जानिए कौन हैं उपेंद्र दत्त शुक्ला, बीजेपी ने गोरखपुर से बनाया है उम्मीदवार
उपेंद्र शुक्ला विद्यार्थी जीवन से ही भाजपा के प्रति काफी निष्ठावान थे। विद्यार्थी परिषद की राजनीति में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
नई दिल्ली। गोरखपुर लोकसभा सीट पर होने जा रहे उप चुनाव के लिए बीजेपी ने क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला काफी लंबे समय से पार्टी और जनता के बीच सक्रिय हैं। लेकिन अब तक उन्हे एक जनप्रतिनिधि के तौर पर काम करने का मौका नही मिला है हालांकि वह कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से अपना भाग्य भी आजमा चुके हैं लेकिन पार्टी का सहयोग उनको नहीं मिला पाया था। उनकी जगह किसी और को पार्टी का सिम्बल मिल गया था।

पूर्वांचल में उनकी पहचान ब्राह्मण चेहरे के रूप में होती हैं
उपेंद्र दत्त शुक्ला की संगठन और कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ है। पूर्वांचल में उनकी पहचान ब्राह्मण चेहरे के रूप में होती हैं। वह राज्यसभा सांसद और वर्तमान में केंद्र में मंत्री शिव प्रताप शुक्ला के बेहद करीबी बताए जाते है। उपेंद्र शुक्ला ने जिला अध्यक्ष के रुप में भी पार्टी को अपनी सेवा दी है। प्रदेश में जब राजनाथ सिंह की सरकार थी, तो उपेंद्र शुक्ला गोरखपुर में पार्टी के जिलाध्यक्ष थे।

बीजेपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं
उपेंद्र शुक्ला विद्यार्थी जीवन से ही भाजपा के प्रति काफी निष्ठावान थे। विद्यार्थी परिषद की राजनीति में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। मौजूदा समय में उपेंद्र शुक्ला भारतीय जनता पार्टी गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं, जो 64 विधानसभा 12 लोकसभा क्षेत्रों का एक बहुत बड़ा संगठन क्षेत्र होता है। उपेंद्र शुक्ला इस पद पर 2014 से अभी तक बने हुए हैं।

सहजनवां से उनके नाम की चर्चा चली थी
बीते विधानसभा चुनावों में सहजनवां से उनके नाम की चर्चा चल रही थी, कि वर्तमान विधायक शीतल पांडेय के नाम पर आम सहमति बनते ही कहानी खत्म हो गई। इसके बावजूद वह बीजेपी के साथ हमेशा लगे रहे और पार्टी में क्षेत्रीय अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण ओहदे को संभालते रहे। अब तक बीजेपी के सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष कहीं न कहीं सेट हो चुके हैं. ऐसे में वर्षो से सतत प्रयत्नशील रहे उपेंद्र दत्त शुक्ला को पार्टी हाईकमान व स्थानीय पदाधिकारियों की सहमति के बाद गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में प्रत्याशी घोषित किया है।गोरखपुर के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो सदर लोकसभा सीट पर बीते 29 साल से मंदिर का कब्जा है।












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