 वर्षीय आरिफ का कहना है, वह इस सीट को बचाने के लिए उतरे हैं। उनके मुताबिक, 'मैंने जो भी विकास कार्य किए हैं, वह जनता के सामने रख दिए हैं...इसमें अलाप्पुझा को एक जीवंत पर्यटन स्थल के रूप में बनाए रखने के लिए इसे आधुनिक और सुंदर बनाने के कदम भी शामिल हैं।'












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