OPINION: समावेशी राजनीति के अगुवा बने केजरीवाल!
OPINION: राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते दिल्ली को अभी तक पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिला है। दूसरे राज्यों के मुकाबले ये केंद्र प्रशासित राज्य महत्वहीन होना चाहिए। पर दिल्ली के चुनाव को लेकर देश के जनता की उत्सुकता औैर नेशनल मीडिया में मिल रही कवरेज से भी आंका जा सकता है। यह प्रासंगिकता दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी होने से कहीं ज्यादा यहां के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के चलते है।
देश में एक नई तरह की राजनीति को चर्चा के केंद्र में लाने का श्रेय अरविंद केजरीवाल को ही जाता है। सरकारें आम जनता के फायदे के लिए पहले से काम करती रही हैं। लेकिन केजरीवाल की जनता को पहुंचाने वाली जनकल्याणकारी योजनाओं ने उन्हें नायक बना दिया। राजनीतिक तौर पर बात करें तो वो सॉफ्ट-स्पोकन हैं और अपनी बातों को बहुत संयमित तरीके से रखते हैं।

पिछले दस सालों में जिस प्रकार आम चुनावों के दौरान हिंदुस्तान की राजनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इर्द गिर्द घूमती है, कमोबेश दिल्ली विधानसभा चुनाव भी अरविंद केजरीवाल के आसपास ही रहता है। या यूं कहें तो अरविंद केजरीवाल दिल्ली की राजनीति की धुरी बन चुके हैं। चुनाव कोई भी जीते या हारे मगर चर्चा का केंद्र एक ही है और उसी के खिलाफ सभी अपनी रणनीति बना रहे हैं।
बीजेपी और कांग्रेस को छोड़कर कोई और पार्टी नहीं है,जो दो राज्य या उससे अधिक राज्यों में सरकार चला रही है। अरविंद केजरीवाल पंजाब में भी सरकार चला रहे हैं। पार्टी के गवर्नेंस Model ने उन्हें हीरो बना दिया। आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की राजनीति देश के भविष्य के सूरज की तरह हो सकती है। क्योंकि नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन चुके हैं और बीजेपी में उनके जैसा कोई दमदार चेहरा नहीं है, वहीं कांग्रेस की राजनीति अभी भी उतार पर है। बीते कुछ वर्षों में आम आदमी पार्टी को बहुत नुकसान भी पहुंचा है। पिछले 12 वर्षों में एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में आप का उदय उल्लेखनीय रहा है। आजाद भारत में असम गण परिषद को छोड़कर कोई अन्य संगठन जो आंदोलन निकला हो, लगातार चुनाव जीतने वाली पार्टी नहीं बन सका।
इन सब से इतर अरविंद केजरीवाल समावेशी राजनीति में विश्वास रखने के लिए जाने जाते हैं। कई नौजवान नेता उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। कहीं उनकी राजनीतिक स्टाइल की चर्चा होती है, तो कहीं उनके Governance Model की। बीते दिनों अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश की बेहतर कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की थी। अन्य राज्यों में भी सियासी दलों ने आप के Model को अपनाने की कोशिश की है। अब देखना दिलचस्प होगा की जनता फिर से अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की गद्दी सौंपती है या नहीं?












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