केजरीवाल ने परिवार शब्द का किया इस्तेमाल तो भड़के कुमार विश्वास, याद दिलाया अन्ना-योगेंद्र यादव का हाल
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन का 21 जनवरी आखिरी दिन था, ऐसे में अरविंद केजरीवाल नामांकन के आखिरी दिन कुछ समय की देरी से अपना नामांकन दाखिल कर सके। अरविंद केजरीवाल के नामांकन में देरी को लेकर काफी विवाद खड़ा हुआ, यहां तक कि आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने इस देरी के पीछे षड़यंत्र की बात कही है। सौरभ भारद्वाज ने नामांकन दाखिल करने में हुई देरी को साजिश करार दिया, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने एक ट्वीट करके इसका खंडन किया और कहा कि हमने भी यह गलतियां की हैं। लेकिन अरविंद केजरीवाल के ट्वीट पर कुमार विश्वास ने तीखा पलटवार करते हुए उनपर बड़ा हमला किया है।

सौरभ भारद्वाज ने लगाया था आरोप
दरअसल सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट करके लिखा कि तकरीबन 35 उम्मीदवार आरओ ऑफिस में मुख्यमंत्री केजरीवाल के साथ बैठे हैं और उनके पास जरूरी नामांकन के कागज भी नहीं हैं, यही नहीं इन लोगों के पास 10 प्रस्तावक भी नहीं हैं, ये लोग फोन करके उन्हें बुला रहे हैं। ये लोग कह रहे हैं कि जबतक उनका नामांकन पूरा नहीं होता है वह मुख्यमंत्री को नामांकन नहीं करने देंगे। जिसके जवाब में केजरीवाल ने ट्वीट करके लिखा कि कोई बात नहीं है, इनमे से कई लोग पहली बार नामांकन कर रहे हैं। इनसे गलती हो सकती हैं, हमने भी पहली बार गलती की थी, हमने उन्हें इसकी रियायत देनी चाहिए, मुझे उनके साथ इंतजार करने में कोई दिक्कत नहीं है, ये सभी लोग मेरे परिवार का हिस्सा हैं।

अब फैमिली जैसे शब्दों को बख्श दो
अरविंद केजरीवाल के इस ट्वीट पर कुमार विश्वास भड़क गए। जिस तरह से केजरीवाल ने इन सभी लोगों को परिवार का हिस्सा बताया उसपर कुमार विश्वास ने तल्ख टिप्पणी की। कुमार विश्वास ने ट्वीट करके लिखा कि फ़ैमिली ? जिस अन्ना को पिता कहा,जिस योगेंद्र यादव को बड़ा भाई कहा, जिस दोस्त को छोटा भाई कहा, उन सब के साथ जैसा षड्यंत्रकारी हत्यारों जैसा व्यवहार किया था, इन बेचारों के साथ भी वैसा ही व्यवहार करोगे क्या 😳? कम से कम, "परिवार-संस्कार-सरोकार" जैसे शब्दों को तो बख्श दो अब।

11 फरवरी को नतीजे
बता दें कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए तमाम राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है। दिल्ली मतदान 8 फरवरी को होगा, जबकि मतों की गणना 11 फरवरी को की जाएगी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एक बार फिर से आम आदमी पार्टी सत्ता में वापसी करने में सफल होती है या फिर कुछ उलटफेर देखने को मिलेगा। पिछले बार चुनाव में आम आदमी पार्टी ने विधानसभा की कुल 70 में से रिकॉर्ड 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी के खाते में 3 सीटें आई थी, वहीं कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल सकी थी।












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