राम मंदिर को लेकर क्या प्लानिंग है विहिप की?
लखनऊ। सुब्रमण्यम स्वामी ने 39997 मस्जिदों के बदले तीन मंदिरों की बात कही तो आजम खां विचलित हो गये। और इसी बीच अचानक खबर आयी कि विश्व हिंदू परिषद देश भर में सवा लाख मंदिर बनाने जा रहा है। उन लोगों के पेट में खलबली मचना लाज़मी था, जो मंदिर-मस्जिद के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेकती हैं। और उनके भी, जिन्हें दुनिया के सबसे बड़े हिंदू संगठन के हर कदम से घबराहट होती है। खैर महज 3 मिनट में तस्वीर साफ हो जायेगी।
नेताओं ने मंदिर मस्जिद को बना दिया है दुकान....

क्या खबर आयी थी-
मीडिया में खबर आयी कि वीएचपी करीबन सवा लाख गांवों में रामोत्सव मनाएगी, जिसकी शुरुआत 2016 की राम नवमी से होगी। इसी अभियान के बीच राम मंदिर की स्थापना की जाएगी।
हमने इस मुद्दे पर विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन से बात की गई तो हकीकत कुछ और ही निकल कर सामने आई।
विश्व हिंदू परिषद् के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ0 सुरेंद्र जैन के साथ बातचीत:-
सवाल- एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वीएचपी ने सवा लाख गांवों में रामोत्सव करने एवं मंदिर स्थापित करने का ऐलान किया है, इसमें कितनी सच्चाई है?
जवाब- ये घोषणा सही नहीं है, किसी गलतफहमी के बीच ये बात आई होगी। दरअसल हमने एक लाख गांवों में रामोत्सव करने की बात की है। रामोत्सव का मतलब है कि वहां राम की पूजा होगी, वहां कोई मंदिर है, तो उसमें होगी। अगर नहीं है तो चित्र या प्रतिमा लगाकर उसकी पूजा होगी। इसका मतलब मंदिर बनाना नहीं है।
सवाल- लेकिन विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा तो कह रहे हैं राम मंदिर बनायेंगे?
जवाब- नहीं बिलकुल भी ऐसा नहीं है, वो गांव के लोगों को देंगे अगर वो चाहेंगे तो वो मंदिर बनाएंगे।
सवाल- हाल ही में हिंदू महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश तिवारी का एक विवादित बयान आया, जो कि माना जा रहा है कि आजम खां के बयान पर प्रतिक्रिया है। लेकिन उस बयान के आधार पर मालदा और पूर्णिया में हमले हुए। अब वीएचपी की ओर से इस तरह का ऐलान वो भी सांप्रदायिक हमलों को देखते हुए। क्या कहना है आपका?
- जवाब- पहली बात तो ये है कि ये जितनी हिंसा हो रही है उसको कमलेश तिवारी के साथ जोड़ना समस्या से मुंह मोड़ना है। जो बम्बई के अंदर हुआ था तो कौन सा कमलेश तिवारी का बयान आया था। जो लखनऊ में बुद्ध की प्रतिमा तोड़ दी गई थी तो कौन सा किसी का बयान आया था। कमलेश तिवारी पर एनएसए लगा दिया है, मैक्सिमम सेक्शन लगा दिया गया है। इससे भी ज्यादा बद्जुबानी तो ओवैसी ने की थी लेकिन उस पर तो एनएसए नहीं लगाया गया। हम कमलेश तिवारी के बयान का कतई समर्थन नहीं करते लेकिन इससे ज्यादा बद्तमीजी और बद्जुबानी मुसलमानों के कई नेताओं ने की। ये दोगलापन है।
- दूसरी बात ये कि जहां जहां इनकी संख्या अधिक होती है वे अपनी ताकत का इजहार करने के लिए बहाना ढूंढ़ा करते हैं। कमलेश तिवारी के बयान को एक महीने से ऊपर हो गया और उसके बाद भी ये हो रहा है इसका मतलब स्पष्ट है कि चाहे वो बम्बई में हो, लखनऊ में हो, पूर्णिया या मालदा में हो इन सबका कमलेश तिवारी के बयान से कोई मतलब नहीं है। ये बहाने से ताकत का प्रदर्शन कर प्रशासन को दबाना चाहते हैं।
- अगर हम चुप रहेंगे तो क्या ये जो दंगे हुए हैं नहीं होंगे। क्या ये लोग ये नहीं करें इसलिए हम चुपचाप बैठे रहेंगे, अपने घर में भी पूजा नहीं करेंगे। ये सारी बातें आप तय करें। ये दंगे नहीं है ये भारत की सम्प्रभुता पर हमला है, भारत सरकार को चैलेंज है, बाकी सरकारों को चैलेंज है। इसलिए इनको तो कोई न कोई बहाना चाहिए।
सवाल- आजम खान ने सुब्रमण्यम स्वामी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि मस्जिद और मस्जिद का मकसद समझें, अल्लाह वाले बनें...इस बयान को आप किस तरह से देखते हैं?
जवाब- जहां राम मंदिर का प्रश्न है वहां इसे हिंदू मुसलमान से जोड़ कर देखना मुसलमानों को बाबर के साथ जोड़ने जैसा है, बाबर एक विदेशी हमलावर था और उसके द्वारा राम मंदिर को तोड़कर एक ढ़ांचा बनाया गया जो गुलामी का प्रतीक था। फिर हिंदू हो या मुसलमान या फिर ईसाई उसका विरोध करना हर एक फर्ज बनता है।
रही बात आजम खान की तो उस जैसा व्यक्ति जिसे देश के संविधान में विश्वास नहीं, जो यूएनओ में जाने की बात करता है मैं समझता हूं उसकी बात को तवज्जों देने की जरूरत नहीं। कमलेश तिवारी वाला विषय भी आजम खां ने ही शुरू किया था। उसी प्रदेश में एक बद्जुबानी आजम ने की, उसी प्रदेश में बद्जुबानी कमलेश ने की, जिस पर कार्रवाई करने का आदेश किया गया। अब आप तय कीजिए कि सूबे की सरकार सेक्युलर है या सांप्रदायिक।
अब देश की जनता को सोचने, विचार करने की जरूरत है कि वो देश की अखंडता, एकता को उन लोगों की बातों पर बांटने पर उतारू न हो जाएं जो सियासत को धर्म से जोड़कर देखते हैं।












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