जानिए, लॉकडाउन के दौरान भारत में कितनी बढ़ी है इंटरनेट की खपत? हैरतअंगेज हैं आंकड़े!
नई दिल्ली। भारत के इंटरनेट उपभोग में Covid -19 लॉकडाउन के दौरान वृद्धि देखी गई है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 मार्च को घोषित 'जनता कर्फ्यू' और उसके बाद 25 मार्च को लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद के दिनों में औसतन लगभग 308,000 टेराबाइट्स (टीबी) डेटा का उपभोग लोगों द्वारा किया गया।

दूरसंचार विभाग के आंकड़ों से पता चला कि 22 मार्च से 28 मार्च के बीच भारतीयों द्वारा औसतन 307,963 टीबी या 307 पेटाबाइट्स (पीबी) का उपभोग किया गया। 21 मार्च यानी "जनता कर्फ्यू" की घोषणा वाले दिन इंटरनेट के इस्तेमाल में 282,282 टीबी या 282 पीबी डेटा की यह वृद्धि 9 फीसदी थी, यह खपत 19 मार्च की 270 पीबी खपत से 13 फीसदी अधिक थी।

DoT के आंकड़े बताते हैं कि दो दिन - 22 मार्च और 27 मार्च को इंटरनेट के उपबोग चरम पर रहे, जब भारत में औसतन 312 PB डेटा का उपयोग किया गया था। जबकि 26 मार्च को 311 पीबी डेटा की खपत हुई थी। मालूम हो, एक पीबी डेटा 1,000 टीबी डेटा अथवा 10 लाख जीबी के बराबर होता है।

खपत में काफी वृद्धि दिखाने वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश नंबर वन पर था, जहां लोगों ने 22 से 28 मार्च के बीच 12% अधिक डेटा का उपयोग किया, जहां लॉकडाउन के पहले दिनों में इंटरनेट की खपत 19.6 पीबी से बढ़कर 22 पीबी तक पहुंच गई।

बिहार में भी इसी अवधि में 20 पीबी से 22.6 पीबी तक इंटरनेट उपभोग में 12% की बढ़ोतरी देखी गई। महाराष्ट्र ने लॉकडाउन 26.6 पीबी उपभोग के तहत अधिकतम उपभोग करना जारी रखा और 22 मार्च से 28 मार्च के बीच इसकी कुल इंटरनेट की खपत में 7 फीसदी की वृद्धि देखी गई।
गौरतलब है गत 5 अप्रैल और 11 अप्रैल के बीच सप्ताह में इंटरनेट उपभोग का औसत आंकड़ा 300 पीबी था और 14 अप्रैल को यह औसत 298 पीबी खपत के साथ अब यह स्थिर हो गई है। सरकार ने कहा कि वृद्धि उसकी क्षमता के भीतर थी।

सरकार के पास 20 फीसदी की बढ़ोतरी को संभालने की क्षमता मौजूद है
DoT के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार के पास 20 फीसदी की बढ़ोतरी को संभालने की क्षमता मौजूद है। अधिकारी ने आगे कहा कि खपत सीमा के भीतर रही, क्योंकि स्ट्रीमिंग साइटों ने 50% से अधिक स्ट्रीमिंग रिज़ॉल्यूशन को स्लैश करने का फैसला किया था, क्योंकि एचडी वीडियो के बजाय स्टैंडर्ड वीडियो वितरित किए।

COAI ने OTT प्रदाता कंपनियों को रिजॉल्यूशन करने के लिए कहा था
दरअसल, सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI)ने गत 23 मार्च को नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, वूट और अमेज़न प्राइम वीडियो जैसे ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्रदाताओं को स्ट्रीमिंग रिज़ॉल्यूशन को कम करने के लिए लिखा था। भारतीय डिजिटल उद्योग द्वारा गत 25 मार्च को जारी एक बयान में कहा गया था।

वीडियो प्रदाता कंपनियों द्वारा वीडियो स्ट्रीमिंग की क्वालिटी कम की गई
बयान में कहा गया कि सर्वसम्मति से सभी कंपनियों ने इन उपायों को अपनाया होगा, जिनमें अस्थायी रूप से डिफ़ॉल्ट रूप से एचडी और अल्ट्रा-एचडी को एसडी में स्ट्रीमिंग करना या सेलुलर नेटवर्क पर केवल एसडी सामग्री, वह भी 480p बिटरेट्स से अधिक पेशकश यह सुनिश्चित करने के लिए किया ताकि डेटा खपत में किसी अवरोध का सामना न करना पड़े।

फेसबुक और नेटफ्लिक्स ने भी अपने वीडियो की गुणवत्ता कम किए
यही नहीं, फेसबुक और नेटफ्लिक्स ने भी अपने वीडियो सामग्री की विटरेट्स कम करने की घोषणा पहले ही कर दी थी ताकि "इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अभूतपूर्व भार का प्रबंधन किया जा सके।

भारत की इंटरनेट खपत दरों में कुछ वर्षों में लगातार वृद्धि देखी गई है
भारत की इंटरनेट खपत दरों में पिछले कुछ वर्षों में लगातार वृद्धि देखी गई है। नोकिया की वार्षिक मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडिया ट्रैफिक इंडेक्स (MBiT) रिपोर्ट में कहा गया कि 2019 में (पिछले वर्ष की तुलना में) समग्र डेटा ट्रैफ़िक में 47% की उछाल आई। यह प्रति उपयोगकर्ता 11 जीबी प्रति माह है, और खपत 4 जी नेटवर्क से संचालित है।

2 मार्च के सप्ताह की तुलना में फिक्स्ड लाइन स्पीड में 6 फीसदी वृद्धि हुई
दुनिया भर में इंटरनेट एक्सेस के प्रदर्शन का विश्लेषण करने वाली एक साइट स्पीडटेस्ट द्वारा 15 अप्रैल की अपनी रिपोर्ट में दुनिया भर की गति पर Covid -19 के प्रभाव को ट्रैक करते हुए कहा गया है कि जब 2 मार्च के सप्ताह की तुलना में फिक्स्ड लाइन स्पीड में 6 फीसदी और मोबाइल की गति में 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

भारत की वर्तमान ब्रॉडबैंड स्पीड औसतन 36.17 mbps है
रिपोर्ट के अनुसार भारत की वर्तमान ब्रॉडबैंड स्पीड औसतन 36.17 mbps है और मोबाइल डाउनलोड गति 9.67 mbps है। रिपोर्ट ने मोबाइल और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड प्रदर्शन के मामले में भारत को चीन, ऑस्ट्रिया, जापान, इजरायल और यूएई जैसे देशों को पीछे रखा, हालांकि रिपोर्ट में भारत इटली, फ्रांस, जर्मनी और कनाडा जैसे देशों से आगे था।

इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को बुनियादी ढांचे को साझा करने की अनुमति दी जानी चाहिएः ISPAI
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISPAI) के राजेश छारिया ने कहा कि जब तनाव नहीं बढ़ा है, तो इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) को बुनियादी ढांचे को साझा करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक लंबी अवधि की मांग थी जो केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए इंतजार कर रही थी।

दूसरे के बुनियादी ढांचे के साथ नेटवर्क फैलाने के लिए अनुमति दी जा सकती है
बकौल राजेश छारिया, "यदि किसी प्रदाता का बुनियादी ढांचा भरा हुआ है, तो उन्हें नेटवर्क फैलाने के लिए दूसरे के बुनियादी ढांचे के साथ इसे ओवरलोड करने की अनुमति दी जा सकती है। यह निर्बाध सेवाओं को सुनिश्चित करेगा।












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