अतीक़ अहमद से पहली पूछताछ: जानिए उमेश पाल की हत्या से जुड़ी 10 अहम बातें

First interrogation of Atiq Ahmed उमेश पाल हत्याकांड के आरोप में पुलिस अतीक़ अहमद से पहली बार पूछताछ करने के लिए उन्हें प्रयागराज लाई है.

उमेश पाल हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त और बाहुबली नेता अतीक़ अहमद की गुरुवार को अदालत में पेशी होनी है.

प्रयागराज पुलिस अतीक़ अहमद से उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ करने के लिए उन्हें साबरमती जेल से प्रयागराज लाई है.

अतीक़ अहमद को कोर्ट में पेश किया जायेगा और उनसे पूछताछ करने के लिए रिमांड की अर्ज़ी पर अदालत सुनवाई करेगी.

जानिये उमेश पाल की हत्या के मामले में आख़िर पुलिस ने अपनी जांच कहाँ तक बढ़ाई है.

1. कब और कैसे हुई थी हत्या

24 फ़रवरी 2023 को उमेश पाल की उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (पहले इलाहाबाद) में हत्या कर दी गई थी जब वो कचहरी से लौट रहे थे.

पेशे से वकील उमेश पाल 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह थे. लेकिन मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अपनी जांच में उमेश पाल को गवाह नहीं बनाया था.

24 फ़रवरी की शाम को उमेश पाल जैसे ही अपने घर के पास पहुंचे, वैसे ही बदमाशों ने पहले तो उनकी कार पर गोलियां चलाईं. उसके बाद जब वो अपने गनर के साथ घर की ओर भागे, तो बदमाशों ने उन पर दो बम फेंके.

तीनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उमेश पाल और उनके गनर संदीप मिश्रा की मौत हो गई. बाद में दूसरे गनर राघवेंद्र सिंह की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई.

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2. दो अभियुक्तों का हुआ एनकाउंटर

पुलिस का कहना है कि उन्होंने एक अभियुक्त अरबाज़ को प्रयागराज में एक मुठभेड़ के दौरान पकड़ा था, लेकिन गोली के घाव से अरबाज़ की मौत हो गई. आरोप है कि अरबाज़ हमले में इस्तेमाल हुई गाड़ी का ड्राइवर था.

उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने कहा, "उस घटना में सम्मिलित अरबाज़ पहले घायल हुआ तथा इसके पास से 32 बोर की पिस्टल बरामद हुई. इस पर आरोप है कि घटना के दिन जो क्रेटा गाड़ी इस्तेमाल हुई थी. उसका यह ड्राइवर था. उस दिन उसके द्वारा फ़ायरिंग भी की गई थी."

इसके अलावा पुलिस ने विजय चौधरी उर्फ़ उस्मान नाम के एक अभियुक्त को भी एनकाउंटर में मार दिया था. आरोप था कि उन्होंने हमले में उमेश पाल पर सबसे पहली गोली चलाई थी.

3. अतीक़, उनकी पत्नी, बेटा और भाई बने अभियुक्त

हत्या, हत्या की साज़िश और अन्य संगीन धाराओं में दर्ज मुक़दमे में पुलिस ने अतीक़ अहमद, उनकी पत्नी शाइस्ता परवीन, उनके भाई और पूर्व विधायक अशरफ़, अतीक़ अहमद के पुत्र और अन्य पुत्र के अलावा दूसरे हमलावरों और साज़िशकर्ताओं को अभियुक्त बनाया.

शुरुआती एफ़आईआर में कुल नौ अभियुक्त थे.

पुलिस की जांच के बाद उमेश पाल की हत्या में कुल 18 अभियुक्तों की भूमिका सामने आई है जिसमें असद, सदाक़त, अरमान, विजय चौधरी उर्फ़ उस्मान (एनकाउंटर में मारा गया), अरबाज़ (एनकाउंटर में मारा गया), साबिर, क़ैस अहमद (ड्राइवर, फ़िलहाल जेल में है), राकेश (हथियार और पैसे बरामद हुए), अरशद कटरा, नियाज़ (जिसने रेकी की थी), इक़बाल अहमद (रेकी करने का आरोप), शाहरुख़, (अतीक़ का नौकर जिसे जेल भेजा जा चुका है), डॉक्टर अख़लाक़ और उनकी पत्नी (अतीक़ की बहन और बहनोई) भी शामिल हैं.

4. अभी तक कितने लोग हुए हैं गिरफ़्तार

इस मामले में कुल आठ अभियुक्तों की गिरफ़्तारी हो चुकी है और फ़िलहाल छह अभियुक्त फ़रार हैं.

अतीक़ अहमद पहले से साबरमती जेल में अन्य मामले में क़ैद थे जिन्हें पुलिस प्रयागराज लेकर आई है. उनके भाई अशरफ़ बरेली जेल में हैं.

