ब्राह्मण पुजारियों के कथित चरण धोने के मामले पर ऐक्शन में Kerala HC,खुद शुरू की कार्यवाही
कोच्चि, 9 फरवरी: केरल हाई कोर्ट ने कथित रूप से श्रद्धालुओं की ओर से ब्राह्मण पुजारियों के पांव धुलवाए जाने के मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू कर दी है। अदालत ने मंगलवार को एक न्यूज रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में खुद ही दखल दिया है। इस न्यूज रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कोच्चि में त्रिप्पुनिथुरा के श्री पूर्णाथ्रायीसा मंदिर में 'पंथरांडु नमस्कारम' की विधि के दौरान श्रद्धालुओं से पापों का प्रायश्चित करवाने के लिए 12 ब्राह्मणों के पांव धुलवाए जाते हैं। यह मंदिर कोच्चिन देवासम बोर्ड के प्रबंधन के अधीन आता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर केरल हाई कोर्ट के जस्टिस अनिल के नरेंद्रन और जस्टिस पीजी अजीतकुमार की खंड पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत की कार्यवाही शुरू की है।

ब्राह्मण पुजारियों के कथित चरण धुलवाने का मामला
सुनवाई के दौरान कोच्चिन देवासम बोर्ड के स्टैंडिंग काउंसिल की ओर से इन दावों को नकार दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह विधि 'थांत्री' पूरी करते हैं, न कि श्रद्धालुओं से ये सब करवाया जाता है। उनके मुताबिक 'श्रद्धालुओं से ब्राह्मणों के चरण नहीं धुलवाए जाते हैं, जैसा कि न्यूज रिपोर्ट में बताया गया है। यह 'थांत्री' होते हैं, जो 'पंथरांडु नमस्कारम' के दौरान श्री पूर्णाथ्रायीसा मंदिर के 12 पुजारियों के चरण धोते हैं।' कोच्चिन देवासम बोर्ड के स्टैंडिंग काउंसिल ने इस मामले में अदालत से एफिडेविट दायर करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा था। इसपर कोर्ट ने उनसे दो हफ्तों के भीतर इसे दायर करने की मंजूरी दे दी है। केरल हाई कोर्ट की यह खंडपीठ इसी महीने की 25 फरवरी को फिर से इस मामले की सुनवाई करेगा।
जिस अधार पर केरल हाई कोर्ट मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की है, वह न्यूज रिपोर्ट 4 फरवरी, 2022 को 'केरल कौमुदी' नाम के मलयालम अखबार में छपी थी। अखबार के मुताबिक 'पंथरांडु नमस्कारम' के दौरान मंदिरों में इस तरह कि विधि अपनाई जाती है, जिसमें श्रद्धालुओं से ब्राह्मण पुजारियों के पांव धुलवाए जाते हैं।












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