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Lal Bahadur Shastri:"देखना एक दिन मेरी जान ले लेगी", शास्त्रीजी को आखिर पहले से ही क्यों था मौत का अंदेशा ?

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Lal Bahadur Shastri death anniversary:बतौर प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का कार्यकाल महज 19 महीने का था। लेकिन, इतने कम समय में उन्होंने आंतरिक,सैन्य और विदेश के मोर्चे पर कई इतने महत्वपूर्ण कार्य कर गए, जिसके चलते वे हम भारतीयों को हमेशा के लिए अपना कायल बना गए हैं। उनकी मौत आज ही के दिन 11 जनवरी, 1966 को रूसी शहर ताशकंद (Tashkent) में कुछ संदिग्ध परिस्थितियों में हो गई थी। शास्त्रीजी बहुत ही सामान्य परिवार से निकलकर देश की सत्ता के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे थे। लेकिन, उनके जीवन की सादगी में फिर भी कभी कोई असर नहीं पड़ा। सच्चाई और ईमानदारी की भावना उनके रगों में प्रवाहित होती थीं। आज हम उनके जीवन के एक ऐसे पहलू का जिक्र कर रहे हैं, जिससे लगता है कि उन्हें अंदेशा हो गया था कि उनके साथ कुछ होने वाला है।

शास्त्रीजी को मौत का पूर्वाभास!

शास्त्रीजी को मौत का पूर्वाभास!

साल 1966 में लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) पाकिस्तान के साथ समझौते के सिलसिले में रूसी शहर तासकंद गए थे। जब वे विदेश यात्रा पर निकलने वाले थे तो उन्होंने अचानक एक युवा संन्यासी की भविष्यवाणी का जिक्र छेड़ दिया। कहते हैं कि उसकी कुछ भविष्यवाणियां पहले सही साबित हुई थीं, इसलिए शास्त्रीजी (Shastriji) को भी उसपर विश्वास हो गया था। इससे पहले जब भी शास्त्रीजी राजकीय यात्रा पर विदेश जाते थे तो उनकी पत्नी ललिता शास्त्री (Lalita Shastri) भी उनके साथ होती थीं। लेकिन, इस बार खुद शास्त्रीजी ने ही ललिताजी को मास्को (Moscow) नहीं जाने के लिए समझाया था। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि इस जनवरी के महीने में वहां अत्यधिक ठंड होगी, ऐसे में उनका जाना सही नहीं रहेगा। शास्त्रीजी ने ललिताजी से कहा, 'वहां के हालात ऐसे हैं कि मुझे हर दिन देर रात तक काम की व्यस्तता रहेगी और मैं तुमको बिल्कुल ही समय नहीं दे पाऊंगा। इससे तुम्हें अकेलापन महसूस होगा और बुरा भी लगेगा।' उन्होंने ललिताजी अगली अमेरिका यात्रा में साथ ले चलने का वादा जरूर किया था और ललिताजी भी पति के आश्वासन से संतुष्ट हो गई थीं। ललिताजी को जरा भी आशंका नहीं थी कि उनके पति की यह आखिरी यात्रा होने वाली है। लेकिन, यह पहली बार नहीं हुआ था। लगता है कि शास्त्रीजी को अपने साथ कुछ अनहोनी की आशंका पहले से ही सताने लगी थी।

हमेशा शास्त्रीजी के साथ रहते थे रामनाथ

हमेशा शास्त्रीजी के साथ रहते थे रामनाथ

एक थे श्री रामनाथ। जो हर वक्त साए की तरह प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) के साथ रहते थे। वह जहां भी यात्राओं पर जाते, उनके साथ ही रहते थे। प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर भी वह उनके साथ ही होते थे। उनकी हर छोटी-मोटी जरूरतों का ख्याल रखते थे। शास्त्रीजी (Shastriji)को कोई भी दिक्कत ना हो, मानो यही उनकी ड्यूटी थी। एक बार बतौर प्रधानमंत्री शास्त्रीजी अपने गृहनगर के पड़ोस में मिर्जापुर (Mirzapur) के पास विंध्याचल (Vindhyachal) स्थित प्रसिद्ध माता विन्ध्यवासिनी देवी (Mata Vindhyavasini Devi) का दर्शन करने के लिए पहुंचे थे। प्रधानमंत्री थे तो उनके ठहरने का प्रबंध भी वहीं विंध्याचल पर्वत पर मौजूद रेस्ट हाऊस में किया गया था। इस यात्रा में भी रामनाथ अपनी ड्यूटी निभाने आए हुए थे।

