Ladakh Protest Row पर केंद्र ने बताया विपक्षी दलों का हाथ, समझें लद्दाख हिंसा की इनसाइड स्टोरी
Ladakh Protest Row: लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर बुधवार को भड़की हिंसा ने पूरे देश को हिला दिया। इस आंदोलन में जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, वहीं आगजनी और पथराव ने हालात को और गंभीर बना दिया।
इस घटना में अब तक चार लोगों की मौत और 80 से अधिक घायल होने की पुष्टि हुई है, जिनमें 30 से अधिक सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। जिस तरह से लेह में युवा अपनी मांगों को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे थे इस पर कई तरह के सवाल उठने लगे। चर्चा शुरू हुई कि बगैर किसी राजनीतिक सहायता के ये संभव नहीं था।

शाम होते-होते केंद्र सरकार ने भी हिंसा भड़काने के लिए सोनम वांगचुक और कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं की भूमिका पर अपनी मुहर लगा दी। आइए विस्तार से जानते हैं क्या था छठी अनुसूची और राज्य की मांग से कैसे सुलगा लद्दाख? क्या इसके राजनीतिक मायने....
केंद्र सरकार ने विपक्ष की भूमिका पर क्या कहा?
लेह हिंसा पर देश में राजनीतिक बाजार गर्म है एक ओर विपक्ष केंद्र सरकार पर राज्य की उपेक्षा करने का आरोप लगा रही है वहीं केंद्र सरकार इस हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर बड़ा बयान जारी किया।
मंत्रालय ने आरोप लगाया कि पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भड़काऊ बयानों ने प्रदर्शनकारियों को उकसाया और भीड़ हिंसक हो गई। मंत्रालय का कहना है कि कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं ने भी इस आंदोलन को भड़काने का काम किया।
गृह मंत्रालय ने कहा, " वांगचुक के उकसाने वाले बयानों और कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित व्यक्तियों की वजह से भीड़ हिंसक हुई। इन लोगों ने लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ चल रही वार्ता प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।"
Ladakh protest inside story: सोनम वांगचुक पर क्यों खड़े हो रहे सवाल?
सोनम वांगचुक जो पर्यावरणविद्ध और सोशलल एक्टिविस्ट हैं, हिंसा के लिए उनकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ समय पहले तक वह लद्दाख के पर्यावरण को बचाने और अन्य राज्यों के लोगों का लद्दाख में तथाकथित विरोध करते थे और लद्दाख की सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताओं के संरक्षण के लिए लगे हुए हैं। सोनम वांगचुक 10 सितंबर से भूख हड़ताल पर बैठे थे।
उनका मुख्य उद्देश्य था - लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत शामिल करना और पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना। मंत्रालय ने कहा कि ये मांगें पहले से ही हाई पावर कमेटी (HPC) के एजेंडे में शामिल थीं और इस पर लगातार औपचारिक व अनौपचारिक बैठकें हो रही थीं।
सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए भी बताया कि अब तक कई ठोस कदम उठाए गए हैं:
- अनुसूचित जनजाति आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% किया गया।
- परिषदों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किया गया।
- भोटी और पर्गी भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया।
- करीब 1,800 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई।
इसके बावजूद, कुछ नेताओं ने आंदोलनकारियों को गुमराह किया और "Arab Spring-स्टाइल आंदोलन" और "Gen Z प्रोटेस्ट" जैसी बातें करके युवाओं को भड़काया।
Ladakh Gen Z protest: कैसे भड़की हिंसा ?
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, 24 सितंबर की सुबह करीब 11:30 बजे भूख हड़ताल स्थल से भीड़ निकली और सीधे बीजेपी कार्यालय और मुख्य कार्यकारी पार्षद (CEC) लेह के सरकारी कार्यालय पर हमला कर दिया।
- भीड़ ने इन दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया।
- पुलिस वाहन को भी जला दिया गया।
- सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया गया।
- मंत्रालय के अनुसार, इसी दौरान सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ दिया और एम्बुलेंस से अपने गांव लौट गए।
Ladakh political tension पर सोनम वांगचुक ने क्या कहा?
हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आंदोलनकारी देश को शर्मसार नहीं करना चाहते और वे शांतिपूर्ण तरीके से ही अपनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि उनकी चुप्पी और अचानक अनशन तोड़ने से यह संदेश गया कि वह हिंसा की तैयारी से वाकिफ थे।
इस हिंसा पर जुनैद अजीम मट्टू (पूर्व मेयर, श्रीनगर) ने कहा "हिंसा किसी भी न्यायपूर्ण आंदोलन को खत्म करने का सबसे आसान तरीका है। इससे केवल निराशा और दुख मिलेगा। शांतिपूर्ण संघर्ष लंबा हो सकता है, लेकिन वही सही रास्ता है।"
कई विपक्षी दलों ने केंद्र पर आरोप लगाया कि उसने लद्दाख की मांगों को पूरा करने में देरी की, जिससे हालात बिगड़े। केंद्र ने कहा है कि 6 अक्टूबर को लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ अगली हाई पावर कमेटी की बैठक होगी।
इसके अलावा, 25-26 सितंबर को भी लेह के नेताओं के साथ अतिरिक्त वार्ता की योजना बनाई गई है। गृह मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि पुराने या भड़काऊ वीडियो सोशल मीडिया पर न फैलाएँ और शांति बनाए रखें।












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