केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का दावा, हिजाब का इस्लाम से लेना-देना नहीं

नई दिल्ली, 13 फरवरी। कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद पर देशभर में चर्चा हो रही है। यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट मं लंबित है और पूरे देश में इसको लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या हिजाब को शिक्षण संस्थान में पहनने की अनुमति होनी चाहिए। इस बहस के बीच केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि हिजाब इस्लाम का हिस्सा नहीं है। यह व्यक्तिगत पसंद का मामला है, लिहाजा इसे विवाद के रूप में नहीं लेना चाहिए, यह साजिश है। मुस्लिम लड़कियां हर क्षेत्र में काफी अच्छा कर रही हैं लिहाजा उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, नाकि नीचे ढकेलना चाहिए।

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हिजाब का जिक्र इस्लाम में नहीं
आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि कुरान में हिजाब का 7 जगह इस्तेमाल हुआ है। एक जगह पर पैगम्बर साहब के अपने परिवार से जुड़कर हिजाब का जिक्र आता है। उसका कपड़े से ताल्लुक नहीं है, उसका ताल्लुक यह है कि जब तुम बात करो तो दीवार या पर्दा बीच में होना चाहिए। पहनने के कपड़े को लेकर इसका जिक्र नहीं है। बड़े-बड़े स्कॉलर्स की राय है कि हिजाब शब्द का इस्तेमाल महिलाओं के लिए हुआ ही नहीं है। हिजाब का अर्थ ऐसे है कि मेरे-आपके बीच में पर्दा डाल दिया जाए।

कनीज के लिए होता था हिजाब का इस्तेमाल
अरब देशों में उस समय बड़ी संख्या में गुलाम थीं, जिन्हें कनीज कहा जाता था। उनके लिए कहा गया था कि वह अपने वक्ष पर दुपट्टा डाल लें जिससे वह दूसरी महिलाओं से अलग नजर आएं। लेकिन आज तो महिलाएं गुलाम हैं नहीं। उस वक्त गुलाम महिलाओं के साथ बदतमीजी होती थी, लेकिन अब ऐसी बात तो है नहीं। हदीस में कहा गया है कि तुम उस जमाने में रह रहे हो जहां जो कुछ तुम्हे बताया जा रहा है कि अगर उसमे से तुमने 10 फीसदी भी छोड़ दिया तो तुम बर्बाद हो जाओगे। लेकिन बाद के जमाने में अगर 10 फीसदी भी तुमने अपना लिया तो तुम कामयाब हो जाओगे।

हिजाब का मतलब शालीनता, सभ्यता
आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि मेरा ये मानना है कि कौन क्या पहनता है कि कौन क्या पहनता है ये कभी भी विवाद का विषय नही होना चाहिए। हर व्यक्ति का यह अपना फैसला है कि वह क्या पहने, शर्त ये है कि शालीनता होनी चाहिए, सभ्यता होनी चाहिए, सुसंस्कृत होना चाहिए। सेना में जो आदमी भर्ती होगा वह यह नहीं कह सकता है कि मैं जो चाहे पहनूंगा, पुलिस में जो आदमी भर्ती होगा यह वह नहीं कह सकता है कि फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष हो कि मैं जो चाह पहनूंगा। पुलिस में कोई ऐसा समुदाय नहीं है जो पुलिस में काम नहीं कर रहे हैं। लेकिन कभी किसी ने यह नहीं हा कि मैं अपनी मर्जी से कपड़े पहनूंगा।

राजनीतिक के लिए ड्रेस का इस्तेमाल
राज्यपाल ने कहा कि क्या आपने सुना है कि मिशनरी स्कूल में मुस्लिम बच्चों ने कहा कि मैं अपनी पसंद के कपड़े पहनूंगा। स्कूल में जो ड्रेस पहनी जाती है वह स्कूल की पहचान है। ऐसे में धर्म के नाम पर कपड़े को लेकर विवाद खड़ी करना नादानी है। आप वैसे स्कूल में जा सकते हैं जहां ड्रेस कोड नहीं है, कोई जबरदस्ती तो है नहीं। जब आपकी शिक्षा पूरी हो जाए उसके बाद बाहर जाकर आपकी जो मर्जी पहनिए। किसी भी ड्रेस को राजनीतिक पहचान के तौर पर इस्तेमाल करना बिल्कुल गलत है। समाज को बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पूर्वी भारत में महिलाएं काम करती हैं तो उनके सिर पर बोझ रहता है लेकिन वह लंबा घूंघट कर रही है। लेकिन ऐसा दक्षिण भारत में नहीं है। कुछ लोगों का मिजाज बन गया है कि अगर अटपटी बात करिए तो मीडिया आपको दिखाता है। ये लोग किसी तरह छोटी स्क्रीन पर आना चाहते हैं।

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