लेकिन प्रयागराज पुलिस को अब अतीक़ अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन की तलाश है.

शाइस्ता परवीन पर पहले 25 हज़ार का इनाम घोषित था जिसे दोगुना कर 50 हज़ार कर दिया गया है.

अदालत ने शाइस्ता परवीन की अग्रिम ज़मान भी ख़ारिज कर दी है और फ़िलहाल वो फ़रार हैं.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में छपी ख़बर के मुताबिक़, मार्च में उत्तर प्रदेश सरकार ने पांच अभियुक्तों पर इनाम ढाई लाख से बढ़ा कर पांच लाख रुपए प्रति अभियुक्त कर दिया था.

इनमें अतीक़ के बेटे मोहम्मद असद के साथ चार अभियुक्त अरमान, ग़ुलाम, 'बमबाज़' गुड्डू मुस्लिम शामिल हैं.

इस रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से लिखा गया है कि अभियुक्त अरमान के ख़िलाफ़ पहले से सात केस हैं, अभियुक्त ग़ुलाम के ख़िलाफ़ आठ मुक़दमे और बाक़ी दो अभियुक्तों के ख़िलाफ़ एक-एक मुक़दमा है.

पुलिस के मुताबिक़ उन्होंने एक अभियुक्त विजय चौधरी उर्फ़ उस्मान को मुठभेड़ में मार दिया और अभियुक्त सदाक़त ख़ान को गिरफ़्तार किया.

आरोप है कि सदाक़त मुस्लिम हॉस्टल में ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से रह रहा था और हॉस्टल में उसके कमरे में उमेश पाल की हत्या की साज़िश रची गई थी.

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5. कहाँ है अतीक़ के दो नाबालिग़ बेटे?

उमेश पाल की हत्या के बाद फ़रार चल रही अतीक़ की पत्नी शाइस्ता परवीन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके दो नाबालिग़ बेटों को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से घर से लेकर कहीं रखा है.

उन्होंने दोनों बेटों के नाम से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाख़िल की जिसमें उन्होंने पुलिस को अपने दोनों बेटों को अदालत के सामने पेश करने की मांग की.

शाइस्ता परवीन का आरोप है कि 24 फ़रवरी की शाम को पुलिस बिना महिला पुलिस के ज़बर्दस्ती उनके घर में घुस आई और दोनों बेटों को ले गई और किसी अघोषित स्थान पर ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से रखा हुआ है और शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है.

अतीक का बड़ा बेटा 12वीं में पढ़ता है और दूसरा बेटा कक्षा नौ का छात्र है.

इसके जवाब में थाना धूमनगंज के एसआई राजेश कुमार मौर्य ने कोर्ट को अपने जवाब में कहा, "दोनों को चकिया कसारी मसारी क्षेत्र में मिलने की सूचना पर ज़िले की चाइल्ड वेलफ़ेयर समिति (सीडब्लूसी) के सामने पेश करने के बाद बाल संरक्षण केंद्र राजरूपपुर में दो मार्च को दाख़िल कराया गया है."

पुलिस ने शाइस्ता परवीन के आरोपों को ग़लत बताया और हाईकोर्ट ने अतीक़ के बेटों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को ख़ारिज कर दिया.

पुलिस दोनों नाबालिग़ बेटों की संलिप्तता की जांच भी कर रही है. फ़िलहाल उन्हें मुक़दमे में अभियुक्त नहीं बनाया गया है.

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6. सियासी बयानबाज़ी और फ़ैसले

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पूरी घटना और उसमे जांच को लेकर आक्रामक तेवर में नज़र आ रहे हैं.

उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर विधानसभा में निशाना साधते हुए कहा, "जिस अतीक़ अहमद के ख़िलाफ़ पीड़ित परिवार ने मामला दर्ज कराया है वह समाजवादी पार्टी द्वारा पोषित माफ़िया है. उसकी कमर तोड़ने का काम हमारी सरकार ने किया है. मैं फिर इसी हाउस में कह रहा हूं, इस माफ़िया को मिट्टी में मिला देंगे. जितने माफ़िया हैं इनको मिट्टी में मिलाने का काम करेंगे."

हाल ही में बसपा प्रमुख मायावती ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर इस बात का एलान किया कि वो अतीक़ अहमद और उनके परिवार के किसी भी सदस्य को प्रदेश में मई में होने वाले निकाय चुनाव में बसपा से टिकट नहीं देंगी.

पार्टी ने अतीक़ अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन को मेयर का उम्मीदवार घोषित किया था.

मायावती ने बदले हालत और उमेश पाल की हत्या के मामले में अभियुक्त शाइस्ता परवीन का हवाला देते हुए यह एलान किया. मायावती ने शाइस्ता परवीन की पार्टी में सदस्यता के बारे में कहा कि वो शाइस्ता की गिरफ़्तारी के बाद तथ्यों के आधार पर इस पर फ़ैसला लेंगी.

