पिता से आखिरी बार नहीं मिल सका ये शख्स, कहा- 'कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं हुआ तो दुख होगा'

तिरुवनंतपुरम। कोरोना वायरस (Covid-19) का कहर इस वक्त पूरी दुनिया झेल रही है। इस बीच कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस बीमारी पर जीत हासिल की और ठीक हो गए। ऐसे लोगों की हिम्मत की मिसाल दी जा रही है। कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपने परिवार के सदस्य को खो दिया है, तो कोई अपने घर से मीलों दूर किसी और देश में फंस गया है। ऐसी ही एक कहानी केरल से भी सामने आई है।

बीमार पिता को देखने के लिए लौटा था

बीमार पिता को देखने के लिए लौटा था

यहां एक शख्स कतर से अपने बीमार पिता को देखने के लिए लौटा था लेकिन अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो पाया। लीनो एबेल नाम के इस शख्स ने फेसबुक पर अपनी कहानी साझा की है। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे के चलते लीनो को भारत लौटने पर क्वारंटाइन किया गया। वह कतर की एक निजी कंपनी में काम करते हैं, जबकि उनका परिवार केरल के थोडुपुजा क्षेत्र के अलाकोड गांव में रहता है।

अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?

अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?

अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लीनो ने कहा, '7 मार्च को मुझे मेरे भाई का मैसेज मिला, उसने कहा कि मैं जल्द से जल्द उनसे संपर्क करूं। जब मैंने उसे फोन किया, तो मुझे पता चला कि मेरे पिता सोते समय पलंग से नीचे गिर गए हैं। उन्हें काफी चोट आई, जिसके बाद उन्हें आलप्पुजा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बाद में जब मैंने उसे (भाई) फोन किया तो मुझे बताया गया कि उन्हें (पिता) इंटरनल ब्लीडिंग हुई है। मेरे परिवार को केरल में कोरोना वायरस की खबर के बारे में नहीं पता था और उन्होंने मेरी केरल की टिकट बुक कर दी। मुझे समझ नहीं आया कि मुझे घर जाना चाहिए या नहीं, और मैं कोच्चि के लिए निकल गया।'

घर जाने की इजाजत मिल गई थी

घर जाने की इजाजत मिल गई थी

लीनो ने बताया कि वापस लौटते वक्त उनकी कोरोना वायरस की जांच की गई और उन्हें अपने घर जाने की इजाजत मिल गई। क्योंकि ना उन्हें बुखार था और ना ही वायरस के संक्रमण थे। बाद में लीनो कोट्टायम चले गए और इस बात का ध्यान रखा कि किसी भी रिश्तेदार के संपर्क में ना आ सकें। गंभीर हालत होने के बाद भी वह अपने पिता से नहीं मिले।

'आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया गया'

'आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया गया'

लीनो ने कहा, 'जैसे ही मैंने अस्पताल में कदम रखा, मुझे खांसी और गले में खराश होने लगी, मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया, हालांकि बाकी लोगों की सुरक्षा के बारे में सोचते हुए मैंने डॉक्टरों से संपर्क किया। तब डॉक्टरों ने मुझे बताया कि कोरोना वायरस कतर में तेजी से फैल रहा है इसलिए मुझे आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया गया।' 9 मार्च को लीनो के आइसोलेश वार्ड में एक हैरान करने वाली खबर पहुंची कि उनके पिता की इलाज के दौरान मौत हो गई है। हालांकि दोनों पिता और बेटा एक ही अस्पताल में थे, लेकिन फिर भी लीनो अपने पिता से आखिरी बार नहीं मिल पाए। वो केवल रो सकते थे।

अगर नियमों का पालन नहीं करता तो पिता से मिल सकता था

अगर नियमों का पालन नहीं करता तो पिता से मिल सकता था

लीनो ने आगे लिखा, 'जब मेरे पिता के शव को घर ले जाया जा रहा था, तब मैंने आखिरी बार उन्हें देखा लेकिन वीडियो कॉल पर। अगर मैं कोरोना वायरस सेल के नियमों को नहीं मानता तो मैं अपने पिता को देख सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मैं ये नहीं चाहता था कि वायरस मुझसे मेरे परिवार और आसपास रहने वाले लोगों में फैले।'

विदेश से लौट रहे लोगों से भी किया आग्रह

विदेश से लौट रहे लोगों से भी किया आग्रह

लीनो ने विदेश से लौट रहे लोगों से भी आग्रह किया कि अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए वापस लौटते ही डॉक्टरों से संपर्क करें। आइसोलेशन वार्ड कोई कन्सेंट्रेशन कैंप नहीं हैं। अपनी पोस्ट की आखिरी लाइन में उन्होंने लिखा कि अगर उनका कोरोना वायरस का टेस्ट नेगेटिव आता है तो उन्हें दुख पहुंचेगा। हाल ही में शुक्रवार को एक भाषण के दौरान केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने लीनो के साहस और त्याग का भी जिक्र किया है।

दुनियाभर में 5 हजार से ज्यादा लोगों की मौत

दुनियाभर में 5 हजार से ज्यादा लोगों की मौत

जानकारी के लिए बता दें इस वक्त कोरोना वायरस भारत सहित दुनिया के 118 देशों में जानलेवा बना हुआ है। इससे भारत में भी दो मौत हो गई हैं, जबकि संक्रमित मामलों की संख्या 80 से अधिक हो गई है। वहीं वायरस से दुनियाभर में 5 हजार से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि एक लाख 37 हजार से अधिक लोग अब भी इससे संक्रमित हैं। इस बीच ये खबर भी आई है कि कम से कम 70 हजार लोग पूरी तरह ठीक भी हुए हैं। वायरस से सबसे ज्यादा मौत चीन के बाद इटली में हुई हैं।

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