बिहार चुनाव: पहले चरण में 71 सीटों पर मतदान, जानें इन सीटों के समीकरण, किस पार्टी का क्या-क्या लगा है दांव पर?

नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब कुछ घंटों का समय बचा है। बिहार की 71 विधानसभा सीटों पर बुधवार को वोट डाले जाएंगे। इस बार चुनाव में मुकाबला जेडीयू और बीजेपी के गठबंधन एनडीए और आरजेडी और कांग्रेस के महागठबंधन के बीच है। महागठबंधन में अब वाम दल भी शामिल हैं। पहले चरण में दक्षिण भोजपुर और पाटलिपुत्र-मगध क्षेत्र में चुनाव होने जा रहा है। ये क्षेत्र कई वर्षों से जातिगत अशांति के साक्षी रहे हैं। 1980 और 90 के दशक में, इन क्षेत्रों में जाति और भूमि हिंसा भारी पैमाने पर देखने को मिली थी। इस हिंसा ने रणवीर सेना जैसे सशस्त्र संगठनों का जन्म दिया था। जिसका नतीजा यह हुआ कि यहां समुदायों में एक-दूसरे के प्रति काफी नरफत है।

जातिगत समीकरण

जातिगत समीकरण

इन क्षेत्रों में अन्य क्षेत्रों की तुलना में उच्च जाति भूमिहारों की एक बड़ी आबादी है। इसके बाद यहां यादवों, कुर्मियों, ओबीसी और महादलितों की भी बड़ी आबादी है। 1990 के दशक में, अधिकांश पिछड़ी जातियों ने लालू प्रसाद का समर्थन किया। बाद में, उनमें से कई विशेष रूप से कुर्मी और कोरी नीतीश कुमार से साथ चले गए। इसके बाद भाजपा और समता पार्टी (वर्तमान में जेडी-यू) के बीच गठबंधन ने एक नए सामाजिक समीकरण को तैयार किया। जिसमें उच्च जातियों, कुर्मियों, ओबीसी और महादलित शामिल हैं। जिसने नीतीश कुमार को तीन बार बिहार की गद्दी पर बैठाया। 2015 में, जब जद (यू) का राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ तो महागठबंधन ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को बुरी तरह से पराजित किया। इससे यह पता चलता है कि नीतीश की कुर्मी, ओबीसी और महादलितों में अच्छी पकड़ है। जिनकी इस क्षेत्र में बड़ी आबादी है। 2005 के बाद से नीतीश कुमार इस क्षेत्र में भारी संख्या में सीटें जीतते आ रहे हैं। हालांकि, जेडी (यू) को इस बार सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। अब समय ही बताएगा कि क्या नीतीश कुमार द्वारा तैयार किया गया समाजिक गठबंधन उन्हें बचाता है या फिर तेजस्वी यादव विभिन्न जातियों के बीच युवाओं को आकर्षित कर ले जाएंगे।

 71 सीटों में से बारह किंगमेकर बन सकती हैं

71 सीटों में से बारह किंगमेकर बन सकती हैं

पहले चरण के मतदान में 71 सीटों में से बारह किंगमेकर बन सकती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन की नई योजना में ये सीटें कैसे उभरती हैं। 12 सीटों में आरा, दिनारा, तरारी, भभुआ, डेहरी, चैनपुर, शेरघाटी, रजौली (एससी), गोबिंदपुर, बांका, जमालपुर और मुंगेर शामिल हैं। 12 सीटों में, जिनमें तीन कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। इनका 2015 में जीत का अंतर 5,000 से कम रहा था, जब जद (यू) महागठबंधन का हिस्सा था। इनमें से तीन सीटों पर जीत का 1,000 से भी कम का मार्जिन था। तीन सीटों पर भाजपा और आठ पर महागठबंधन ने जीत दर्ज की। जिसमें दो जद (यू), राजद ने चार, कांग्रेस ने दो और भाकपा (एमएल) ने एक जीत हासिल की। सीपीआई (एमएल) लिबरेशन 2015 में महागठबंधन का हिस्सा नहीं था, लेकिन इस बार है। 2015 में, इन 12 सीटों में, भाजपा और जेडी (यू) दिनारा और जमालपुर में आमने-सामने थे। जद (यू) के जय कुमार सिंह ने दिनारा से भाजपा के राजेंद्र प्रसाद सिंह को मात्र 2,691 मतों के अंतर से हराया। राजेंद्र सिंह को बिहार में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया गया था। इस बार चुनाव से ठीक पहले वह लोजपा में शामिल हुए हैं।

