भारत की GDP पर कोरोना का कहर, लॉकडउन से जीडीपी को चार फीसदी का परमानेंट नुकसान, क्रिसिल ने बताए ये खतरे

भारत की GDP पर कोरोना का कहर, लॉकडउन से जीडीपी को चार फीसदी का परमानेंट नुकसान, क्रिसिल ने बताए ये खतरे

नई दिल्ली। कोरोनावायरस के कारण देश की अर्थव्‍यवस्‍था को काफी पीछे ढकेल दिया है और ऐसे में क्रिसिल रिसर्च ने भारत की जीडीपी को लेकर जो बात बताई है वो वाकई भारत के लिए एक बड़े सदमें से कम नहीं है।

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कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा देशव्‍यापी लॉकडाउन किए जाने के कारण सारी गतिविधियों बंद होने के काण हर तरह से आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रिसर्च ने कहा है कि लॉकडाउन खत्म होने और प्रतिबंध धीरे-धीरे ही सही खत्म होने पर आर्थिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी लेकिन गतिविधियां पहले जैसी नहीं हो पाएंगी। इसके कारण हमेशा के लिए भारत की जीडीपी में चार फीसदी का नुकसान होगा जिसकी अगले वर्षों में भी भरपाई कर पाना मुश्किल होगा।

जीडीपी में चार फीसदी स्थायी नुकसान का असर होगा

जीडीपी में चार फीसदी स्थायी नुकसान का असर होगा

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी. के. जोशी ने कहा कि जीडीपी में चार फीसदी स्थायी नुकसान का असर होगा जिसके कारण बेरोजगारी की स्थिति बद से बदतर होगी। क्रिसिल रिसर्च के अनुसार लॉकडाउन के कारण भारत की जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पादन को हमेशा के लिए नुकसान होगा। बता दें CRISILरिसर्च इस प्रकार की रेटिंग देने वाली एक वैश्विक एनालिटिकल कंपनी है जो जोखिम और पॉलिसी सलाहकार सेवाओं के साथ-साथ रेटिंग, रिसर्च आदि प्रदान करती है। यह भारत की पहली क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है, जिसने देश में क्रेडिट रेटिंग की अवधारणा को आगे बढ़ाया है।

लॉकडाउन नहीं खत्म हुआ तो शून्य हो जाएगी ग्रोथ

लॉकडाउन नहीं खत्म हुआ तो शून्य हो जाएगी ग्रोथ

क्रिसिल रिसर्च की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि पिछले 40 दिनों के लॉकडाउन से जीडीपी में तीन फीसदी का नुकसान हो सकता है। क्रिसिल ने आगाह किया है कि इन हालात में चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 1.89 फीसदी रह सकती है लेकिन लॉकडाउन बढ़ाया गया तो विकास दर शून्य हो जाएगी। मालूम हो कि माना जा रहा है कि सरकार लॉकडाउन धीरे-धीरे खत्म करेगी और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेगी। जिससे अर्थव्यवस्था के ठीक होने की संभावना है, एक निश्चित मात्रा में आर्थिक गतिविधि होगी जिसे पुनर्प्राप्त नहीं किया जाएगा और यह जीडीपी का 4 प्रतिशत होने का अनुमान है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री"डीके जोशी ने कहा, कि भारत की हालत 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के प्रभाव में जो हुआ था उससे भी बदतर हो जाएगी भारत FY09 और FY11 के बीच जीडीपी अंतर को काफी हद तक बंद करने में सक्षम था।

लॉकडाउन में दस लाख करोड़ का हुआ नुकसान

लॉकडाउन में दस लाख करोड़ का हुआ नुकसान

क्रिसिल ने सोमवार को COVID-19 महामारी को नियंत्रित करने के लिए "विनाशकारी" लॉकडाउन के कारण कुल नुकसान दस लाख करोड़ का हुआ, अगर प्रतिव्‍यक्ति की बात करें तो प्रति व्यक्ति 7 हजार रुपये का घाटा हुआ हैं। जीडीपी पूर्वानुमान को 2020-21 के लिए 1.8 प्रतिशत तक सीमित कर दिया।

नुकसान की भरपाई के लिए अगले तीन वर्षो तक इस दर से होनी चाहिए जीडीपी ग्रोथ

नुकसान की भरपाई के लिए अगले तीन वर्षो तक इस दर से होनी चाहिए जीडीपी ग्रोथ

क्रिसिल ने आगाह किया कि अगर भारत को अपनी जीडीपी की ग्रोथ में आई गिरावट को भरना है तो अगले तीन वर्षों तक यानी कि वर्ष 2024 तक अपनी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 8.5 प्रतिशत की गति से हर साल बढ़ना होगा। उन्‍होंने ये भी कहा कि हालांकि, भारत ऐसा कारनामा अभी तक कर नही पाया हैं। क्रिसिल ने यह भी बताया कि ऐसी किसी भी वसूली के लिए, सरकार की ओर से राजकोषीय प्रतिक्रिया की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होना चाहिए जो अभी है।

इंडिया इंक के राजस्व और लाभ पर चोट

इंडिया इंक के राजस्व और लाभ पर चोट

क्रिसिल के अनुसार चालू वित्त वर्ष बुरी तरह डरा रहा है। अगर देश की विकास दर 1.8 फीसदी रहती है तो इंडिया इंक की राजस्व वृद्धि दर 8-10 फीसदी तक गिर जाएगी। अगर विकास दर शून्य फीसदी पर टिक जाती है तो कंपनियों के राजस्व में वृद्धि दर 10-12 फीसदी तक गिर जाएगी। अनुमान है कि कंपनियों के मुनाफे में भी कम से कम 15 फीसदी की गिरावट आएगी।

राहत पैकेज दोगुना यानी 3.5 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा

राहत पैकेज दोगुना यानी 3.5 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा

क्रिसिल की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने संकट से निपटने के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये का जो पैकेज दिया है, वह कम हैं। उसे उम्मीद है कि राहत पैकेज दोगुना यानी 3.5 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा और दूसरे चरण में उद्योगों पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा सरकार को लोन गारंटी जैसे उपायों से खर्च बढ़ाने के लिए भी उपाय करने होंगे।उन्होंने कहा कि राजकोषीय नीति को लचीला होने के साथ-साथ उत्तरदायी भी होना चाहिए और कमजोर लोगों के घरेलू आय संबंधी व्यवधानों को दूर करने के लिए टॉप-अप कल्याण उपायों पर विचार करना चाहिए। नीति को सीधे समर्थन और गारंटी के माध्यम से व्यवसायों, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए और अधिक सहायता प्रदान करनी चाहिए।

लंबे समय तक लॉकडाउन के लिए भारत के पास नहीं हैं संसाधन

लंबे समय तक लॉकडाउन के लिए भारत के पास नहीं हैं संसाधन

जोशी ने कहा कि जिन देशों के पास आर्थिक संसाधन पर्याप्त मात्रा में हैं, वे और लंबे समय तक लॉकडाउन जारी रख सकते हैं लेकिन भारत के पास इतने संसाधन नहीं है। इसलिए अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए लॉकडाउन खोलना होगा। संक्रमण रोकने के लिए उपाय जून तक खत्म किए जाने चाहिए।उन्‍होंने कहा कि "हम दूसरी तिमाही के अंत, जटिल संक्रमण, और चिकित्सा संकल्प 2021 के मध्य तक पहली-लहर के नियंत्रण को मानते हैं। नीतियां (अंततः) वसूली के लिए एक पुल हैं।

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