स्पीकर क्या पीएम पद मिले तो भी ठुकरा देंगे लाल कृष्ण आडवाणी!

LK Advani
लोकसभा चुनाव 2014 के परिणामों के बाद अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है, और लाल कृष्ण आडवाणी को बड़ा पद दिया जाता है, तो आडवाणी उसे ठुकरा देंगे, चाहे वो प्रधानमंत्री पद ही क्यों न हो। क्योंकि जो बातें हम आपको नीचे बताने जा रहे हैं, वो आडवाणी के दिमाग में भी जरूर चल रही होंगी।

भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी आडवाणी को लोकसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर, एनडीए का अध्यक्ष या फिर प्रणब मुखर्जी के बाद देश का राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। लेकिन अगर इतिहास को उठाकर देखें और उससे वर्तमान की तुलना करें, तो आडवाणी को इनमें से कोई पद नहीं लेना चाहिये। क्योंकि अगर उन्होंने एक भी पद ग्रहण किया, तो उनकी बनी बनायी छवि धूमिल हो सकती है। वर्तमान में आडवाणी की पहचान अटल के दिग्गज सहयोगी के रूप में है, अगर आडवाणी मोदी की टीम में शामिल हुए, तो वो मोदी के सहयोगी बन जायेंगे और उनकी वो पहचान खत्म हो जायेगी। महात्मा गांधी की स्मृति नेहरू-पटेल के साथ लोगों के जहन में है, जयप्रकाश नारायण के साथ नहीं।

स्पीकर का पद

अगर आडवाणी को स्पीकर का पद दिया जाये, तो उन्हें तुरंत मना कर देना चाहिये, क्योंकि इस पद पर एक तटस्थ व्यक्ति की जरूरत होती है। चूंकि आडवाणी पार्टी के अंदर कोऑर्डिनेशन के लिये जाने जाते हैं, इसलिये उन्हें यह पद नहीं ग्रहण करना चाहिये। चूंकि एनडीए तमाम सारे छोटे दों को शामिल करने में जुटा हुआ है, ऐसे में सबके बीच जबर्दस्त कोऑर्डिनेशन की जरूरत होगी और उसके लिये आडवाणी से अच्छा कोई नहीं है। वहीं कहीं न कहीं स्पीकर बनने के बाद वो टीम मोदी के सदस्य बन जायेंगे, और वहां पर ऊपर लिखी बात फिर से लागू हो जायेगी।

राष्ट्रपति का पद

प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल पूरा होने के बाद अगर आडवाणी को राष्ट्रपति बनाने पर बात चले तो भी आडवाणी को पद नहीं स्वीकार करना चाहिये, क्योंकि भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति के हाथ भी बंधे हुए होते हैं।

एनडीए अध्यक्ष

अटल के सहयोगी के रूप में आडवाणी की छवि जिस प्रकार लोगों के बीच बन चुकी है, उसके आगे एनडीए अध्यक्ष का पद बहुत छोटा प्रतीत होता है, लिहाजा उन्हें यह पद ग्रहण नहीं करना चाहिये।

प्रधानमंत्री का पद

अगर भाजपा आडवाणी को प्रधानमंत्री का पद भी देने के लिये तैयार हो जाये, तो भी आडवाणी को यह पद ग्रहण करने के बजाये नरेंद्र मोदी को दे देना चाहिये। ऐसा करके आडवाणी फक्र से कहें कि जिस श‍िष्य को मैंने उंगली पकड़कर चलाया वो आज देश का प्रधानमंत्री है। यह ऐसा पहली बार नहीं होगा कि कोई व्यक्त‍ि प्रधामंत्री का पद ठुकरा दे, जय प्रकाश नारायण यह काम पहले कर चुके हैं। हम सोनिया गांधी का नाम इसलिये नहीं लेंगे, क्योंकि उन्होंने पीएम पद पर नहीं रहते हुए भी पीएम के रूप में काम किया।

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