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क्या है इलेक्टोरल बांड? जिसको लेकर संसद में मचा हुआ है घमासान, जानें आसान भाषा में यहां

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नई दिल्ली। अब तक आपने 'इलेक्टोरल बांड' का नाम तो सुन ही लिया होगा जिसको लेकर संसद में घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार इलेक्टोरल बांड के जरिए भ्रष्टाचार कर रही है। सुबह से खबरों में यही शब्द सुर्खियों में बना हुआ है लेकिन ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम ही नहीं है कि 'इलेक्टोरल बांड' आखिर है क्या? क्यों इसे लेकर बवाल मचा हुआ है? तो आइए हम आपको आसान भाषा में बताते हैं कि इलेक्ट्रोरल बांड क्या है...

इलेक्टोरल बांड का मतलब

इलेक्टोरल बांड का मतलब

जैसा कि आप नाम से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यह शब्द इलेक्शन से मिलता जुलता है। जी हां, इलेक्टोरल बांड को आसान भाषा में चुनावी बॉन्ड कहते हैं। वर्ष 2017 के बजट में मोदी सरकार ने चुनावी बॉन्ड व्यवस्था की घोषणा की थी। इसे चुनावी फंडिंग में सुधार लाने के इरादे से लागू किया गया था। बॉन्ड के मुताबिक अगर कोई अपनी पसंदीदा पार्टी को दान देना चाहता है तो वह दे सकता है। आपको बता दें कि इसमें दान देने वाले व्यक्ति को न तो टैक्स में छूट दी जाती है और न ही ब्याज कमाने का मौका मिलता है। दानदाता बैंक के माध्यम से राजनैतिक दलों को चंदा दे सकते हैं।

इसलिए इलेक्टोरल बांड है जरूरी

इसलिए इलेक्टोरल बांड है जरूरी

इलेक्टोरल बांड से पहले चंदा या दान पाने वाली राजनीतिक पार्टियां नकद रुपये में गुमनाम स्रोतों से चंदा या दान लेती थीं। वर्तमान समय में भी कई राजनीतिक दल अभी भी इलेक्टोरल बांड से दूरी बनाए हुए हैं। इससे भ्रष्ट्रचार व गलत तरीके से पैसा कमाने की संभावना बढ़ जाती है और सरकार को भी इसका पता नहीं चल पता था। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में इलेक्टोरल बांड लागू किए जाने से पहले राजनीतिक दलों का चंदा 70 प्रतिशत अनजान स्रोतों से आता आया था।

राजनीतिक दलों को भी नहीं होगी चंदा देने वाले की जानकारी

राजनीतिक दलों को भी नहीं होगी चंदा देने वाले की जानकारी

इलेक्टोरल बांड की खास बात यह है कि दान पाने वाले राजनीतिक दल को यह नहीं पता चल सकता कि किसने मदद की है, दान देने वाले व्यक्ति की जानकारी गुप्त होती है। दान दाता की जानकारी केवल बॉन्ड जारी करने वाले बैंक को ही होगी। इसके अलावा 20000 रुपये से अधिक दान पाने की सूरत में पार्टी को इसकी जानकारी आयकर विभाग को देनी होती है। इससे पहले नकद में चंदा पाने के बाद पार्टियां गलत जानकारी दे कर पैसे बचा लेती थी।

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English summary
know What is Electoral bond There has been an uproar in Parliament about this
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