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'कश्मीर पर मेरा लेख मेरे अपने शब्द नहीं हैं, पंडित नेहरू के संसदीय रिकॉर्ड के हैं', बोले किरेन रिजिजू

केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि मेरा लेख मेरे अपने शब्द नहीं हैं, वे पंडित नेहरू के संसदीय रिकॉर्ड और उस समय से सभी सरकारी आदान-प्रदान हैं।
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केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि मेरा लेख मेरे अपने शब्द नहीं हैं, वे पंडित नेहरू के संसदीय रिकॉर्ड और उस समय से सभी सरकारी आदान-प्रदान हैं। कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि 70 से अधिक वर्षों तक सच को दबाया और छुपाया गया। मैं इसे लोगों के सामने लाया क्योंकि हम इतिहास नहीं बदल सकते।

किरेन रिजिजू

किरेन रिजिजू ने कश्मीर को लेकर नेहरू के रुख पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि उनकी वजह से ही कश्मीर का मसला विवादास्पद बना। उन्होंने ही विलय में देरी की, उन्होंने ही कबायली हमले के समय महाराजा हरिसिंह की गुजारिश के बावजूद फ़ौज भेजने में देरी की। वही कश्मीर का मसला संयुक्त राष्ट्र संघ ले गए, और उन्होंने ही संविधान में अनुच्छेद 370 जोड़ कर कश्मीर का भारत में वास्तविक विलय नहीं होने दिया।

दूसरी तरफ वामपंथी इतिहासकारों और सेक्यूलर मीडिया ने जवाहर लाल नेहरू का लगातार बचाव करते हुए महाराजा हरीसिंह को ही खलनायक बनाया हुआ था कि वही कश्मीर का भारत में विलय नहीं करना चाहते थे। कांग्रेसी और वामपंथी अक्सर ये सवाल उठाते रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर के महाराजा ने भारत के साथ विलय पर फैसला लेने में इतनी देर क्यों की। उनका तर्क रहा है कि महाराजा कश्मीर का भारत में विलय नहीं करना चाहते थे, 26 अक्टूबर 1947 को भी महाराजा हरि सिंह ने मजबूरी में भारत के साथ विलय पत्र पर साइन किए थे।

उनका तर्क यह भी है कि महाराजा हरि सिंह अपने राज्य को ना तो भारत में मिलाना चाहते थे और ना ही पाकिस्तान में। उनके दिमाग में ये खयाल था कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच आजाद मुल्क की हैसियत से रहेंगे। वह जम्मू-कश्मीर को स्विटजरलैंड की तरह खूबसूरत देश बनाना चाहते थे। कांग्रेसियों का इस तरह का एकतरफा प्रचार महाराजा हरिसिंह के खिलाफ चलता रहा है। इस बीच एक तथ्य यह भी सामने आया कि जवाहर लाल नेहरू के अत्यंत करीबी लॉर्ड माउंटबेटन 18 जून 1947 को श्रीनगर उनसे मिलने गए थे।

उन्होंने महाराजा को पाकिस्तान में विलय का सुझाव दिया था, और उनकी कश्मीर यात्रा के दौरान चार दिन में फैसला करने को कहा था। लेकिन उसके बाद महाराजा हरिसिंह उन से नहीं मिले। वह माउंटबेटन को चार दिनों तक टरकाते रहे। अलबत्ता महाराजा के मंत्री काक जरूर माउंटबेटन से मिले, लेकिन काक ने भी साफ जवाब नहीं दिया।

यह भी पढ़ें- Collegium System: किरेन रिजिजू ने फिर कॉलेजियम सिस्टम के खिलाफ मोर्चा खोला, आखिर क्या है पूरा विवाद?

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English summary
Union Law Minister Kiren Rijiju said My article on Kashmir is not my own words Parliament record of Pt Nehru
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