चाचा के पार्टी तोड़ने के बाद चिराग पासवान की पहली प्रतिक्रिया, साझा किया पुराना पत्र
नई दिल्ली, जून 15: लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के जमुई से सांसद चिराग पासवान अपनी ही पार्टी में अकेले पड़ गए हैं। चाचा पशुपति कुमार पारस और भाई प्रिंस राज की बगावत के बाद उनकी पार्टी के सभी सांसदों ने उनका साथ छोड़ दिया है। पार्टी में हुई टूट के बाद चिराग पासवान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने अपने चाचा पशुपति कुमार को लिए गए एक पुराने पत्र की कॉपी साझा की है।
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चिराग पासवान ने ट्विटर पर पत्र के कई हिस्सों के साझा करते हुए लिखा कि, ''पापा की बनाई इस पार्टी और अपने परिवार को साथ रखने के लिए किए मैंने प्रयास किया लेकिन असफल रहा। पार्टी मां के समान है और मां के साथ धोखा नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। पार्टी में आस्था रखने वाले लोगों का मैं धन्यवाद देता हूं। एक पुराना पत्र साझा करता हूं। इस पत्र में चिराग ने पार्टी अंदर चल रहे कलह की विस्तार से चर्चा की है।






इससे पहले सोमवार को चिराग पासवान दिल्ली स्थित चाचा के आवास पर उनसे मिलने भी पहुंचे। पासवान के रिश्ते के भाई और सांसद प्रिंस राज भी इसी आवास में रहते हैं। यहां घर के बाहर पहुंचने के बाद करीब 20 मिनट तक गेट नहीं खोला गया। ऐसे में चिराग को इंतजार करना पड़ा।इसके बाद पारस और प्रिंस के आवास पर करीब 90 मिनट तक रुकने के बाद चिराग पासवान वहां से मीडिया से बात किए बिना ही चले गए।












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