इन सीटों पर 2015 में रहा जीत का सबसे कम अंतर

इन सीटों पर 2015 में रहा जीत का सबसे कम अंतर

2015 में, राजद-जद (यू) -कांग्रेस गठबंधन ने पहले चरण के मतदान में जाने वाली 71 सीटों में से 54 सीटें जीती थीं। एनडीए ने केवल 15 में जीत हासिल की थी। नीतीश महागठबंधन को छोड़ जुलाई 2017 में फिर से एनडीए में शामिल हो गए। इस बार, भाजपा इनमें से आठ सीटों पर चुनाव लड़ रही है और अन्य चार पर जद (यू) लड़ रही है। तेजस्वी यादव की बड़ी चुनौती आरा, डेहरी, मुंगेर और रजौली को बनाए रखने की होगी, आरजेडी इन चार सीटें पर 2015 में कम अंतर से जीती थी। दिनारा से निवर्तमान विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जय कुमार सिंह, बांका से भूमि और राजस्व मंत्री राम नारायण मंडल और चैनपुर से खदान और भूविज्ञान मंत्री बृज किशोर बिंद सबसे कम अंतर से जीतने वाले 12 उम्मीदवारों में शामिल थे। 2015 में, तरारी सीट पर जीत का सबसे कम अंतर था। यहां सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के सुदामा प्रसाद ने लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) की गीता पांडे को केवल 272 वोटों से हराया था। इस बार एलजेपी पहले चरण में सात सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दूसरा सबसे कम अंतर आरा में दर्ज किया गया, जहां राजद के मोहम्मद नवाज आलम ने भाजपा के अमरेन्द्र प्रताप सिंह को केवल 666 मतों से हराया था। तीसरा सबसे कम अंतर चैनपुर से भाजपा के बृज किशोर बिंद का था। बिंद ने बसपा के मोहम्मद ज़ामा खान को 671 मतों से हराया था।

उम्मीदवारों का अपराधिक रिकॉर्ड

उम्मीदवारों का अपराधिक रिकॉर्ड

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हर तीसरे उम्मीदवार का आपराधिक रिकॉर्ड है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने कहा कि उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण से पता चलता है कि 31 फीसदी ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। 71 विधानसभा सीटों में से 23 में पांच से अधिक उम्मीदवार हैं जिनके खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसके उन्होंने अपने हलफनामे में घोषणा की है। गुरुआ निर्वाचन क्षेत्र में 10 दागी उम्मीदवार हैं, उसके बाद दिनारा (9), अर्रा (8), बांका (8) हैं। एडीआर विश्लेषण के अनुसार, पहले चरण के 1,064 उम्मीदवारों में से 328 ने लंबित आपराधिक मामलों की घोषणा की है। 244 उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। गंभीर आपराधिक मामले पांच साल से अधिक की सजा के साथ गैर-जमानती अपराध हैं। लगभग 29 उम्मीदवारों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित मामलों की घोषणा की है, जिनमें से तीन ने बलात्कार से संबंधित मामलों की घोषणा की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 375 या 35 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं, जबकि पांच उम्मीदवारों ने शून्य संपत्ति बताई है।

सबसे ज्यादा यादव MLA

सबसे ज्यादा यादव MLA

पहले फेज की 71 में से 22 सीटों पर यादव समुदाय के विधायकों का फिलहाल कब्जा है। 2015 के चुनाव में यहां पर सबसे ज्यादा यादव समुदाय के विधायक जीतने में सफल रहे थे। इन 71 सीटों में से 22 यादव जीते हैं जबकि राजपूत, भूमिहार और कुशवाहा समुदाय के सात-सात विधायक जीते थे। वहीं, तीन सीटों पर कुर्मी समुदाय के विधायक का कब्जा है जबकि 13 सुरक्षित सीटों पर एससी-एसटी समुदाय के विधायक जीते हैं।

इन दिग्गजों की साख दांव पर

इन दिग्गजों की साख दांव पर

पहले चरण में जिन बड़े नामों की तकदीर का फैसला होना है, उनमें जहानाबाद से शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, दिनारा से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जय कुमार सिंह, लखीसराय से श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा, चैनपुर से खनन मंत्री बृजकिशोर बिंद, बांका से राजस्व मंत्री रामनारायण मंडल, जमालपुर से ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार, गया से कृषि मंत्री प्रेम कुमार और राजपुर से परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला मुख्य हैं। इसके अलावा, प्रमुख प्रत्याशियों में हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी इमामगंज विधानसभा क्षेत्र से मैदान में खड़े हैं। इसी क्षेत्र से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी आरजेडी के टिकट पर उनसे लोहा ले रहे हैं। एलजेपी के दिग्गजों उम्मीदवारों में दिनारा से राजेंद्र सिंह, सासाराम से रामेश्वर चौरसिया और जगदीशपुर से भगवान सिंह कुशवाहा ने ताल ठोका है। उधर जमुई से पूर्व मंत्री और राजद के नेता विजय प्रकाश और तीरंदाज श्रेयसी सिंह भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।

बिहार चुनाव 2020: पहले चरण की 71 सीटों का पर किस उम्मीदवार की किससे लड़ाई

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