रामनाथ को शराब की बुरी लत थी

रामनाथ को शराब की बुरी लत थी

शास्त्रीजी विंध्याचल रानी के दर्शन करने गए, पूजा-अर्चना की और माता का पवित्र प्रसाद ग्रहण करने के बाद जब रेस्ट हाऊस वापस लौटे तो रामनाथ कहीं नजर नहीं आ रहे थे। उन्होंने कई बार पुकारा लेकिन, रामनाथ जाने कहां चले गए थे। शास्त्रीजी को उनकी इसी आदत की चिंता रहती थी। काफी तलाशने पर देखा तो रामनाथ किनारे पड़े खूब जोर-जोर से खर्राटे भर रहे थे। जब प्रधानमंत्री ने पास जाकर जोर की आवाज लगाई तो वे उठने की कोशिश करते और फिर गिर पड़ते। असल में उन्हें शराब पीने की बुरी लत थी और शास्त्रीजी को इसके चलते उनकी सेहत की काफी फिक्र रहती थी। शास्त्रीजी इस बात से भी परेशान रहते थे कि कभी जब उन्हें भी रामनाथ की बहुत जरूरत पड़ गई तो वो उस वक्त ही गायब हो जाएंगे! खैर, रामनाथ ने सामने शास्त्रीजी को खड़े देख खुद को किसी तरह संभालने की कोशिश की।

"तुम्हारी शराब पीने की लत देखना एक दिन मेरी जान ले लेगी"

ऐसा कोई एक मौके पर नहीं हुआ था। रामनाथ की वजह से कई बार शास्त्रीजी का कीमती वक्त जाया हो चुका था। हर बार प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri)उन्हें तसल्ली से अपने पास बैठाते थे और इस बुरी लत को छोड़ने को कहते थे। कई मौकों पर शास्त्रीजी (Shastriji)उन्हें समझा चुके थे। वो उनसे काफी भावनात्मक होकर कहा करते थे, "तुम मेरे अतिप्रिय और खास आदमी हो। तुम्हारी शराब पीने की लत देखना एक दिन मेरी जान ले लेगी।" उस दिन तो ऐसा लग रहा था कि प्रधानमंत्री को इस बात का अंदेशा हो गया था कि कहीं रामनाथ की इसी आदत की वजह से उनकी जान ना चली जाए! और कुछ समय बाद ही तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की वह आशंका ही उनकी संदिग्ध मौत में तब्दील हो गई।

तो शास्त्रीजी की वह आशंका सही साबित हो गई!

तो शास्त्रीजी की वह आशंका सही साबित हो गई!

65 वर्ष पहले रूसी शहर ताशकंद (Tashkent)की ऐतिहासिक घटना से तो पूरी दुनिया वाकिफ है। 11 जनवरी, 1966 को भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री रूस के ताशकंद में सरकारी मेहमान के तौर पर होटल में ठहरे हुए थे। एक दिन पहले ही ऐतिहासिक ताशकंद समझौते पर उन्होंने हस्ताक्षर किए थे। वो जब सरकारी कार्यक्रमों से होटल में लौटे तो उन्होंने रामनाथ को बुलाने के लिए अपने कमरे से घंटी बजाई। शास्त्रीजी को पता चला की स्टाफ के सभी सदस्य नशे में टुन्न हो चुके थे। सादगी के मूरत शास्त्री जी भी किसी को क्या परेशान करना सोचकर अपने कमरे में सोने चले गए। सोने से पहले उन्होंने एक गिलास दूध पिया। कहते हैं कि दूध पीते ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्होंने उस हालात में जरूर रामनाथ समेत बाकी स्टाफ को आवाज लगाई होगी। लेकिन, वो तो होश में ही नहीं थे। आखिर उनकी वही आशंका सच साबित हुई। शायद रामनाथ सही समय पर उनकी आवाज सुन लेते तो देश के एक प्रधानमंत्री की ऐसी संदिग्ध परिस्थितियों में असामयिक मौत नहीं हुई होती! (D R Mankekar की पुस्तक से साभार)

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English summary
Lal Bahadur Shastri:"Seeing will take my life one day", why was Shastriji already anticipating his death?
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