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चुनावों में हार के बाद लेफ्ट में दो फाड़! CPM के खिलाफ CPI क्यों उठाने लगी आवाज?

Kerala Politics: केरल में लगातार दो लोकसभा चुनावों से सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) का सफाया हो रहा है। सीपीआई को तो दोनों ही बार में एक भी सीट नहीं मिल पाई है। अब उसने इसके लिए अपनी बड़ी सहयोगी सीपीएम की छात्र इकाई के खिलाफ मुंह खोलना शुरू कर दिया है।

केरल में एलडीएफ की अगुवाई सीपीएम के हाथों में है और सीपीआई उसकी छोटी सहयोगी है। चुनावों के बाद सीपीआई ने कॉलेज परिसरों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की कथित 'गुंडागर्दी' के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है।

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सीपीएम की छात्र इकाई एसएफआई पर 'गुंडागर्दी' के आरोप
एक हफ्ते में यह दूसरी बार है, जब सीपीआई ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अगुवाई वाली सीपीएम से कह दिया है कि चुनावों में हो रही फजीहत से बचने के लिए जरूरी है कि वह एसएफआई पर नकेल कसना शुरू कर दे।

एसएफआई की संस्कृति बर्बर- सीपीआई
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के प्रदेश सचिव बिनॉय विस्वम का कहना है कि जबतक एसएफआई की लगाम नहीं कसी जातr है, यह लेफ्ट के लिए 'बोझ' बना रहेगा। अलप्पुझा में उन्होंने मीडिया से कहा, 'एसएफआई एक बर्बर संस्कृति का पालन कर रही है, जो एक छात्र संगठन की कार्यशैली के मुताबिक नहीं है। उन्हें लेफ्ट शब्द का अर्थ भी नहीं पता है।'

एसएफआई पर कोझिकोड में एक कॉलेज प्रिंसिपल से दुर्व्यवहार का आरोप
सीपीआई ने सीपीएम के खिलाफ ऐसी आवाज उठाने की हिम्मत कोझिकोड में गुरुदेव स्कूल के प्रिंसिपल के साथ हुए कथित दुर्व्यहार के बाद दिखाई है। एसएफआई के कार्यकर्ताओं ने उन्हें तब निशाना बनाया, जब वे नए छात्रों के लिए बने हेल्पडेस्क पर बाहरी तत्वों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए थे।

'हम प्रिंसिपल की छाती पर चूल्हा जला देंगे'
इसके बाद एसएफआई ने कॉलेज तक एक मार्च निकाला, जिसमें एक वक्ता ने कथित तौर पर कहा, 'अगर जरूरी हुआ तो हम प्रिंसिपल की छाती पर चूल्हा जला देंगे।' वहीं कोझिकोड जिले के डीवाईएफआई नेता बीपी परबीश कथित रूप से धमकाते हुए सुने गए, 'अगर एसएफआई (हमले का)फैसला करता है, दुष्ट (प्रिंसिपल सनील भास्कर) को कैंपस से बार जाने के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ जाएगी।'

इसी तरह की एक और घटना में तिरुवनंतपुरम में केरल यूनिवर्सिटी कैंपस में कांग्रेक की छात्र इकाई के एक कार्यकर्ता पर कथित रूप से एसएफआई के लोगों ने हमला कर दिया।

एक दलित महिला प्रिंसिपल की रिटायरमेंट के दिन उनके लिए 'कब्र' खोदने का भी आरोप
कोझिकोड की घटना कई लोगों के लिए पलक्कड़ की वारदात याद दिलाने लगी है। 2016 में एसएफआई के लोगों ने वहां के गवर्नमेंट विक्टोरिया कॉलेज की प्रिंसिपल एन सारासु के रिटायर्मेंट के दिन उनके लिए एक सांकेतिक 'कब्र' खोद रखी थी। सारासु एक दलित महिला हैं, जिन्होंने इस बार अलाथुर से भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन आरोपों पर एसएफआई को बचाने में जुटे
लेकिन, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन अपनी पार्टी की छात्र इकाई की करतूतों पर लगता है कि पर्दा डालने में जुटे हुए हैं। उन्होंने गुरुवार को केरल विधानसभा में दावा किया कि प्रदेश के कैंपस में 'गुंडा राज' जैसे आरोप उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सरकार की सफलताओं को 'दबाने' की कोशिश है।

विजयन ने दलील दी कि 'कैंपस में तनाव की घटनाओं के लिए किसी खास छात्र संगठन पर उंगली उठाना छोटी सोच है। इस तरह के रवैए से चीजें और बिगड़ती हैं। कैंपस में हिंसा के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उनपर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन, इसे इस छोटी-सोच के साथ नहीं देखना चाहिए।'

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