LAC: तिब्बती परिवारों के लिए चीन की सेना का फरमान, PLA को हर घर से चाहिए एक जवान
नई दिल्ली, 30 जुलाई: लद्दाख के पैंगोंग झील के किनारे की चोटियों पर भारत से मुंह की खा चुका चीन तिब्बती नागरिकों पर डोरे डालने में लगा है और इसके लिए वह भारतीय सेना की नकल कर रहा है, ये रिपोर्ट वन इंडिया ने कुछ दिन पहले दी थी। अब जानकारी सामने आ रही है कि तिब्बती नागरिकों को चीन की सेना में शामिल करने के लिए उसने दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है। चीनी सेना ने तिब्बत के हर परिवार से कहा है कि वह अपने एक जवान सदस्य को पीएलए को सौंप दें। चीन को तिब्बत के नागरिक इसलिए चाहिए, ताकि वह उन्हें एलएसी पर भारत के मुकाबले के लिए खड़ा कर सके।

एलएसी पर भारत के मुकाबले के लिए ड्रैगन की नई चाल
चीन ने तिब्बत के हर परिवार के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि उन्हें अपने एक युवा सदस्य को चीन की सेना (पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी) में भेजना होगा। दरअसल, पिछले साल पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग लेक के साउथ बैंक की चोटियों पर भारतीय सेना के स्पेशल फ्रंटियर फोर्स की मार को चीन की सेना अभी तक भुला नहीं पा रही है। लद्दाख की उस घटना से कुछ महीने पहले ही चीन की सेना के एक एक्सपर्ट ने पीएलए को आगाह किया था कि हाई एल्टीट्यूट की लड़ाई हुई तो भारतीय सेना का मुकाबला करना उनके वश की बात नहीं होगी। लद्दाख की चोटियों पर चीन की सेना को इसका पुख्ता अहसास भी हो चुका है। कुछ दिन पहले ही वन इंडिया ने आपको वह खबर दी थी कि कैसे चीन ने भारतीय फ्रंटियर फोर्स की नकल करना शुरू कर दिया है।
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चीन की सेना में तिब्बती परिवार से एक सदस्य को जाना अनिवार्य
अब इंडिया टुडे टीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी सैन्य शक्ति में इजाफे के लिए चीन की सेना ने तिब्बत के हर परिवार के लिए यह जरूरी कर दिया है कि उन्हें अपने परिवार के एक युवा सदस्य को पीएलए में भेजना पड़ेगा। हमने आपको यह भी बताया था कि तिब्बती युवाओं को चीन की सेना में भर्ती के लिए उनकी 'वफादारी की परीक्षा' भी ली जा रही है। नई रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने कहा कि 'चीनी सेना ने तिब्बतियों के वफादार परिवारों में से एक-एक सदस्य को शामिल करने के लिए यह प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिन्हें भारत के साथ लगने वाली एलएसी पर स्थायी रूप से तैनात किया जाएगा।'

वफादारी परीक्षा के बाद करवाई जा रही है एंट्री
सूत्रों ने यह भी कहा है कि 'हमें खुफिया सूचनाएं मिल रही हैं कि चीनी सेना भारत के साथ एलएसी पर स्पेशल ऑपरेशन के लिए तिब्बती युवाओं की भर्ती कर रही है और वे इस तरह के ऑपरेशन की तैयारी के लिए नियमित अभ्यास कर रहे हैं।' दरअसल, लद्दाख में खराब मौसम के दौरान मोर्चे पर टिकने की क्या चुनौतियां है, पीएलए को यह बात अब अच्छी तरह से समझ में आ चुकी है। इसलिए उसे ऐसे सैनिक चाहिए, जो इन क्षेत्रों भारतीय जवानों के मुकाबले टिके रह सकें। लेकिन, चीन को तिब्बत के लोगों पर कभी भरोसा नहीं रहा है। शायद इसलिए वह बिना वफादारी परखे उनके भर्ती से परहेज कर रहा है। मसलन, पीएलए में शामिल होने वाले तिब्बतियों के चीन की मुख्य भाषा तो सीखनी ही पड़ रही है, सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के भरोसे पर खरे उतरकर भी दिखाना पड़ रहा है।

अब पैंगोंग इलाके से वापस हो चुकी हैं दोनों सेना
सूत्रों के मुताबिक चीन की सेना में तिब्बत के लोगों की भर्ती की यह प्रक्रिया इस साल जनवरी-फरवरी से शुरू हुई है। आपको बता दें कि पिछले साल चीन की सेना की आंखें तब फटी की फटी रह गई थीं, जब पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उसकी आक्रमकता को ठेंगा दिखाते हुए कैबिनेट सचिवालय के अधीन स्पेशल फ्रंटियर फोर्स ने भारतीय सेना की रेगुलर यूनिट के साथ मिलकर पैंगोंग त्सो के साउथ बैंक की कई चोटियों मसलन, मोखपरी, ब्लैक टॉप पर मोर्चा संभाल लिया था और पीएलए के जवान उनके सामने हर तरह से बौने नजर आ रहे थे। गौरतलब है कि दोनों सेनाओं के बीच पिछले साल अप्रैल-मई में ही एलएसी पर टकराव शुरू हुआ था। बाद में सैन्य कमांडरों और राजनयिक स्तर की बातचीत के बाद पैंगोंग त्सो के नॉर्थ और साउथ बैंक के अलावा गलवान घाटी से भी दोनों सेनाएं वापस लौट गई थीं। अलबत्ता स्प्रिंग्स-गोगरा हाइट्स जैसे कुछ जगहों पर अभी भी टकराव की स्थिति कायम है।












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