'ऑपरेशन 2019' के तहत लालू प्रसाद यादव को हुई जेल!
क्या है यह ऑपरेशन 2019 और किस लिये चलाया जा रहा है। इस पर हम चर्चा करने जा रहे हैं। जेल पहुंचाने के तुरंत बाद मीडिया में कुछ दिग्गजों का नाम सुर्खियों में आया, जो केंद्रीय जांच ब्यूरो के अगले टार्गेट हो सकते हैं। वो नाम हैं मुलायम सिंह यादव, मायावती, जयाललिता, आदि। हर कोई कह रहा है कि 2014 के चुनावों में इन नेताओं के वोटबैंक के किलों को ध्वस्त करने के लिये कांग्रेस के इशारे पर सीबीआई इन दिग्गजों की फाइलें खोल सकती है, लेकिन राजनीतिक अनुमान कह रहा है कि यह सब 2019 के लोकसभा चुनावों के लिये किया जा रहा है, और इस काम में भाजपा-कांग्रेस मिले हुए हैं।
आप सोच रहे होंगे कि 2019 तो अभी बहुत दूर है, अभी बात करने से क्या फायदा? तो सबसे पहले मैं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी और वर्तमान अध्यक्ष के वो बयान याद दिलाना चाहूंगा, जो इन्होंने सार्वजनिक मंच से दिये- "क्षेत्रीय व छोटे-छोटे दल देश के लोकतंत्र के लिये सबसे बड़ा खतरा।" जी हां यह बयान साफ दर्शाता है कि सपा, एआईएडीएमके, डीएमके, आदि क्षेत्रीय दल भाजपा की आंखों को चुभते हैं। क्योंकि कांग्रेस के खिलाफ जहां-जहां भाजपा सेंध लगाती है, वहां-वहां क्षेत्रीय दल बाजी मार ले जाते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो भाजपा के वोट काट देते हैं।
ब्लैकमेलिंग बनी नासूर
अब अगर कांग्रेस की बात करें, तो पिछले 9 सालों का इतिहास आपके सामने है। चाहे करुणानिधि हों या तृणमूल कांग्रेस या फिर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस लगभग सभी क्षेत्रीय दलों द्वारा ब्लैकमेलिंग का शिकार हो चुकी है। जब-जब बड़ा मुद्दा आता है, 10-20 सांसदों वाले ये दल सरकार गिराने की धमकी देने लगते हैं। राष्ट्रपति चुनाव हो या कोई बड़ा विधेयक, मुलायम नाराज की नाराजगी सोनिया की रातों की नींद हराम कर देती है। एक दिन वो भी था, जब रेल बजट, आम बजट आने पर ममता दीदी राहुल गांधी का सुख-चैन छीन लेती थीं। ऐसे में सरकार को बार-बार बहुतम का गणित बिठाना पड़ता था।
10-20 सांसदों को लेकर ब्लैकमेलिंग का गेम बंद हो जाये, इसलिये कांग्रेस भी देश के सभी क्षेत्रीय दलों को नेस्तनाबूत करना चाहती है। वोट बैंक पर असर न पड़े और देश में सिर्फ दो ही राजनीतिक पार्टियां राज करें- भाजपा और कांग्रेस। इसी मकसद के साथ क्षेत्रीय दलों के बड़े दिग्गजों का सफाया शुरू किया गया है।
खास बात यह है कि ज्यादातर दागी दिग्गज नेता क्षेत्रीय दलों में ही हैं। यानी सीबीआई अगर एक-एक कर मामले खोलना शुरू करे, तो देश के लगभग सभी क्षेत्रीय दलों के नेता जेल के अंदर होंगे और उनकी संसदीय व विधान सभा सदस्यता खत्म होने से उनका राजनीतिक करियर पर फुलस्टॉप लग सकता है। अपने इस अभियान में जिस जगह पर कांग्रेस फुल स्टॉप लगायेगी, वहीं से भारतीय जनता पार्टी का नया वाक्य शुरू होगा।













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