आंध्र में किसानों, दलितों की जमीन किसके लिए हड़पी गई? जगन रेड्डी के खिलाफ पवन कल्याण का बड़ा दावा
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने दावा किया है कि राज्य के पूर्व सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी से जुड़ी कंपनियों ने किसानों और दलितों की जमीनें हड़प ली हैं। सरस्वती बिजली कंपनी के शेयर हस्तांतरण को लेकर वाईएस जगन मोहन रेड्डी और उनकी बहन वाईएस शर्मिला के बीच चल रहे कानूनी विवाद के बीच आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम ने कंपनी की प्रस्तावित साइट का दौरा करने के बाद ये आरोप लगाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना के लिए किसानों और दलितों से जमीनें जबरन ली गईं। कल्याण ने दावा किया कि इन जमीनों को हड़पने के लिए पेट्रोल बमों का इस्तेमाल किया गया।

कल्याण ने पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार की आलोचना करते हुए कहा कि वे उन जमीनों को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। वेमावरम गांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों ने अपने परिवारों के लिए रोजगार की उम्मीद में अपनी जमीनें छोड़ दी थीं, जो पूरी नहीं हुईं।
सरस्वती पावर के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया कथित तौर पर दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल के दौरान शुरू हुई थी। इसके परिणामस्वरूप 1,184 एकड़ भूमि एकत्रित हुई, जिसमें 24 एकड़ दलितों की भूमि और 400 एकड़ से अधिक वन भूमि शामिल थी। कल्याण ने कहा कि वाईएसआर परिवार के पास सरस्वती पावर में 86% स्वामित्व है, उन्होंने इसे पारिवारिक संपत्ति बताया।
कल्याण ने आरोप लगाया कि नौकरी देने की आड़ में सस्ते दामों पर जमीन का अधिग्रहण किया गया, लेकिन उस वादे को पूरा करने में विफल रहे। उन्होंने अधिकारियों को सरस्वती पावर से संबंधित भूमि पार्सल पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। जगन मोहन रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने के बाद 2009 में सरकार से 30 साल के लिए प्राप्त पट्टे को 2019 में 50 साल तक बढ़ा दिया गया।
इसके अलावा, कंपनी के लिए कृष्णा नदी से 196 करोड़ लीटर पानी खींचने की अनुमति कथित तौर पर हासिल की गई थी, जिसका संचालन अभी तक शुरू नहीं हुआ है। कल्याण ने इस मुद्दे को कैबिनेट की बैठक में उठाने और आगे की कार्रवाई के लिए गहन जांच सुनिश्चित करने की मंशा जताई।
किसानों को उम्मीद थी कि इस परियोजना के जरिए उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी मिलेगी, लेकिन उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं। उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाइयों ने अधिकारियों द्वारा किए गए वादों से कई लोगों का मोहभंग कर दिया है।
शेयर हस्तांतरण को लेकर जगन मोहन रेड्डी और वाईएस शर्मिला के बीच चल रही कानूनी लड़ाई ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है।












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