प्रयागराज का मुस्लिम हॉस्टल
BBC
प्रयागराज का मुस्लिम हॉस्टल

7. प्रयागराज का मुस्लिम हॉस्टल हुआ सील

उमेश पाल की हत्या के बाद पुलिस ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के मुस्लिम छात्रावास में रहने वाले एक अभियुक्त सदाक़त ख़ान को गिरफ़्तार किया. इसके एक हफ़्ते बाद सोमवार (छह मार्च) को ये हॉस्टल ख़ाली कराकर सील कर दिया गया.

हॉस्टल के अधीक्षक डॉक्टर इरफ़ान अहमद ख़ान ने छात्रों को इस बारे में नोटिस जारी करके सूचना दी थी.

आरोप है कि इस हॉस्टल के कमरा नंबर 36 में उमेश पाल की हत्या का 'साज़िशकर्ता' सदाक़त ख़ान ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से रह रहा था और उसी के कमरे में ह्त्या की साज़िश रची गई. फ़िलहाल हॉस्टल सील पड़ा है.

8. उमेश पाल के किडनैपिंग के मामले में अतीक़ को उम्र क़ैद

28 मार्च को प्रयागराज की एमपीएमएलए अदालत ने अतीक़ अहमद, सौलत हनीफ़ ख़ान और दिनेश पासी को उमेश पाल के अपहरण के मामले में दोषी क़रार दिया और सभी को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

मामले में अतीक़ के भाई अशरफ़ और छह अन्य लोगों को अदालत ने बरी कर दिया.

उमेश पाल ने 2007 में आरोप लगाया था कि 28 फ़रवरी 2006 को अतीक़ अहमद ने उनका अपहरण करवाया, उनके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी, क्योंकि वह राजू पाल हत्याकांड के गवाह थे.

उमेश पाल की शिकायत के ठीक एक साल बाद पुलिस ने पांच जुलाई 2007 को अतीक़, उनके भाई अशरफ़ और चार अज्ञात व्यक्तियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया.

अब अदालत ने अतीक़ अहमद को उमेश पाल अपहरण मामले में दोषी क़रार दिया है.

9. विधायक राजू पाल हत्याकांड

उत्तर प्रदेश में 2003 में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी थी. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ तब अतीक़ अहमद समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे. 2004 के लोकसभा चुनाव में वो सपा से सांसद बन गए. इस वजह से इलाहाबाद (पश्चिम) विधानसभा सीट ख़ाली हुई.

2004 में अतीक़ ने अपने भाई अशरफ़ को वहां से मैदान में उतारा, लेकिन वह चार हज़ार वोटों से बसपा के प्रत्याशी राजू पाल से हार गए थे.

राजू पाल पर बाद में कई हमले हुए और राजू पाल ने इसके लिए तत्कालीन सांसद अतीक़ को ज़िम्मेदार ठहराते हुए अपनी जान को ख़तरा बताया था.

25 जनवरी, 2005 को राजू पाल के क़ाफ़िले पर एक बार फिर हमला किया गया. उन्हें कई गोलियां लगीं.

अस्पताल पहुंचने पर राजू पाल को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था. इस हत्याकांड में अतीक़ अहमद और अशरफ़ का नाम सामने आया और फ़िलहाल मामले की जांच सीबीआई कर रही है.

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10. उमेश पाल केस: जांच और अदालती कार्रवाई

उमेश पाल हत्याकांड के आरोप में पुलिस अतीक़ अहमद से पहली बार पूछताछ करने के लिए उन्हें प्रयागराज लाई है.

गुरुवार को पुलिस को अदालत में यह साबित करना है कि उसकी जांच में इकठ्ठा किए गए साक्ष्यों में उसने अतीक़ अहमद की उमेश पाल की हत्या में संलिप्तता पाई है और यह साबित करने के लिए उसे अतीक़ से पूछताछ करने के लिए उसकी कस्टडी चाहिए.

अभियोजन पक्ष अतीक़ की न्यायिक हिरासत लेने की कोशिश करेगा. न्यायिक हिरासत के 14 दिनों में पुलिस हिरासत भी मांगी जा सकती है. जिसके बाद अभियुक्तों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.

हत्या और हत्या की साज़िश का अदालती मुक़दमा (Trial) एमपीएमएलए अदालत में चलेगा जो आरोप पत्र दाख़िल होने और चार्ज फ़्रेम होने के बाद ही शुरू होगा.

लेकिन इस मामले से जुड़ी ज़मानत की सुनवाई और अन्य पहलू सीजेएम अदालत में ही सुने और तय किए जाएंगे.

फ़िलहाल पुलिस के सामने बड़ी चुनौती पहले यह है कि फ़रार अभियुक्तों की गिरफ़्तारी कर जांच को आगे कैसे बढ़ाया जाए.

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