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भ्रष्टाचारियों के लिए हानिकारक है ये स्वामी, पढ़िए किस-किस को लिया निशाने पर

आय से अधिक संपत्ति रखने के जिस मामले में बेंगलुरु की अदालत ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता और AIADMK नेता शशिकला को दोषी ठहराया था उसको सामने लाने में सुब्रमण्यम स्वामी का ही योगदान है।

नई दिल्ली। बेबाक और बेधड़क छवि वाले सुब्रमण्यम स्वामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी मुहिम छेड़ी जिससे न सिर्फ सत्ता के गलियारे में हलचल हुई बल्कि नेताओं की भी नींद उड़ी। भ्रष्टाचार के मामलों की पोल खोलने के लिए स्वामी ने जनहित याचिकाओं को हथियार बनाया और काफी हद तक कामयाब भी हुए। पढ़िए, स्वामी ने किस-किस को निशाने पर लिया-
1. जयललिता के खिलाफ केस

1. जयललिता के खिलाफ केस

आय से अधिक संपत्ति रखने के जिस मामले में बेंगलुरु की अदालत ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता और AIADMK नेता शशिकला को दोषी ठहराया था उसको सामने लाने में सुब्रमण्यम स्वामी का ही योगदान है। 1996 में स्वामी ने जयललिता के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई जिसकी जांच के बाद मामला कोर्ट में पहुंचा और सजा सुनाई गई। कर्नाटक हाई कोर्ट ने 11 मई 2015 को फैसला बदल दिया था और चारों को बरी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शशिकला और उनके दो रिश्तेदारों को जेल की सजा सुनाई। इस फैसले से शशिकला का सियासी करियर लगभग अधर में चला गया है। READ ALSO: ई. पलानीसामी बने AIADMK विधायक दल के नए नेता, पन्नीरसेल्वम को पार्टी से बाहर निकाला

2. हाशिमपुरा नरसंहार मामले में केस

2. हाशिमपुरा नरसंहार मामले में केस

1987 में हाशिमपुरा में पुलिस कस्टडी में एक समुदाय विशेष के युवकों के मारे जाने के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी ने आंदोलन शुरू किया और घटना के 25 साल बाद उन्होंने मामले को एक बार फिर कोर्ट तक पहुंचा दिया। 16 अक्टूबर 2012 को उन्होंने घटना में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री पी. चिदंबरम की भूमिका पर सवाल उठाए। हालांकि दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने सबूतों और गवाहों के अभाव में सभी 16 आरोपियों को बरी कर दिया। READ ALSO: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या होगा असर?

3. 2जी घोटाले के खुलासे में भी अहम भूमिका

3. 2जी घोटाले के खुलासे में भी अहम भूमिका

सुब्रमण्यम स्वामी उन कुछ लोगों में से एक हैं जिन्होंने नवंबर 2008 में 2जी घोटाले को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने ए. राजा के खिलाफ केस चलाने की अनुमति मांगते हुए पत्र लिखा था। लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने खुद सुप्रीम कोर्ट में केस दायर करने का फैसला लिया। जिसके बाद कोर्ट ने सीबीआई से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी। स्वामी ने ए राजा के संचार और सूचना प्रसारण मंत्री रहते पी. चिदंबरम और मनमोहन सिंह के बीच मीटिंग की बातों को भी आधिकारिक सबूत के तौर पर पेश किया। सीबीआई ने जांच के बाद ए. राजा को गिरफ्तार कर लिया था। उन्हें 15 महीने तक तिहाड़ जेल में रखा गया था।

4. नेशनल हेराल्ड केस

4. नेशनल हेराल्ड केस

1 नवंबर 2012 को सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी ने 2000 करोड़ रुपये (300 मिलियन डॉलर) का घोटाला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार ने सरकारी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स प्राइवेट लिमिटेड (AJPL) को अपनी निजी कंपनी यंग इंडियन के जरिए खरीदा था। यह कंपनी 23 नवंबर 2010 को बनाई गई थी। इसके जरिए उन्होंने नेशनल हेराल्ड और कौमी आवाज अखबार के प्रकाशन का अधिकार हासिल किया। स्वामी ने यह भी आरोप लगाया कंपनी ने ऑफिस सिर्फ अखबार के लिए लिया था लेकिन उसमें पासपोर्ट ऑफिस भी चलता था जिससे लाखों रुपये मिलते थे। उन्होंने राहुल गांधी पर 2009 लोकसभा चुनाव में अपने हलफनामे में जानकारी छुपाने का भी आरोप लगाया।

कोर्ट ने मामले में कई एंगल देखे और आखिकार 1 अगस्त 2014 को प्रवर्तन निदेशालय ने मामले की जांच शुरू कर दी। 27 जनवरी 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी से कहा कि वह मामले की तेज सुनवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में मजबूती से केस को पेश करें। 18 सितंबर 2015 को ईडी ने एकबार फिर जांच शुरू की। 16 जुलाई 2016 को दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाते हुए कांग्रेस पार्टी, AJL और यंग इंडियन की 2010-13 के बीच की बैलेंस शीट चेक करने की अनुमति देने से मना कर दिया। फिलहाल मामला कोर्ट में है।

5. राम मंदिर मामला:

5. राम मंदिर मामला:

22 फरवरी 2016 को सुब्रमण्यम स्वामी ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने की मांग को आगे बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने याचिका में अपील की कि कोर्ट जल्द से जल्द मामले की सुनवाई करे ताकि राम मंदिर बनाया जा सके। कोर्ट ने 26 फरवरी को याचिका पर सुनवाई करने का फैसला लिया। फिलहाल मामला कोर्ट में है।


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