Kerala LED Clinic : इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट से बचने की राह दिखा रही महिलाओं की कोशिशें, जानिए कामयाबी की कहानी

इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट भारत ही नहीं दुनियाभर की बहुत गंभीर समस्या है। ई-वेस्ट से पर्यावरण को कैसे बचाया जाए इस पर खूब मंथन हो रहा है। केरल से एक अच्छा उदाहरण सामने आया है जिसमें ई-वेस्ट को मैनेज करने के तरीके सुझाए गए हैं।

Kerala LED Clinic

हर दिन डेवलप हो रही नई तकनीक के साथ पुराने या खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कचरा बनते जा रहे हैं। घरों में एलईडी बल्ब का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं, लेकिन खराब होने पर इसे फेंक दिया जाता है। हालांकि, केरल की पांच महिलाएं ऐसे काम नहीं करने वाले बल्ब को फेंकने की सलाह नहीं देतीं। इन महिलाओं ने 'एलईडी क्लिनिक' की पहल की है। Kerala LED Clinic में खराब बल्ब को लाने के बाद ई-वेस्ट से बचा जा सकता है। जानिए एर्नाकुलम के एडकट्टुवयल में एलईडी क्लिनिक की सराहनीय पहल क्यों चर्चा में है।

खराब एलईडी बल्ब का क्या करें ?

दरअसल, जब हमारे घरों में एलईडी बल्ब खराब हो जाते हैं तो गारंटी-वारंटी की सुविधा खत्म होने पर हम अक्सर पुराने बल्ब को फेंक देते हैं। एक्सचेंज या पुराने बल्ब को नए से बदलने की सुविधा न होने पर हम अक्सर नया खरीदते हैं। कहने-सुनने में भले ही ये मामूली बात लगे, लेकिन एक नए बल्ब की कीमत और पुराने को फेंकने से पर्यावरण को होने वाला नुकसान लंबी अवधि में ऐसी क्षति का कारण बनता जा रहा है। ऐसे में सवाल ये कि खराब हो चुके बल्बों का कोई क्या कर सकता है ?

क्यों शुरू हुआ Kerala LED Clinic

इस सवाल का जवाब ये कि अगर आप केरल में रहते हैं तो खराब एलईडी बल्ब को उन्हें एलईडी क्लिनिक में लेकर जा सकते हैं। इस क्लिनिक के बारे में ग्रामीण विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र के कार्यकारी निदेशक, थंकाचन पीए बताते हैं कि मुलंथुरुथी के पास थुरुथिक्कारा में इस सेंटर की शुरुआत का मकसद थुरुथिक्कारा पंचायत में कार्बन फुटप्रिंट पर अंकुश लगाना है। दूसरे राज्यों में भी इस कॉन्सेप्ट पर खराब एलईडी बल्बों को प्रोसेस या रिपेयर किया जा सकता है। इससे ई-वेस्ट को कम करने में काफी मदद मिलेगी।

छह साल पहले शुरुआत, पैसे कमा रहीं महिलाएं

थंकाचन बताते हैं कि करीब 6 साल पहले साल 2017 में Kerala LED Clinic की शुरुआत के बाद से, प्रशिक्षण और दूसरी सहायता भी मिली। मदद पाने के लिए क्लिनिक आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कुदुम्बश्री और हरित कर्म सेना की महिलाएं बड़ी संख्या इसमें शामिल हैं। एलईडी क्लिनिक स्थानीय महिलाओं के लिए, यह जीविकोपार्जन यानी पैसे कमाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता का साधन भी है।

बढ़ रही है एलईडी क्लिनिक की लोकप्रियता

ग्रामीण विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र के कार्यकारी निदेशक थंकाचन बताते हैं कि कई स्थानीय-स्वशासन संस्थाएं भी इस विचार को अपना रही हैं।" थंकाचन के अनुसार, केरल इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने पंपा नदी बेसिन के पास पंचायतों में एलईडी क्लीनिक स्थापित करने की पहल शुरू की है।

रिपेयरिंग का खर्च और नए बल्ब की कीमत

एडक्कट्टुवयल पंचायत में सामुदायिक विकास सोसायटी (सीडीएस) की अध्यक्ष निशीदा के अनुसार, पंचायत में कुदुम्बश्री इकाई की पांच महिलाओं ने प्रशिक्षण वर्ग में भाग लेने के बाद अब एक क्लिनिक स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि "प्रशिक्षण थुरुथिक्कारा विज्ञान केंद्र के लोगों ने दिया। ट्रेनिंग लेने वाली एक महिला दीपा बाबू ने बताया, पूरी पंचायत के लोग एलईडी बल्ब ठीक कराने आते हैं। प्रति माह औसतन 50 से अधिक बल्ब मिलते हैं। शुरुआती दिनों में बल्ब रिपेयरिंग की संख्या पहले से कहीं अधिक थी। उन्होंने बताया कि एक लाइट की मरम्मत में 40 रुपये का खर्च आता है। नई एलईडी बल्ब भी बनाते हैं। इनकी कीमत 100 रुपये होती है।

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    पंचायत में टोटल LED बल्ब, पर्यावरण पर प्रभाव

    दीपा बताती हैं कि एक अनुमान के मुताबिक एक पंचायत 500 से अधिक एलईडी बल्बों का उपयोग करती है। स्ट्रीटलाइट्स, ऑफिस और अन्य सार्वजनिक स्थानों को मिलाकर काफी एलईडी बल्ब जलाए जाते हैं। बकौल दीपा, "कल्पना कीजिए कि अगर इन बल्बों को बदलने के बजाय इनकी मरम्मत की जाए तो कितना बड़ा खर्च बच जाएगा।" उन्होंने पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचने की बात भी कही।

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