'राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच के लिए गठित SIT फर्जी', केजरीवाल ने पूछा- CBI और ED को क्यों नहीं सौंपा गया
Arvind Kejriwal Questions Ram Mandir SIT: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के कथित मामले को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस एसआईटी को पूरी तरह निष्प्रभावी बताते हुए इसे केवल एक "लीपापोती" की कोशिश करार दिया है।
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो जारी कर जांच प्रक्रिया की कानूनी वैधता को कटघरे में खड़ा किया। उनका दावा है कि इस मामले में बिना किसी एफआईआर (FIR) के ही जांच टीम का गठन कर दिया गया है, जिसके कारण इस पैनल के पास जांच को आगे बढ़ाने के लिए कोई वास्तविक कानूनी शक्ति नहीं है।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यह कवायद केवल बड़े चेहरों को बचाने और मामले को रफा-दफा करने के लिए की जा रही है। उन्होंने हैरानगी जताई कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे की जांच अभी तक सीबीआई (CBI) या ईडी (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपी गई है।
बिना एफआईआर एसआईटी गठन के कानूनी आधार पर सवाल
अपने वीडियो संदेश में 'आप' प्रमुख ने जांच प्रक्रिया की विधिक खामियों को रेखांकित किया। अरविंद केजरीवाल ने पूछा कि आखिर किस कानून या धारा के तहत बिना एफआईआर दर्ज किए इस एसआईटी का गठन किया गया? उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस नियमों के अनुसार, जब तक प्राथमिक रिपोर्ट यानी एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक ऐसी किसी विशेष जांच समिति का कोई कानूनी आधार नहीं होता।
केजरीवाल का कहना है कि वर्तमान में गठित एसआईटी के पास कोई वास्तविक शक्तियां नहीं हैं। यह टीम किसी भी संदिग्ध को समन भेजकर नहीं बुला सकती, न ही किसी ठिकाने पर छापेमारी कर सकती है। साथ ही, इस एसआईटी के पास किसी आरोपी को गिरफ्तार करने का भी कोई अधिकार नहीं है, जिससे यह पूरी जांच केवल एक दिखावा बनकर रह गई है।
उन्होंने जांच के मौजूदा तरीकों पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन केवल निचले स्तर के छोटे कर्मचारियों को पकड़कर पूछताछ कर रहा है। केजरीवाल ने तर्क दिया कि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी बिना किसी शीर्ष अधिकारी या बड़े रसूखदार व्यक्ति के संरक्षण के संभव नहीं है, लेकिन कार्रवाई केवल छोटों पर हो रही है ताकि बड़े दोषियों को बचाया जा सके।
2021 के अयोध्या भूमि विवाद से की तुलना
इस नए विवाद को संदर्भ देने के लिए केजरीवाल ने साल 2021 के एक पुराने घटनाक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब अयोध्या में नेताओं और अफसरों द्वारा कौड़ियों के भाव जमीनें खरीदने के आरोप लगे थे, तब भी भारी जन-आक्रोश के बीच एक जांच टीम बनाई गई थी।
उन्होंने दावा किया कि 2021 की उस जांच की भी कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी और आज तक किसी को नहीं पता कि उस जांच का क्या नतीजा निकला। केजरीवाल ने आशंका जताई कि चढ़ावा चोरी मामले में बनी यह नई एसआईटी भी थोड़े ही दिनों में ठंडे बस्ते में चली जाएगी और लोग इस पूरे मामले को भूल जाएंगे.
केजरीवाल ने इसे एक सोची-समझी प्रशासनिक रणनीति बताया, जिसके तहत जब भी कोई संवेदनशील मुद्दा सामने आता है, तो जनता के गुस्से को शांत करने के लिए बिना अधिकारों वाली जांच समिति बना दी जाती है। बाद में समय बीतने के साथ जांच को रफा-दफा कर दिया जाता है और मुख्य आरोपी बच निकलते हैं।
ईडी और सीबीआई से निष्पक्ष जांच की मांग
अरविंद केजरीवाल ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे तुरंत केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंपने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बात राम मंदिर के चढ़ावे की पवित्रता की है, तो सरकार सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों को इस मामले से दूर क्यों रख रही है? उनका कहना है कि आज देश का हर श्रद्धालु इस बात का जवाब चाहता है।












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