Lockdown: भारत की GDP विकास दर 1-2 फीसदी के बीच रहने की है संभावना: के सुब्रमणियन
नई दिल्ली। कोरोनावायरस प्रेरित राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का विस्तार गत 17 मई को 54वें दिन में प्रवेश कर जाएगा। ऐसे में भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के वी सुब्रमणियन ने सोमवार को कहा है कि इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में भारत की जीडीपी वृद्धि एक से दो फीसदी के बीच रहने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि आशा जताई है कि दूसरी तिमाही में आपूर्ति श्रृंखला के व्यवस्थित होने और प्रवासी कामगारों के वापस लौटने और उद्योगों के संचालन फिर से शुरू होने के बाद अर्थव्यवस्था अपने ट्रैक पर लौट आएगी।

सुब्रमणियन ने कहा कि सुस्त अनिश्चितता के कारण लॉकडाउन के कारण संभावित नौकरी के नुकसान का अनुमान लगाना मुश्किल है। हालांकि अच्छी कंपनियों ने अपने अधिकांश कार्यबल को बनाए रखने और न्यूनतम मजदूरी में कटौती करने की संभावना है और वे संचालन शुरू करते हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य कमजोर है, जिसका भारतीय निर्यात पर असर पड़ना तय है।

उन्होंने आगे कहा, हालांकि यह समय भारतीय उद्योगों के लिए अपनी रणनीतियों को सुधारने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए कमर कसने का है, क्योंकि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने विनिर्माण फैक्टरियों को चीन से बाहर स्थानांतरित करने पर विचार कर रही हैं।

साथ ही, उन्होंने कहा कि भारतीय शहर प्रवासी श्रमिकों के लिए एक जीवंत आधार प्रदान करते हैं, जहां वे अपने घरेलू शहरों की तुलना में अच्छी कामकाजी परिस्थितियों, बेहतर जीवनशैली और उचित शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की आकांक्षाओं को पूरा कर सकते हैं।

सुब्रमणियन ने कहा कि शेयर बाजार में मौजूदा अस्थिरता भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत मूल सिद्धांतों को नहीं दर्शाती है। बाजार उन निवेशकों की भावनाओं की सवारी करते हैं जो उच्च विकास वाले क्षेत्रों में निकट-अवधि के मुनाफे की तलाश करते हैं।

गौरतलब है राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते पिछले 41 दिनों से भारत में आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरहे विराम लग गया है और लगा विराम आगामी 17 माई को ही पूरी तरह से खत्म हो सकेगा।












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