तो 2018 में शुरू हो जाएगा मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड ट्रेन का काम! ये तकनीक आएगी काम
मोदी सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का 81 फीसदी धन जापान से बतौर लोन मिला है। अगर यह सर्वे पूरा हो गया तो 2018 तक इस पर काम शुरू होने की संभावना है।
मुंबई। भारत की पहली हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर पर काम करने के लिए भारतीय रेलवे लिडार टेक्नोलॉजी का उपयोग करेगी। इसके जरिए मुंबई से अहमदाबाद तक हाई स्पीड ट्रेन के कॉरिडोर का हवाई सर्वे किया जाएगा। इसकी मदद से सिर्फ जमीन ही नहीं बल्कि वनस्पतियों के नीचे का भी सही डेटा मिल सकेगा।

9-10 हफ्तों में हो जाएगा सर्वे
लिडार टेक्नोलॉजी ( लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग ) के जरिए 508 किलोमीटर के इस सर्वे का काम 9-10 हफ्तों में हो जाएगा। इसकी मदद से मोदी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट 2018 तक शुरू किया जाएगा। अमूमन इतने बड़े सर्वे में 6-8 महीने लगते हैं।
प्लान के मुताबिक 21 किलोमीटर छोड़कर बाकी पूरा कॉरिडोर एलिवेटेड होगा। नॉन एलिवेटेड 21 किलोमीटर में 7 किलोमीटर समुद्र के भीतर होगा। यह हवाई सर्वे हेलिकॉप्टर की मदद से किया जाएगा, जिसमें सारे जरूरी उपकरण मौजूद होंगे। इसमें 100 मेगा पिक्सल का डिजिटल कैमरा, लेजर स्कैनर और डेटा रिकॉर्डर शामिल होगा।
ऐसे होगा सर्वे
एक अधिकारी के मुताबिक लिडार एक रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी है जो दूरी को एक टार्गेट की ओर रोशनी देता है और इससे हो रही लाइट रिफ्लेक्शन के जरिए विश्लेषण किया जाता है। ग्राउंड कंट्रोस प्वाइंट्स को अंतिम रूप देने के लिए GPS यूनिट GPS सैटेलाइट्स के संपर्क में रहेगा।
रेलवे बोर्ड में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के कार्यकारी निदेशक मुकुल माथुर ने कहा किइस पूरे कॉरिडोर को कवर करने के लिए 30 घंटे फ्लाइंग टाइम है लेकिन प्रारंभिक कार्य और डाटा को प्रॉसेस करने में ज्यादा वक्त लगेगा। फिलहाल इस प्रक्रिया के तहत 6-8 महीनों की जगह 9 से 10 हफ्ते लगेंगे।
माथुर ने कहा कि लिडार टेक्नोलॉजी का लाभ यह है कि इससे वनस्पतियों के नीचे भी वास्तविक स्तर को पता लगाया जा सकेगा । उन्होंने कहा कि क्रॉस सेक्शन लैंड को बिना पत्तों के आसानी से देखा जा सकेगा। बता दें कि इस योजना की कुल लागत 97,636 करोड़ है। इस कुल रकम की 81 फीसदी फंडिंग जापान से बतौर ऋण आया है।
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