वैक्सीन नहीं लगने के कारण कई भारतीय नाविकों की नौकरियों पर मंडराया खतरा
भारत में कोरोना वायरस के मामलों में पिछले कुछ महीनों में हुई तीव्र वृद्धि ने कई भारतीय नाविकों की नौकरी को खतरे में डाल दिया है। कई देश भारतीय नाविकों को अपने यहां नौकरी पर रखने से बच रहे हैं।
नई दिल्ली, 24 मई। भारत में कोरोना वायरस के मामलों में पिछले कुछ महीनों में हुई तीव्र वृद्धि ने कई भारतीय नाविकों की नौकरी को खतरे में डाल दिया है। कई देश भारतीय नाविकों को अपने यहां नौकरी पर रखने से बच रहे हैं। वहीं, कई देशों ने कोरोना वायरस के डर से उनके एक्टेंशन को बढ़ाने से मना कर दिया है। 44 वर्षीय एक नाविक जो हांगकांग की एक शिपिंग प्रबंधन कंपनी में काम करते हैं कहते हैं कि वह अप्रैल तक 4 महीनों की छुट्टी लेकर अपने गृह राज्य गोवा आए थे, लेकिन उन्हें वह अभी भी यहीं फंसे हुए हैं क्योंकि कुछ शिपिंग कंपनियों ने भारत में तेजी से बढ़ते कोरोना के मामलों के चलते यहां के स्टाफ को रखने से मना कर दिया था।

उन्होंने कहा कि शिपिंग कंपनियों का यह निर्णय ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित 24 से अधिक देशों द्वारा भारत से आने वाले यात्रियों पर प्रतिबंध लगाने और कंपनियों को मालवाहक जहाजों पर मौजूदा श्रमिकों हटाने से रोकने के बाद सामने आया है। चीन, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात के कई प्रमुख बंदरगाहों ने भी भारत से आने वाले जहाजों के लिए चालक दल के परिवर्तन पर रोक लगा दी है।
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नाविक ने आगे कहा कि उनकी कंपनी ने उनसे कहा है कि यदि तुम्हें नौकरी पर आना है तो पहले वैक्सीन लगवानी होगी। उन्होंने कहा कि अप्रैल में मैंने वैक्सीन की पहली डोज लगवाने के लिए सरकारी ऐप पर बुकिंग की, लेकिन मुझे इस (मई) महीने का स्लॉट मिला। उन्होंने कहा भारत में केवल 3.5 प्रतिशत लोगों का ही टीकाकरण हुआ है और उन्हें दूसरी खुराक लेने के लिए अभी अगस्त तक का इंतजार करना पड़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि, 'भारत सरकार ने पिछले साल कहा था कि नाविक प्रमुख कार्यकर्ता हैं, लेकिन फिर हमें वैक्सीन के लिए प्राथमिकता में क्यों नहीं रखा गया। मुझे अब अपनी नौकरी जाने का डर लग रहा है।'
गौरतलब है कि भारत चीन, फिलीपींस, रूस और यूक्रेन के बाद नाविकों का दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। लगभग 50 हजार जहाजों पर सवार 17 लाख नाविकों में से 240,000 भारतीय हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 14 प्रतिशत भारतीय नाविकों को कोरोना की पहली डोज दी जा चुकी है जबकि केवल 1 प्रतिशत लोगों को कोरोना की दोनों डोज लगी है।
शिपिंग कंपनियों ने उन नाविकों की भर्ती को बैन कर दिया है जिन्हें कोरोना का वैक्सीन नहीं लगी हैं।












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