लालू यादव के जेल जाते ही नीतीश को लगी पीएम पद की खुशबू!

Lalu Yadav, Nitish Kumar
[अजय मोहन] चारा घोटाले में दोषी करार दिये जाने के बाद राष्‍ट्रीय जनता दल के अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव जेल क्‍या गये, बिहार के सारे राजनीतिक समीकरण बदल गये। जिस परिवर्तन की परिकल्‍पना लालू एंड पार्टी कर रही थी, उस परिवर्तन की दिशा बदलती दिखाई देने लगी है। खास बात यह है कि पटना में बैठे नीतीश कुमार के घर तक एक अजब सी खुशबू आ रही है। यह खुशबू पड़ोस के घर में पक रही बिरयानी की नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री की कुर्सी की है, जिस पर अभी तक मनमोहन सिंह के कपड़ों का इत्र फैला हुआ है।

सीधी बात करें तो लालू के जेल जाते ही नीतीश कुमार के लिये प्रधानमंत्री का रास्‍ता खुलता दिखाई दे रहा है। अगर कांग्रेसी शहजादे राहुल गांधी की कृपा हो गई, तो नीतीश को पीएम बनने से कोई रोक भी नहीं सकेगा। अपनी इस बात को सिद्ध करने के लिये मैं आपको बिहार ले जाना चाहूंगा, जहां पर 40 संसदीय सीटे हैं, जिनमें से 20 जनता दल यूनाइटेड यानी नीतीश के दल की हैं।

बिहार में नीतीश

लालू की एक बार फिर से बढ़ती हुई लोकप्रियता के चलते यह माना जा रहा था कि इस बार लोकसभा चुनाव में राजद की परफॉर्मेंस अच्‍छी हो सकती है, लेकिन अब उस पर ग्रहण लग चुका है। यानी जदयू की एक प्रतिद्वन्‍द्वी का काम तमाम हो चुका है। दूसरा सबसे बड़ी प्रतिद्वन्‍द्वी भाजपा है।

नरेंद्र मोदी की आंधी पूरे देश में थपेड़े मार रही है, लेकिन बिहार में फिलहाल पेड़ों के पत्‍ते ही हिल रहे हैं। यानी इससे पहले कि मोदी बिहार पर अपना जादू चलायें, अगर नीतीश ने जनता को हिप्‍नोटाइज़ कर लिया, तो निश्चित तौर पर उन्‍हें लोकसभा चुनाव में फायदा मिलेगा। यानी कुल मिलाकर बिहार में नीतीश की स्थिति और अच्‍छी होने वाली है। यह सब करने में उन्‍हें ज्‍यादा कठिनाई भी नहीं होगी क्‍योंकि वो राज्‍य में एक अच्‍छे मुख्‍यमंत्री के रूप में खुद को साबित कर चुके हैं।

चलो दिल्‍ली

चलिये अब श्रमजीवी एक्‍सप्रेस पर सवार हो जाइये क्‍योंकि अब हम आपको दिल्‍ली ले चल रहे हैं। वो भी सीधे 10 जनपथ, क्‍योंकि लोकसभा चुनाव की गणित में कई सारे गुणा-भाग इसी घर पर होने वाले हैं। बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने के साथ अगर नीतीश कांग्रेस का हाथ मिला लें और कांग्रेस नॉर्थ ईस्‍ट के राज्‍यों के साथ-साथ कर्नाटक, उत्‍तराखंड, हरियाणा, महाराष्‍ट्र और आंध्र प्रदेश में अच्‍छी संख्‍या में सीटें ले आयी, तो उसे नीतीश की सहायता से फिर से सत्‍ता में आने का मौका मिल सकता है। जाहिर सी बात है तब भी करुणानिधि जैसे कई नेता कांग्रेस के साथ खड़े होंगे। बस फर्क इतना होगा कि प्रधानमंत्री कांग्रेस का नहीं होगा।

अगर नीतीश का पलड़ा भारी रहा, तो यूपीए-3 में नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिल सकता है, क्‍योंकि राहुल गांधी इस पद के लिये इतनी जल्‍दबाजी नहीं करेंगे। और हां चुनावी रैलियों में जनता की भीड़ को देखते हुए यह भी संभव है कि चुनाव के पहले ही नीतीश यूपीए के जहाज पर सवार हो जायें। लेकिन फाइनली वही होगा जो जहाज का कप्‍तान यानी राहुल गांधी चाहेंगे।

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