कश्मीर के पहले IAS टॉपर शाह फैसल की सेवा में वापसी, बोले-'मेरे आदर्शवाद ने मुझे निराश किया'
नई दिल्ली, 28 अप्रैल: कश्मीर से पहली बार आईएएस टॉप करने वाले शाह फैसल की सरकारी सेवा में वापसी पर मुहर लग गई है। इससे पहले उन्होंने इसका संकेत दिया था। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि अपना इस्तीफा वापस लेने की शाह फैसल का आवेदन मंजूर कर लिया गया है और उनकी अगली पोस्टिंग के बारे में जल्द घोषणा की जाएगी।इससे पहले उन्होंने जिंदगी की नई शुरुआत की बात की थी और माना था कि अतीत में उनसे काफी गलतियां हुईं और आदर्शवाद के चक्कर में पड़कर उन्हें काफी निराशा हाथ लगी है। शाह फैसल ने कथित 'असहिष्णुता' के नाम पर 2019 में आईएएस की नौकरी छोड़ दी थी और जम्मू कश्मीर में राजनीकि पार्टी बनाई थी, जिसकी रैली में जेएनयू के चर्चित स्टूडेंट ऐक्टिविस्ट शेहला राशिद भी पहुंचीं थीं। लेकिन, अब फैसल को महसूस हुआ है कि उनसे फैसला लेने में बड़ी गलतियां हुईं थीं।

शाह फैसल ने सरकारी सेवा में वापसी
जम्मू कश्मीर के पहले आईएएस टॉपर शाह फैसल ने नौकरी में फिर से वापसी हो गई है। इससे पहले एक के बाद एक तीन ट्वीट करके उन्होंने कहा कि वे अपने आदर्शवाद के चलते निराश हुए हैं और माना है कि उनसे फैसले लेने में गलतियां हुईं। गौरतलब है कि फैसल राजनीति में किस्मत तलाशने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी थी। उन्होंने आईएएस जैसी प्रतिष्ठत सेवा छोड़कर 2019 में राजनीति में कदम रखा था और 'जम्मू और कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट' के नाम से अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई थी।

'मेरे आदर्शवाद ने मुझे निराश किया'
बुधवार को शाह फैसल ने जो सीरीज में तीन ट्वीट किए हैं, उससे उनकी मौजूदा सोच, पिछली गलतियों और भविष्य में नए सिरे से शुरुआत करने की बात की गई है। उन्होंने यहां से शुरुआत की है, 'मेरे जीवन के आठ महीने (जनवरी, 2019 से अगस्त 2019) ऐसे गुजरे कि मैं लगभग टूट गया था। एक मिथ्या के पीछे भागते हुए मैंने वह सबकुछ गंवा दिया, जो मैंने वर्षों में बनाया था। जॉब। दोस्त। प्रतिष्ठा। लोगों का भरोसा। लेकिन, मैंने उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। मेरे आदर्शवाद ने मुझे निराश किया।'

'मैं फिर से वह सब शुरू करने को लेकर उत्साहित हूं।'
अगले ट्वीट में वह लिखते हैं, 'लेकिन, मुझे खुद पर यकीन था। कि मुझसे जो गलतियां हुई हैं, उसे मैं ठीक करूंगा। कि यह जिंदगी मुझे एक और मौका देगी। उन 8 महीनों की यादों से मेरा एक हिस्सा थक चुका है और उस विरासत को मिटाना चाहता है। उसका काफी कुछ पहले ही जा चुका है। विश्वास है कि वक्त बाकी को भी मिटा देगा।' उनके अगले ट्वीट में भविष्य की उम्मीदों की ओर इशारा किया गया है, 'बस ये साझा करने की सोची कि जिंदगी खूबसूरत है। हमें खुद को एक मौका देना हमेशा अच्छा रहता है। नाकामियां हमें मजबूत बनाती हैं। और अतीत के साए से परे एक अद्भुत दुनिया है। अगले महीने में 39 का हो रहा हूं। और सही में मैं फिर से वह सब शुरू करने को लेकर उत्साहित हूं।'

नौकरी में वापसी की ओर किया था इशारा
हालांकि, अपने ट्वीट में उन्होंने नौकरी में दोबारा वापसी को लेकर साफ तौर पर तो कुछ भी नहीं कहा था, लेकिन इसके मायने यही निकाले जा रहे थे कि या तो वह सरकार की सहमति से भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के तौर पर वापस होने वाले हैं या फिर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर या देश में कहीं भी कोई बड़ी भूमिका (सलाहकार की तरह की) निभाने की तैयारी कर रहे हैं। और आखिरकार गुरुवार को गृहमंत्रालय ने साफ कर दिया कि सेवा में वापसी का उनका आवेदन मंजूर कर लिया गया है।

2009 बैच के यूपीएससी टॉपर हैं शाह फैसल
शाह फैसल 2009 बैच के यूपीएससी टॉपर हैं, लेकिन 2019 के जनवरी में उन्होंने देश में कथित 'असहिष्णुता बढ़ने' के नाम पर नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद वे अपनी राजनीतिक पार्टी बनाकर पॉलिटिक्स में सक्रिय हो गए। पार्टी की लॉन्चिंग की तो उसमें जेएनयू की चर्चित स्टूडेंट ऐक्टिविस्ट शेहला राशिद भी श्रीनगर की उनकी रैली में शरीक हुईं। कहते हैं कि उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने की भी तैयारी कर ली थी। 5 अगस्त, 2019 को जब जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाया गया तो एहतियात के तौर पर उन्हें भी गिरफ्तार किया गया था। गौरतलब है कि उन्होंने 2019 के जनवरी में इस्तीफा दिया तो था, लेकिन उसे मंजूर नहीं किया गया था।
मौजूदा सरकारी की नीतियों के समर्थक बन चुके हैं
लेकिन, जब वे जेल से छूटकर आए तो उन्होंने राजनीति को तोबा तो कह ही दिया, सोशल मीडिया पर मौजूदा सरकारी की नीतियों के भी जोरदार समर्थक बन गए। उनका यह नया किरदार 2019 के मुकाबले पूरी तरह से बदला हुआ है और वे अक्सर अपने ट्विटर हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के भाषणों को शेयर करते हैं। और आखिरकार यह साबित हो गया कि उन्हें जब महसूस हुआ कि वह गलत राह पर निकल गए थे तो उन्होंने भूल सुधार करके देश सेवा में फिर से जुटना तय किया है और इस दौरान केंद्र सरकार ने भी उनका इस्तीफा मंजूर नहीं करके उन्हें अपने विचार को सही दिशा में ले जाने का मौका दिया है।












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