Kathua Terror Attack: क्या है अल्पाइन क्वेस्ट एप्प, जिसे आतंकियों ने कठुआ हमले में किया इस्तेमाल
Kathua Terror Attack Latest Update: जम्मू कश्मीर के कठुआ में 8 जुलाई 2024 को भारतीय सैनिकों पर हमला करने वाले आतंकियों के मददगार लोकल गाइड ही नहीं बल्कि अल्पाइन क्वेस्ट नाम का एक मोबइल एप्प भी बना है।
मीडिया की खबरों की मानें तो गूगल मैप की तरह लोकेशन बताने का काम करने वाले अल्पाइन क्वेस्ट एप्प के जरिए पहाड़, जंगल और नदी का रास्ता आसानी से तलाशा जा सकता है। इसलिए जम्मू कश्मीर जैसे इलाकों में आतंकियों के बीच इस एप्प का इस्तेमाल बढ़ा है।

बताया जाता है कि बीते 18 माह में जम्मू में जितने भी आतंकी हुए हैं, उन सबकी समान बात यह है कि उनमें आतंकियों ने अल्पाइन क्वेस्ट एप्प की मदद ली है। कठुआ आतंकी हमले तो यह भी सामने आया है कि स्थानीय गाइड ने आतंकियों को भोजन ही मुहैया नहीं करवाया बल्कि उनको पनाह भी दी है।
पाकिस्तान में मिलती Alpine Quest app की ट्रेनिंग
आतंकियों को अल्पाइन क्वेस्ट एप्लीकेशन की ट्रेनिंग पाकिस्तान में दी जाती है। ट्रेनिंग के बाद आतंकी इस एप्प की मदद से नदी-नालों, पहाड़ व टनल जैसी जगहों का भी आसानी से पता लगाकर अपना टारगेट सेट करते हैं। खास बात यह है इसे ऑफ मोड भी चलाया जा सकता है।
कठुआ में आतंकी कहां हुआ?
- जम्मू कश्मीर के कठुआ जिला मुख्यालय से 123 किलोमीटर दूर लोहाई मल्हार बलॉक के माछेड़ी इलाके के बदनोटा में आतंकी हमला 8 जुलाई 2024 को दोपहर 3.30 बजे हुआ।
- कठुआ में आतंकी हमला उस वक्त हुआ, भारतीय सुरक्षा बल सर्च ऑपरेशन के तहत बदनोटा में पेट्रोलिंग पर निकले थे।
- यहां रास्ता कच्चा था। एक तरफ गहरी खाई थी। ऐसे में भारतीय सेना के दोनों ट्रकों की स्पीड अधिकतम 15 से 20 किलोमीटर प्रतिघंटा था।
- पहले से घात लगातार बैठे आतंकियों ने सुरक्षा बलों के ट्रक चालक को ग्रेनाइड फेंककर निशाना बनाया और फिर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। पांच जवान शहीद हो गए।
कठुआ में आतंकी हमले की वजह
- जम्मू में कठुआ जिले का बदनोटा वो जगह है, जहां लंबे समय से भारतीय सुरक्षा बलों पर कोई आतंकी हमला नहीं हुआ। हालांकि इस रूट को नब्बे के दशक के आतंकी आने-जाने में इस्तेमाल करते थे।
- मीडिया की खबरों में सूत्रों के हवाले कहा जा रहा है कि सालों पहले जो आतंकी कठुआ से पाकिस्तान गए थे। वे अब फिर से सक्रिय हो गए हैं। ऐसा भी कहा जा रहा है कि पुराने आतंकी नए आतंकियों को ट्रेंड कर भेज रहे हैं।
- यह ऐसा इलाका है, जहां से आम लोगों की आवा-जाही भी काफी कम रहती है। रास्ता भी दुर्गम है। यह आतंकियों का परम्परागत रूट है।
- भारतीय सेना की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन ऑल आउट की वजह कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाएं करीब-करीब खत्म हो गई। ऐसे में आतंकियों ने फिर से अपने पुराने रूट का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
- शायद यह वजह है कि जम्मू संभाग में पिछले डेढ़ माह से आतंकी हमले बढ़े हैं।
कठुआ हमले में ये जवान हुए शहीद
1. हवलदार कमल सिंह रावत: शहीद कमल सिंह रावत उत्तराखंड के पौड़ी जिले के लैंसडाउन के गांव पापरी नोदानु के रहने वाले थे। इनके दो बच्चे हैं।
2. एनके विनोद सिंह: शहीद विनोद सिंह उखराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले के जाखणीधार के गांव चौंद जसपुर के रहने वाले थे। 33 वर्षीय विनोद के वीरसिंह भंडारी व शशि देवी के इकलौटे बेटे थे। इनका परिवार भानियावाल देहरादूर में रहता है। विनोद के चार साल का बेटा व चार माह की बेटी है।
3. आरएफएन अनुज नेगी: शहीद राइफलमैन अनुज नेगी उत्तराखंड के पौडी गढ़वाल जिले के रिखणीखाल के गांव डोबरिया के रहने वाले थे। अनुज नेगी की नवंबर 2023 को शादी हुई थी।
4. नायब सूबेदार आनंद सिंह: शहीद आनंद सिंह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के गांव कंडाखाल के रहने वाले थे।
5. आरएफएन आदर्श नेगी: शहीद आदर्श नेगी उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग के गांव थाटी डागर के रहने वाले थे। इनके पिता दलबीर सिंह नेगी खेती करते हैं। 26 वर्षीय आदर्श नेगी साल 2019 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। तीन भाई बहनों में सबसे छोटे थे।












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