कर्नाटक में मायावती के चक्रव्यूह में फंसी भाजपा, हिट हुआ 1 विधायक वाली BSP का प्लान
बेंगलुरु। कर्नाटक के दो दिन पुराने सीएम येदुरप्पा ने बहुमत परीक्षण से पहले ही इस्तीफा दे दिया है, इस बार वो केवल ढाई दिन के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे। इस्तीफे से पहले कर्नाटक विधानसभा को संबोधित करते हुए येदुरप्पा ने कहा कि मैं वापस आऊंगा, 150 से ज्यादा सीटें जीतकर आऊंगा, उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास बहुमत नहीं है और वो अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपने जा रहे हैं। जैसे ही येदुरप्पा ने इस्तीफा दिया वैसे ही कांग्रेस और जेडीएस खेमा खुशी से नाच उठा है, विधानसभा में ही कांग्रेसी नेताओं ने विजयी चिह्न दिखाकर एक-दूसरे को बधाई दी।

मायावती का दिमाग
आज कांग्रेस और जेडीएस विधायकों का जश्न ये बता रहा है कि उन्होंने बीजेपी को हरा दिया है। अगर कांग्रेस अगर 100 से भी कम नंबर लेकर भी सत्ता में बनी हुई तो उसके पीछे दिमाग उस व्यक्ति का है, जिसने चुनाव नतीजों के तुरंत बाद ही यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी को फोन करके कहा कि वो एचडी देवगौड़ा को गठबंधन के लिए फोन करे।

कर्नाटक में मायावती के चक्रव्यूह में फंसी भाजपा
और देखते ही देखते बीजेपी की 104 विधायको के सामने कांग्रेस और जेडीएस का गठबंधन 117 विधायकों के नंबरों के आंकड़े के साथ आकर खड़ा हो गया, और ये दिमाग था बसपा सुप्रीमो मायावती का, जिन्होंने 15 मई को जैसे ही चुनाव नतीजों में त्रिशंकु विधानसभा की आहट देखी, तो वो किंगमेकर के तौर पर खुद आगे बढ़ी और देखते ही देखते हर बाजी पलट दी।

माया ने खेला बड़ा दांव, पंडित भी रह गए फेल
एग्जिट पोल के नतीजों में कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा के आसार थे, तब राजनीति के कई पुरोधाओं ने कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी और जेडीएस साथ आकर सरकार बना लेंगे क्योंकि उनका साथ पूर्व में भी रहा है लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि कांग्रेस और जेडीएस साथ आ जाएंगे और कांग्रेस सीएम की कुर्सी का मोह छोड़ देगी।

एक सीट पर जीत हासिल की है बसपा ने
गौरतलब है कि बहुजन समाज पार्टी ने कर्नाटक चुनाव में जेडीएस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया था। चुनाव के दौरान मायावती ने जेडीएस नेताओं के साथ संयुक्त तौर पर रैली भी की थी। मालूम हो कि बहुजन समाज पार्टी ने प्रदेश की 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उसे एक सीट पर जीत हासिल हुई।












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