कृष्णा नागर ने टोक्यों में लहराया तिरंगा, बैडमिंटन में Gold जीतने पर PM मोदी, CM गहलोत ने दी बधाई
कृष्णा नागर ने टोक्यों में लहराया तिरंगा, बैडमिंटन में Gold जीतने पर PM मोदी, CM गहलोत ने दी बधाई
नई दिल्ली। Tokyo Paralympics 2020. टोक्यों पैरालिंपिक 2020 के आखिरी दिन भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। भारत के झोली में एक के बाद 19 मेडल आ चुक हैं, जिसमें 5 गोल्ड, 8 सिल्वर और 6 ब्राउंज मेडल हैं। रविवार को खेले गए रोमांचक मुकाबले में पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी कृष्णा नागर ने गोल्ड जीतकर टोक्यो में तिरंगा लहराया। एसएच6 कैटेगरी में गोल्ड हासिल कर कृष्णा ने भारत की झोली में 19वां मेडल डाल दिया। इसके साथ ही पैरालिंपिक में ये भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। कृष्णा नागर से पहले गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी सुहास यथिराज ने बैडमिंटन के एसएल 4 कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा दिया।

कृष्णा नागर के जीत पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें जीत की बधाई दी। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर लिखा-हमारे बैडमिंटन खिलाड़ियों को टोक्यो पैरालिंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन किया हैं, जिसकी मुझे बेहद खुशी है। कृष्णा नगर की जीत ने हर देशवासी के चहरे पर मुस्कान ला दी है। उन्हें गोल्ड मेडल जीतने पर बधाई। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कृष्णा नागर के गोल्ड जीतने पर शुभकामनां दी और लिखा कि हम आपकी जीत पर गौरवान्वित हैं। उन्होंने कहा कि ये बेहतरीन प्रदर्शन रहा। वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी ट्वीट कर ये ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा, आपने पैरालिंपिक में बैडमिंटन में गोल्ड मेडल जीतकर तिरंगा को ऊंचा किया और अपनी काबिलियत साबित की। हर भारतीय आपस प्रेरित होंगे। इसके अलावा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, पीयूष गोयल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें ट्वीट कर बधाई दी।
कौन हैं कृष्णा नागर
कृष्णा नागर ने पुरुष बैडमिंटन के फाइनल मुकाबले में हॉन्गकॉन्ग के चू मान काई को 21-17, 16-21, 21-17 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर दिया। इससे पहले कृष्णा नागर ने सेमीफाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के क्रिस्टन कूंब्स को 21-10, 21-11 से हराकर फाइनल में अपनी सीट पक्की की थी। आपको बता दें कि कृष्णा नागर जयपुर, राजस्थान के रहने वाले हैं, जब वो 2 साल के थे, तब उनके परिवार को पता चला कि उनका बेटा इस बीमारी स जूझ रहा है, जिसमें उनकी लंबाई सामानय तौर पर नहीं बढ़ती। परिवार ने खेलों के प्रति उनके रुझाव को परखा । कृष्णा ने भी खुद को स्पोर्ट्स के लिए समर्पित कर दिया। ट्रेनिंग के लिए घर से 13 किलोमीटर दूर स्टेडियम जाते थे, लकिन कभी प्रैक्टिस मिस नहीं करते थ। उनकी मेहनत का परिणाम आज उन्हें मिला है।य़












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