Kolkata Taratala: Shambhunath Behera कौन है, जिसे BJP MLA ने ठहराया मौतों का दोषी? 60 लोग मलबे में दबे

Kolkata Taratala Tragedy: कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार (24 जून) दोपहर एक भयानक हादसा ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। निर्माणाधीन चाय गोदाम का शेड अचानक ढह गया। हादसे के समय वहां 50-60 मजदूर काम कर रहे थे। भारी लोहे के बीम, कंक्रीट और टिन की छत मजदूरों पर गिर पड़ी। हादसे में तीन की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि 21 लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है।

बचाव कार्य में NDRF, दमकल, पुलिस, सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमें जुटी हुई हैं। ऊर्ध्वाधर ड्रिलिंग मशीन (Vertical Drilling), हाइड्रोलिक क्रेन, गैस कटर और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari), स्वास्थ्य मंत्री और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं। राज्य सरकार ने नवान्न में कंट्रोल रूम खोल दिया है। इस हादसे में BJP MLA ने शंभूनाथ बेहरा को मुख्य दोषी ठहराया है। अब सवाल यह है कि शंभूनाथ बेहरा आखिर कौन हैं और हादसे में उनकी भूमिका क्या है?

Kolkata Taratala Tragedy Who Is Shambhu Bera

Who Is Shambhunath Behera: शंभूनाथ बेहरा कौन हैं?

शंभूनाथ बेहरा इस निर्माणाधीन गोदाम के ठेकेदार (Contractor) या साइट इंचार्ज बताए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रारंभिक जांच के अनुसार, वे पिछले डेढ़ साल से इस प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे। गोदाम ऑक्टोबियस टी एंड इंडस्ट्रीज (पुरानी बंद कंपनी) की जमीन पर बन रहा था, जिसे बंदरगाह प्राधिकरण ने एक चाय कंपनी को पट्टे पर दिया था।

भाजपा विधायक राकेश सिंह ने आरोप लगाया है कि शंभूनाथ बेहरा ने सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की। बिना पर्याप्त शटरिंग, बिना इंजीनियरिंग चेक और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। MLA का दावा है कि सुबह से ही ढांचा हिल रहा था, फिर भी मजदूरों को काम पर लगाए रखा गया। ठेकेदार की लापरवाही ने मजदूरों की जान को सस्ता समझ लिया। पुलिस और प्रशासन शंभूनाथ बेहरा की भूमिका की जांच कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ठेकेदार खुद भी मलबे में फंसा हो सकता है।

CM Suvendu Adhikari Statement: सीएम ने क्या कहा? किसे बताया जिम्मेदार?

पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह घटना दोपहर 12:07 बजे हुई और बचाव कार्य 12:45 बजे शुरू हुआ। कोलकाता पुलिस, सिविल डिफेंस और KMC के लोग... बचाव कार्य अभी भी चल रहा है। अभी किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचना सही नहीं होगा। अब तक 21 लोगों को निकाला गया है। उनमें से तीन की मौत हो गई है, अठारह जीवित हैं और नौ का SSKM अस्पताल में इलाज चल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा, 'प्रोजेक्ट प्लान को 17 जनवरी 2026 को मंजूरी दी गई थी। ज़मीन का मालिक SMPA है और शंभूनाथ बेहरा और उनके पार्टनर के नाम पर जमीन की लीज है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, शुरू में एक गलत प्लान को मंज़ूरी दी गई थी।'

हादसा कैसे हुआ? क्रोनोलॉजी को समझें...

  • समय: बुधवार दोपहर करीब 12 बजे।
  • स्थान: ताराताला, ब्रेस ब्रिज के पास, ट्रांसपोर्ट डिपो रोड।
  • घटना: गोदाम की तीन मंजिला संरचना पर कंक्रीट की छत डाली जा रही थी। अचानक पूरा शेड ढह गया।
  • कारण (प्रारंभिक): मंगलवार की भारी बारिश से संरचना कमजोर हुई, घटिया निर्माण सामग्री, अपर्याप्त सपोर्ट।
  • स्थिति: मजदूर लोहे के बीम और मलबे के नीचे दबे। कई की चीखें सुनाई दे रही हैं।

त्रासदी में TMC का क्या घालमेल?

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटनास्थल का दौरा किया और तेज बचाव का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता जान बचाना है। BJP नेताओं ने सीधे तौर पर ठेकेदार शंभूनाथ बेहरा और संबंधित कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि TMC शासन में निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और सुरक्षा की अनदेखी आम है। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि निर्माण कार्य लंबे समय से बिना उचित निगरानी के चल रहा था।

क्यों बार-बार होते हैं ऐसे हादसे?

  • कोलकाता और पश्चिम बंगाल में निर्माण हादसे नई बात नहीं:
  • मार्च 2024, गार्डन रीच: 5 मंजिला इमारत गिरी, 12 मौतें।
  • 2016, विवेकानंद फ्लाईओवर: 27 मौतें, लापरवाही साबित।

मजदूरों की दर्दनाक कहानी

ज्यादातर मजदूर बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों से आए थे। वे परिवार चलाने के लिए रोज 10-12 घंटे काम करते थे। महिलाएं भी काम पर थीं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वे सुबह काम पर आए, बच्चों का भविष्य सोचकर। किसी ने नहीं सोचा था कि आज उनका आखिरी दिन होगा। घायलों के चेहरे पर दर्द और भय साफ दिख रहा था। भारत में निर्माण मजदूर सबसे असुरक्षित वर्ग हैं। कोई बीमा, कोई सुरक्षा गियर, कोई नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं। हादसे के बाद मुआवजा मिलता है, लेकिन जान वापस नहीं आती।

तारातला हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि विकास की होड़ में इंसानियत नहीं खोनी चाहिए। मलबे में फंसे हर मजदूर की जिंदगी बचाना वक्त की पुकार है। परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं। उम्मीद है कि बचाव कार्य जल्द पूरा होगा और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।

Kolkata Taratala Tragedy: मलबे से आती चीखें, कटा हुआ हाथ निकला बाहर, लाशों का हाल रूह कंपाने वाला-मौत का मंजर
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