Kashmir Attack: सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तानी परिवार की वापसी पर लगाई रोक, जानिए पूरा मामला?
Kashmir Attack: जम्मू-कश्मीर(Jammu Kashmir) के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार ने भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिक को जल्द देश छोड़ने का आदेश दिया। जिसके बाद सरकार पाकिस्तानी नागरिकों को अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान(Pakistan) भेज रही है।
इसी बीच एक व्यक्ति ने दावा किया कि, वे भारतीय नागरिक हैं उसके पास वैध पासपोर्ट तथा आधार कार्ड हैं। उसके बावजूद उसे पाकिस्तान भेजा जा रहा है। इसको लेकर उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार से दावे को पुष्टि करने का आदेश दिया।साथ ही फिलहाल पाकिस्तान वापस भेजने पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. के. सिंह की पीठ ने संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की जांच करने का निर्देश दिया और कहा, उचित निर्णय शीघ्र लिया जाए, हालांकि हम कोई समयसीमा निर्धारित नहीं कर रहे हैं।
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याचिकाकर्ता हाईकोर्ट भी जा सकते हैं
कोर्ट ने यह भी कहा, विशेष परिस्थितियों में, जब तक उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। साथ ही कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अंतिम निर्णय से असंतुष्ट होने की स्थिति में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। पीठ ने यह भी कहा कि इस आदेश को किसी भी रूप में एक नजीर नहीं माना जाएगा।
1997 में POK से आ गए थे भारत
याचिकाकर्ता अहमद तारिक बट(Ahmed Tariq Butt) ने दावा किया है कि वह और उसका परिवार वर्ष 1997 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मीरपुर से श्रीनगर आए थे। उन्होंने कहा कि वह एक भारतीय नागरिक हैं, जिनके पास वैध पासपोर्ट और आधार कार्ड हैं। उनके परिवार में उनके पिता, माता, बड़ी बहन और दो छोटे भाई शामिल हैं।
बट ने बताया कि उनके पिता 1997 में जम्मू-कश्मीर की राजधानी आए थे और शेष परिवार के सदस्य 2000 में वहां आ गए। इसके बाद उनके भाई-बहनों की पढ़ाई एक निजी स्कूल में हुई।
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एफआरओ ने जारी किया नोटिस
उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने 25 अप्रैल को एक आदेश जारी कर पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसके बाद श्रीनगर स्थित विदेशी पंजीकरण कार्यालय (एफआरओ) ने उन्हें और उनके परिवार को नोटिस जारी किया।
याचिका में कहा गया, व्यक्तिगत नोटिसों में एफआरओ ने अवैध और आधारहीन तरीके से यह दावा किया है कि याचिकाकर्ता नंबर 1 (बट) और उनके परिवार के सदस्य वर्ष 1997 में भारत में दाखिल हुए थे और वीज़ा की अवधि समाप्त होने पर उन्हें भारत छोड़ना था, यह मानते हुए कि वे पाकिस्तानी नागरिक हैं।
'जबरन भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है'
कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि, उनके पिता, माता, बहन और एक छोटे भाई को 29 अप्रैल की रात 9 बजे के आसपास जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अवैध रूप से गिरफ्तार किया और उन्हें 30 अप्रैल को भारत-पाकिस्तान सीमा पर ले जाया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उन्हें जबरन भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि वे भारतीय नागरिक हैं।
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