हाईकोर्ट के जज ने की ब्राह्मणों की तारीफ, बोले- आर्थिक आधार पर हो आरक्षण

नई दिल्ली। केरल हाईकोर्ट के जज वी चितंबरेश के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। सामान्य तौर पर जज सार्वजनिक रूप से किसी मामले पर बयान देने से बचते हैं लेकिन केरल हाईकोर्ट के जज वी चितंबरेश ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ब्राह्मणों का जन्म दो बार होता है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों में तमाम सद्गुण मौजूद होते हैं। उन्होंने ब्राह्मणों के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत की। उनके इस बयान पर अब विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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जस्टिस चितंबरेश ने तारीफ करते हुए कहा कि पूर्व जन्म के कर्मों के आधार पर ब्राह्मणों का जन्म दो बार होता है। एक ब्राह्मण में सारी अच्छे गुण होते हैं। उन्होंने कहा कि ध्यान देने लायक बात ये है कि ब्राह्मण कभी सांप्रदायिक नहीं होता है, वह लोगों से प्यार करता है। वह विचारशील और अहिंसावादी होता है और वही है जो किसी भी अच्छे काम के लिए दान करता है।

हाईकोर्ट के जज ने कहा कि ब्राह्मणों को जाति या धर्म पर आधारित आरक्षण व्यवस्था का विरोध करते हुए आर्थिक आधार पर इसे देने की मांग की जानी चाहिए। केरल हाईकोर्ट के जज ने कहा कि यही वक्त है कि आप ब्राह्मण आरक्षण के आधार पर सवाल उठाएं। उन्होंने कहा, 'संवैधानिक पद पर रहते हुए सही नहीं होगा कि मैं इस मुद्दे पर अपनी बात रखूं, लेकिन बस ये याद दिला रहा हूं कि ऐसे मंच मौजूद हैं, जहां पर आप अपनी आवाज उठा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए हाल में ही 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई है।जस्टिस चितबंरेश ने कहा कि अगर एक ब्राह्मण कुक का बेटा नॉन क्रीमी लेयर में आता है तो उसे भी आरक्षण व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा। लेकिन एक लकड़ी के व्यापारी का बेटा जो कि पिछड़े वर्ग का है, उसे आरक्षण के लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि यही सही वक्त है जब आप इसको लेकर आवाज उठाएं।

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