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Layoffs का दौर अभी नहीं थमेगा, खर्चों में कटौती कर रहीं कंपनियां, 2023 में भी कर्मचारियों की छंटनी जारी रहेगी

पिछले कुछ दिनों से Layoffs कीवर्ड गूगल के ट्रेंडिंग सर्च में है। इसका कारण है कंपनियों में छंटनी का दौर। अनुमान है कि 2008 की मंदी की तुलना में इस बार अधिक कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ेगी। पढ़िए यह रिपोर्ट

Layoffs

आर्थिक मंदी की आशंका से सहमीं कंपनियां कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही हैं। मीडिया के साथ-साथ टेक कंपनियों में भी Layoffs यानी छंटनी की खबरें हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले कुछ महीनों में टेक कंपनियों में छंटनी पर कोई राहत नजर नहीं मिलने वाली। टेक कंपनियों में हुई छंटनी के कारण 2022 में 1.5 लाख से अधिक लोग पहले ही प्रभावित हो चुके हैं। अब टाइम्सनाऊ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने का दौर 2023 की शुरुआत तक जारी रहेगा।

986 टेक कंपनियों में छंटनी

इस रिपोर्ट में कहा गया, रिकॉर्ड संख्या में छंटनी होने के कारण 2008 में मंदी के दौरान नौकरी से निकाले गए लोगों की तुलना में अधिक लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। Layoff के बारे में नवीनतम रिपोर्ट और नौकरी से निकाले जा रहे लोगों से जुड़े आंकड़ों को ट्रैक करने वाली वेबसाइट- layoffs.fyi के आंकड़ों के अनुसार, कुल 986 टेक कंपनियां नवंबर के बाद लगभग 1,52,468 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा चुकी हैं। यह संख्या और बढ़ने की आशंका है।

14 साल पहले की आर्थिक मंदी

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि Google और इसकी मूल कंपनी अल्फाबेट इंक भी कर्मचारियों की छंटनी करने की योजना बना रही हैं। करीब 14 साल पहले आई आर्थिक मंदी से तुलना करते हुए टाइम्सनाऊ की रिपोर्ट में कहा गया, पिछली बार मंदी का दौर 2007 में शुरू हुआ था। लेहमैन ब्रदर्स ने जब दिवालिया होने की घोषणा की तब इसका पूरा प्रभाव पड़ा। उस समय की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2008 में लगभग 65,000 कर्मचारी निकाले गए थे। 2009 में भी लगभग इतने ही लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा था।

कोरोना काल में hiring boom, अब Layoffs

14 साल बाद के आर्थिक हालात के बारे में कहा गया है कि नवंबर, 2022 के मध्य से अब तक 1.5 लाख से अधिक लोगों को पहले ही हटाया जा चुका है। छंटनी का दौर जारी रहने की आशंका है। छंटनी के प्रमुख कारणों में से एक COVID-19 महामारी के दौरान आए हायरिंग बूम को माना जा रहा है। इस अवधि में ऑनलाइन कामकाज के मद्देनजर बड़ी संख्या में लोगों की भर्तियां हुईं। अब पश्चिमी दुनिया में आर्थिक मंदी की आशंका के कारण छंटनी का दौर शुरू हो गया है। इसका असर न केवल टेक और आईटी उद्योग पर पड़ा है, बल्कि समाचार मीडिया, एडटेक, खाद्य सेवा कंपनियों समेत वॉल स्ट्रीट भी प्रभावित हुआ है।

कंपनियों के खर्चे में कटौती !

बता दें कि छंटनी के दौरान कई टेक कंपनियों की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने का कारण कॉस्ट कटिंग है। यानी कंपनियां अपने खर्चों में कटौती कर रही हैं। कंपनियों ने ब्रिटेन समेत वेस्टर्न वर्ल्ड के देशों की इकोनॉमी का जिक्र कर कथित आर्थिक मंदी का जिक्र किया। आर्थिक मामलों के जानकारों की राय में दुनिया एक बार फिर आर्थिक मंदी की ओर बढ़ रही है। ऐसे में कई कंपनियों ने 2023 और आने वाले वर्षों में खुद का अस्तित्व बनाए रखने के लिए छंटनी का रास्ता चुना है।

कंपनी को बचाने के लिए कर्मचारियों की छंटनी

Layoffs कंपनियों की प्रमुख रणनीति के रूप में सामने आया है। मार्केटवॉच की एक रिपोर्ट से भी कुछ ऐसे ही संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, टेक कंपनियां 2023 और उसके बाद भी छंटनी करेंगी। ये खुद को बचाए रखने की चाह (viability) में अपनाई गई रणनीति है।

कंपनियों में भर्ती पर रोक

अमेरिका को टेक कंपनियों में छंटनी का खामियाजा भुगतना पड़ा है। भारत में लगभग 73,000 कर्मचारियों को निकाला गया है। 17,000 से अधिक प्रभावित हुए हैं। इस छंटनी से कैंपस प्लेसमेंट और फ्रेशर्स के लिए नौकरी के अवसर भी प्रभावित होने की आशंका है। ऐसा इसलिए क्योंकि कई कंपनियों ने भर्ती पर रोक की घोषणा की है।

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