Kerala Plane Crash: रनवे को लेकर 9 साल पहले दी गई थी चेतावनी, मान ली होती बात तो नहीं होता हादसा

नई दिल्‍ली। केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट पर हुए विमान हादसे ने दिल दहला दिया है। इस दर्दनाक हादसे में दो पायलटों समेत 18 लोगों की मौत हो गई है। ये प्लेन वंदेभारत मिशन का हिस्सा था जो विदेश में फंसे भारतीयों को वापस ला रहा था। बताया जा रहा है कि रनवे में पानी की वजह से लैंडिंग के वक्‍त विमान फिसल गया और 35 फीट नीचे खाई में चला गया। दरअसल यह एक 'टेबलटॉप' रनवे है। इसके दोनों तरफ घाटी है। वैसे अगर 9 साल पहले एक्सपर्ट की सुनी गई होती तो यह हादसा शायद होता ही नहीं। जी हां 9 साल पहले ही सेफ्टी अडवाइजरी कमिटी के सदस्य मोहन रंगनाथन ने चेतावनी दी थी कि यह रनवे बारिश के मौसम में लैंडिंग के काबिल बिल्कुल नहीं है। यह विमान हादसा दिखाता है कि जानकारों की बात को नजरअंदाज किया गया।

रनवे के आखिर में पर्याप्‍त बफरजोन भी नहीं है

रनवे के आखिर में पर्याप्‍त बफरजोन भी नहीं है

मोहन रंगनाथन ने कहा था, ‘जब मैंगलोर में प्लेन क्रैश हुआ था तो मैंने चेतावनी दी थी लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया। यह एक ढलान वाला टेबलटॉप रनवे है। इसके अलावा रनवे के आखिरी में पर्याप्त बफरजोन भी नहीं है।' एक्सपर्ट्स के मुताबिक रनवे के आखिरी में कम से कम 240 मीटर का बफरजोन होना चाहिए लेकिन कोझिकोड के रनवे पर यह केवल 90 मीटर का ही है। इसके अलावा रनवे के आसपास केवल 75 मीटर की जगह है जो कि सुरक्षा की लिहाज से 100 मीटर होना अनिवार्य है।

चेतवानी देते हुए लिखा था पत्र

चेतवानी देते हुए लिखा था पत्र

रंगनाथन ने कहा कि टेबलटॉप रनवे पर संचालन के लिए कोई स्पेशल निर्देश भी नहीं हैं। 2011 में उन्होंने सीविल एविएशन सेफ्टी अडवाइजरी कमिटी को एक पत्र लिखा था। कहा था कि रनवे 10 को लैंडिंग के लिए सही नहीं माना जाना चाहिए और रनवे के आखिरी में जगह बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि रनवे एंड सेफ्टी एरिया (RESA) को 240 मीटर तक बढ़ाना जरूरी है जिससे सुरक्षित संचालन किया जा सके। उन्होंने कहा था कि अगर रनवे एरिया में विमान नहीं रुक पाता है तो यहां RESA एरिया भी नहीं है।

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    मंगलोर में हुए हादसे के बाद चेत जाना चाहिए

    मंगलोर में हुए हादसे के बाद चेत जाना चाहिए

    2011 में लिखे गए पत्र में कहा गया था, ‘मंगलोर में हुए हादसे के बाद चेत जाना चाहिए और रनवे को सुरक्षित बनाना चाहिए। सेफ्टी अडवाइजरी कमिटी की पहल बैठक में ही मैंने RESA के बारे में सवाल उठाए थे। डीजीसीए की टीमों को भी रनवे स्ट्रिप के बारे में पता नहीं चला। इसमें खतरा है। क्या एयरलाइन या डीजीसीए इन रनवे पर ऑपरेशन रोककर सुधार करने को तैयार हैं?'

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