घर जमाई होने से दहेज के आरोपों से मुक्ति नहीं मिल सकती

लखनऊ। दहेज के मामले में आज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि घर जमाई होने से दहेज के आरोपों से पति को बरी नहीं किया जा सकता है।

court

कोर्ट ने कहा कि घर जघर माई होने से इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आरोपी का इस मामले में कोई दोष नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जमाई होने मात्र से आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता है।

कोर्ट ने सर्वेश के की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होने कोर्ट से कहा था कि चुंकि वह घर जमाई हैं ऐसे में दहेज के मामले से उनके माता-पिता को बरी कर देना चाहिए।

सर्वेश की अपील की कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि घर जमाई होने से माता-पिता दहेज के लालची है या नहीं इस बात का कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे में आरोपी के खिलाफ आरोपों को वापस नहीं लिया जा सकता है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के न्यायमूर्ती आदित्य नाथ ने कहा कि कोर्ट एफआईआर में दर्ज चार्ज के आधार पर अपना फैसला देगी, ऐसे में एफआईआर के इतर तथ्य को कोर्ट आधार नहीं मान सकती है।

सर्वेश का विवाह के कुछ दिन बाद पत्नी से हुए मतभेद के बाद वैवाहिक संबंध बिगड़ गये थे। जिसके बाद लड़की ने पति के सास-ससुर पर दहेज मांगने का आरोप लगाया है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+