जानिए, चुनावी रैली में पीएम मोदी के कितने दावे थे सच और कितने झूठ

16 फरवरी 2017 को उत्तर प्रदेश में लखनऊ से करीब 30 किलोमीटर दूर बाराबंकी में हुई एक चुनावी रैली में भी पीएम मोदी ने कुछ दावे किए थे। पीएम मोदी के दावों में से 5 दावों की जांच की गई है।

नई दिल्ली। पीएम मोदी जहां भी रैली में जाते हैं वहां पर अपनी सरकार की बढ़ाई करना और विपक्षी पार्टियों की बुराई करने के लिए कई तथ्य पेश करते हैं। कुछ इसी तरह से 16 फरवरी 2017 को उत्तर प्रदेश में लखनऊ से करीब 30 किलोमीटर दूर बाराबंकी में हुई एक चुनावी रैली में भी पीएम मोदी ने कुछ दावे किए थे। पीएम मोदी के दावों में से 5 दावों की जांच की गई है। आइए जानते हैं कितने दावे सच्चे थे और कितने झूठे।

पहला दावा

पहला दावा

'लेकिन अगर सरकार की स्कूल में... अखिलेश जी का काम बोलता है... कि 50 फीसदी टीचर की भर्ती ही नहीं हुई, तो गरीब का बच्चा पढ़ाई कहां करेगा?'

पीएम मोदी की तरफ से किया गया यह दावा आधा सच था। इंडियास्पेंड की दिसंबर 2016 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में कक्षा आठ तक के स्कूलों (एलिमेंटरी स्कूल) में लगभग 23 फीसदी और कक्षा 9-10 के स्कूलों (सेकेंडरी स्कूल) में 50 फीसदी पोस्ट खाली हैं। उत्तर प्रदेश के सेकेंडरी स्कूलों अध्यापकों की वैकेंसी देश में दूसरी सबसे बुरी है और एलिमेंटरी स्कूलों में छठी सबसे बुरी है। ये भी पढ़ें- VIDEO:प्रत्याशी की गुहार को अनसुना कर निकल गईं स्मृति ईरानी?

दूसरा दावा

दूसरा दावा

'हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा... दलितों पर अत्याचार अगर कहीं होते हैं, तो उस प्रदेश का नाम है उत्तर प्रदेश।'

पीएम मोदी का दावा पूरी तरह से गलत है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटा के हिसाब से 2015 में प्रति 1 लाख शेड्यूल कास्ट (दलित) के लोगों पर क्राइम रेट देखा जाए तो उत्तर प्रदेश में यह 20 था, जो कि गुजरात (26), मध्य प्रदेश (37) और गोवा (51) से कम है। वहीं राजस्थान में यह संख्या 57 है, जबकि आंध्र प्रदेश में 52, बिहार में 39, छत्तीसगढ़ में 31 और महाराष्ट्र में 14 है। हालांकि, दलितों पर होने वाले अत्याचार मायावती की सरकार में तेजी से कम हुआ और अखिलेश यादव की सरकार में बढ़ा है।

तीसरा दावा

तीसरा दावा

'उत्तर प्रदेश में किसानों की पैदावार सिर्फ 3 फीसदी खरीदी जाती है'

मोदी सराकर का ये दावा गेहूं के लिए तो सही है, लेकिन चावल के लिए गलत है। फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और राज्य सरकारी की एजेंसियों ने 2014-15 के दौरान यूपी में हुई गेहूं की कुल पैदावार का 2.5 फीसदी खरीदा, जबकि चावल की कुल पैदावार का 10.5 फीसदी खरीदा है।

पीएम मोदी ने कहा था- 'छत्तीसगढ़ में सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों का 60 फीसदी अनाज खरीदा। इसके अलावा मध्य प्रदेश में भी 60 फीसदी अनाज खरीदा, जबकि हरियाणा में 70 फीसदी और राजस्थान में 50 फीसदी अनाज खरीदा।'

पीएम मोदी का ये दावा छत्तीसगढ़ में चावल के लिए सही है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश में गेहूं के लिए लगभग सही है और हरियाणा में चावल और गेहूं दोनों के लिए लगभग-लगभग सही है। वहीं राजस्थान के लिए पीएम मोदी का दावा पूरी तरह से गलत है। राजस्थान में किसानों ने 2014-15 में सरकार को सिर्फ 18 फीसदी गेहूं बेचा था, ना कि पीएम मोदी के दावे के अनुसार 50 फीसदी। ये भी पढ़ें- BJP और कांग्रेस के सांसदों का दावा उनकी सालाना आय 10 लाख रुपए से भी कम

चौथा दावा

चौथा दावा

'हमने ऐसी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लाए हैं कि अगर प्राकृतिक कारणों से किसान बुवाई नहीं कर पाया, तो भी उसको बीमा मिलेगा। ऐसी कोई योजना देखी है?'

पीएम मोदी का ये दावा पूरी तरह से सच है। इससे पहले वैदर बेस्ड क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम (डब्ल्यूबीसीआईएस) नाम की योजना थी, जो कुछ खास जगहों पर फसल को सूखे, अधिक बारिश और पाले की स्थिति में बीमा मुहैया कराती थी। इसके अलावा नेशनल एग्रिकल्चर इंश्योरेंस स्कीम (एनएआईएस) और मोडिफाइड नेशनल एग्रिकल्चरल इंश्योरेंस स्कीम (एमएनएआईएस) भी थीं। मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में एनएआईएस और एमएनएआईएस को एक साथ मिला दिया, जबकि डब्ल्यूबीसीआईएस अभी भी अलग है।

पांचवां दावा

पांचवां दावा

'जहां बीजेपी की सरकारें हैं, चाहे गुजरात हो, महाराष्ट्र हो, हरियाणा हो, राजस्थान, छत्तीसगढ़ हो, झारखंड हो... वहां 60-70 फीसदी किसानों का फायदा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से हो चुका है... और उत्तर प्रदेश... सिर्फ तीन प्रतिशत किसानों का बीमा हुआ।'

पीएम मोदी का ये दावा महाराष्ट्र और राजस्थान के लिए तो सही है, जबकि गुजरात और मध्य प्रदेश के लिए सही नहीं है। पीएम मोदी के गृहराज्य गुजरात में सिर्फ एक चौथाई किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मिला है, ना कि 60-70 फीसदी किसानों को।

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