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Manipur: अपनी सीट पर बगैर प्रचार किए जीता चुनाव, जानिए कौन हैं बिस्वजीत सिंह जो बन सकते हैं अगले सीएम?

इंफाल, 17 मार्च: मणिपुर में सीनियर बीजेपी नेता थोंगम बिस्वजीत सिंह को राज्य में पार्टी की किस्मत बदलने का श्रेय दिया जाता है। मणिपुर में भाजपा ने पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया है। वहीं पूर्वोत्तर राज्य में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में बिस्वजीत सिंह का नाम चर्चाओं में है। राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए रेस में बिस्वजीत सिंह और एन बीरेन सिंह सबसे आगे चल रहे नेताओं में हैं। हालांकि सीएम बनाए जाने के सवालों पर अभी तक बिस्वजीत सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया है।

अभी तक सीएम का फैसला नहीं

अभी तक सीएम का फैसला नहीं

भाजपा ने मणिपुर में 32 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी, जबकि उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस कुल 60 सीटों में सिर्फ पांच ही जीतने में सफल रही। नेशनल पीपुल्स पार्टी ने 7 सीटें, जनता दल (यूनाइटेड) ने 6, नागा पीपल्स फ्रंट ने 5, कुकी पीपुल्स एलायंस ने 2 सीटें और निर्दलीय ने 3 सीटें जीती हैं। हालांकि बीजेपी ने मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के साथ एक प्रमुख चेहरे के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन पार्टी ने अभी तक अगले मुख्यमंत्री पर फैसला नहीं किया है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है। वहीं बीरेन सिंह ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और इसे "शिष्टाचार" बताया।

तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए

तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए

बता दें कि लगभग छह साल पहले जब थोंगम बिस्वजीत सिंह तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए तो बहुतों को यकीन नहीं था कि राज्य में पार्टी के प्रभावशाली विकास के पीछे वह एक प्रमुख नेता साबित होंगे। उन्हें 2017 में मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी करते देखा गया था, लेकिन उन्होंने एन बीरेन सिंह की उम्मीदवारी का समर्थन किया। बिस्वजीत सिंह को सरकार में प्रमुख विभाग दिए गए थे।

चार बार विधायक, नहीं किया अपनी सीट पर प्रचार

चार बार विधायक, नहीं किया अपनी सीट पर प्रचार

चार बार के विधायक बिस्वजीत सिंह ने 2017 में नागा पीपुल्स फ्रंट और नेशनल पीपुल्स पार्टी के साथ सीमावर्ती राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली पहली सरकार बनाने के लिए गठबंधन करने में अहम भूमिका निभाई थी। साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले बिस्वजीत सिंह ने इस साल के विधानसभा चुनाव में थोंगजू से जीत हासिल की है। उनके समर्थकों ने कहा कि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार नहीं किया, बल्कि राज्य की और सीटों के लिए अपना सारा वक्त दिया और उनकी पत्नी ने उनके लिए प्रचार किया।

'कई घोटालों' का पर्दाफाश करने का भी श्रेय

'कई घोटालों' का पर्दाफाश करने का भी श्रेय

बिस्वजीत सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने बड़े अंतर से उपचुनाव जीता था। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, जो नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) के संयोजक हैं उन्होंने हाल ही में मणिपुर में बीजेपी को मजबूत करने के लिए बिस्वजीत सिंह की कोशिश की जमकर प्रशंसा की थी। इतना ही नहीं बिस्वजीत सिंह को कांग्रेस शासन के दौरान "कई घोटालों" का पर्दाफाश करने का भी श्रेय दिया जाता है।

अगले मुख्यमंत्री की दौड़ में बिस्वजीत सिंह

अगले मुख्यमंत्री की दौड़ में बिस्वजीत सिंह

बता दें कि राज्य में भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पर्यवेक्षक और कानून मंत्री किरेन रिजिजू को सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। यह बैठक अगले हफ्ते की शुरुआत में इंफाल में होने की उम्मीद है। बिस्वजीत सिंह को भी उनके समर्थन में विधायकों के बीच अच्छा दबदबा देखा जा रहा है और अगले मुख्यमंत्री की पसंद को लेकर अटकलें जारी हैं। हालांकि बिस्वजीत सिंह ने गुरुवार को राज्य के अगले मुख्यमंत्री की दौड़ में उनके बारे में चल रही अटकलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा, "मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। हमारा आपस में कोई गुट नहीं है, यह पक्का है। भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है और नेतृत्व इस (मुख्यमंत्री मुद्दे) का फैसला करेगा।"

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