पूर्वी लद्दाख में चीन ने फैलाया जाल, युद्ध की आहट से डर के साए में जी रहे लद्दाखी!
लेह। भारत और चीन के बीच युद्ध के हालात बने हुए हैं और इस टकराव को खत्म करने के लिए आज फिर भारत और चीन के बीच कोर कमांडर वार्ता जारी है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के वेस्टर्न सेक्टर में आने वाले पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग त्सो पर्यटकों का सबसे बड़ा आकर्षण है। इस झील के करीब चीन की स्थित कई पहाड़ियों पर पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों ने कब्जा कर लिया है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट पर अगर यकीन करें तो लद्दाख के स्थानीय लोग अब डर के साए में जी रहे हैं।

लद्दाख के कई सेक्टर्स में PLA की गश्त
चीनी सेना पूर्वी लद्दाख के कई सेक्टर्स तक गश्त करने लगी है और इस बात से यहां के लोगों में अजीब सी घबराहट है। फॉरवर्ड इलाकों तक स्थानीय नागरिकों के मूवमेंट को प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही फोन नेटवर्क भी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। ताशी नामग्याल जो लद्दाख ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, उनकी मानें तो उन्होंने कई दशकों से एलएसी पर इतने बड़े स्तर पर मिलिट्री लाव-लश्कर नहीं देखा था। नामग्याल, दुरबुक, श्योक, गलवान और दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये वहीं इलाके हैं जहां पर चीनी सेना ने अपना दावा पेश किया है। ये सभी इलाके एलएसी के काफी करीब हैं।

दशकों बाद देखी इस स्तर पर तैनाती
ताशी बताते हैं कि लोगों ने दशकों में इतने बड़े स्तर पर इस प्रकार की तैनाती देखी है। लोग डरे हुए हैं। 15 जून को गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प में 20 सैनिक शहीद हो गए थे। वहीं भारत की तरफ से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को रोका नहीं गया है। इन प्रोजेक्ट्स की वजह से ही मई की शुरुआत में दोनों देशों के बीच टकराव शुरू हुआ था। नामग्याल ने बताया कि कुछ लोग जानकारी साझा कर रहे हैं। फारवर्ड इलाकों में मौजूद पोटर्स की मानें तो चीनी सेना ने अपने जवानों को तैनात कर दिया है। उन्होंने बताया कि चीनी आक्रामकता के बाद भी भारत ने पुल और सड़कों का निर्माण बंद नहीं किया है।

टेलीफोन लाइनें डाउन होने से घबराए लोग
टेलीफोन लाइन भी डाउन हैं और इस वजह से लोगों में डर का माहौल है। नामग्याल के मुताबिक कम्यूनिकेशन लाइनें बंद होने की वजह से गांववालों को बहत समस्या हो रही है। सूत्रों की मानें तो दोनों तरफ से जवानों को तैनात किया गया है। चरवाहों को भी कुछ इलाकों में जाने से मना कर दिया गया है। एलएसी पर तनाव एक या दो जगहों तक ही सीमित नहीं है। बल्कि अब पूरे पूर्वी लद्दाख को अपनी चपेट में ले रहा है।

चीन लगातार स्थिति बदलने की कर रहा कोशिश
चीन यहां पर यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है और इस वजह से हालात अनियंत्रित होते जा रहे हैं। पहले गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो तक तनाव था लेकिन चीन ने अब दूसरी जगहों पर भी मोर्चा खोल दिया है। इस बीच चीन ने चुमार, देपसांग, डेमचोक, गोगरा, गलवान, पैंगोंग त्सो, त्रिग हाईट्स की भी यथास्थिति को बदलने की कोशिश की है। भारत ने भी अपने जवानों को तैनात कर दिया है। साथ ही इंडियन एयरफोर्स ने भी अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया है।












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