Ladakh: पैंगोंग लेक के पास चीन की छाती तक बन गई चमचमाती सड़क, जानिए क्यों है महत्वपूर्ण

लेह, 8 नवंबर: पूर्वी लद्दाख में पिछले साल गलवान घाटी से चीन और भारत के बीच जो तनाव शुरू हुआ था, उसका घाव अभी तक पूरा नहीं भर पाया है। चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने पूर्वी लद्दाख में जिन जगहों पर अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देने की कोशिश की थी, उनमें पैंगोंग लेक के किनारे का इलाका भी शामिल था। हालांकि, बाद में इनमें से ज्यादातर जगहों पर सैन्य कमांडरों के बीच बातचीत से सुलह का रास्ता निकला और दोनों सेनाएं पीछे भी हट गईं। अब भारत ने पैंगोंग झील के नजदीक तक बहुत ही शानदार सड़क का निर्माण किया है। फिलहाल इन सड़कों का सबसे ज्यादा लाभ लद्दाख के लोगों और वहां की खूबसरती को निहारने पहुंचने वाले सैलानियों को मिलने की उम्मीद है।

चीन की छाती तक पहुंची चमचमाती सड़क

चीन की छाती तक पहुंची चमचमाती सड़क

प्रसार भारती के मुताबिक पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग लेक के किनारे 28.10 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण का काम पूरा हो गया है। अपनी खूबसूरती के लिए दुनियाभर में मशहूर इस झील के पास स्पांगमिक से कास्केट तक कुल 38.80 किलोमीटर सड़क का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना लद्दाख के तहत की जानी है, जिसमें अभी 10.70 किलोमीटर सड़क पर काम पूरा होना और बाकी है। इस योजना के लिए कुल लागत 11.41 करोड़ रुपये तय की गई है। फिलहाल इस चमचमाती सड़क के निर्माण से स्थानीय गांव वालों और सैलानियों को मदद मिलने की उम्मीद है। लेकिन, चीन की चालबाजियों के मद्देनजर इसके अपने सामरिक महत्त्व को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

क्यों महत्वपूर्ण है पैंगोंग झील तक सड़क निर्माण ?

क्यों महत्वपूर्ण है पैंगोंग झील तक सड़क निर्माण ?

लद्दाख में स्थित पैंगोंग लेक समुद्र तल से करीब 4,350 मीटर की ऊंचाई पर है और दुनिया की सबसे ऊंची खारे पानी की झील है। इसका पानी जो नीले रंग में रंगा हुआ मालूम होता है, अपने आसपास के सूखे पहाड़ों के बिल्कुल विपरीत है। पैंगोंग त्सो या पैंगोंग झील का शाब्दिक अर्थ होता है 'सम्मेलन झील'। लद्दाखी में पैंगोंग का अर्थ है 'सम्मेलन' और तिब्बती भाषा में त्सो का मतलब होता है झील। इस झील की पूरी लंबाई करीब 160 किलोमीटर है। इसकी लगभग एक-तिहाई से ज्यादा हिस्से पर भारत का नियंत्रण है, बाकी चीन के कब्जे में है। पिछले साल भारत और चीन की सेना जिन इलाकों में आमने-सामने आ गई थी, उसमें पैंगोंग झील के किनारे भी शामिल थे। भारत के नजरिए से पैंगोंग झील का सामरिक महत्त्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि यह चुशुल घाटी से सटा है, जो कि 1962 के युद्ध में दोनों देशों के बीच एक अहम मोर्चा बना गया था।(पहली दोनों तस्वीर सौजन्य- प्रसार भारती लद्दाख ट्विटर)

एलएसी के पास कनेक्टिविटी बढ़ाने पर है पूरा जोर

एलएसी के पास कनेक्टिविटी बढ़ाने पर है पूरा जोर

मोदी सरकार लगातार वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रही है और नई सड़कों का निर्माण उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है। इस साल सरकार ज्यादा सर्दी शुरू होने से पहले ही पक्की सड़कों के निर्माण पर खूब जोर दे रही है और इसलिए कई जगहों पर सड़क निर्माण का काम आईटीबीपी ने अपनी इंजीनियरिंग विंग को भी सौंप दिया है। इसके अलावा सरकार लद्दाख विजन 2050 के तहत भी आम लोगों की सुविधा के लिए दूर-दराज क्षेत्रों में विकास के काम पर जोर दे रही है। वहां के प्रशासनिक सचिव अजीत साहु के मुताबिक ऐसी जगहों पर 101 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं, जिसपर 110 करोड़ रुपये की लागत आई है। (तीसरी तस्वीर सौजन्य: जामयांग सेरिंग नामग्याल ट्विटर)

स्थानीय लोगों और पर्यटकों को मिलेगी मदद- नामग्याल

स्थानीय लोगों और पर्यटकों को मिलेगी मदद- नामग्याल

लद्दाख के सांसद और इस केंद्र शासित प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष जामयांग सेरिंग नामग्याल ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर पैंगोंग झील के पास बनाई गई सुंदर सकड़ की तस्वीरें साझा की हैं। उन्होंने लिखा है, 'स्पांगमिक-कास्केट की तय 38.80 किलोमीटर की सड़क में से खूबसूरत पैंगोंग के पास 28.10 की लंबाई वाली सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना लद्दाख के तहत 11.41 करोड़ रुपये की लागत से पूरी कर ली गई है। इससे स्थानीय गांव वालों और पर्यटक दोनों को मदद मिलेगी।'

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