Karnataka Vidhan परिषद चुनाव: 7 सीटों पर 8 उम्मीदवार, कांग्रेस-बीजेपी में सीधी टक्कर, JD(S) बिगाड़ सकता है खेल
Karnataka Vidhan Parishad Chunav 2026: कर्नाटक राजनीति में एक और महत्वपूर्ण चुनावी जंग शुरू हो गई है। विधान परिषद की 7 सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव में कुल 8 उम्मीदवार मैदान में हैं। नामांकन वापसी की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद कोई उम्मीदवार नहीं हटा, जिससे मुकाबला रोचक हो गया है।
कर्नाटक विधानसभा के सदस्य (MLA) विधान सौधा में वोट डालेंगे। यह चुनाव सत्ताधारी कांग्रेस के लिए अपनी ताकत दिखाने, बीजेपी के लिए वापसी की कोशिश और JD(S) के लिए प्रभाव बनाए रखने का मौका है।

विधान परिषद क्या है और क्यों महत्वपूर्ण?
कर्नाटक विधान परिषद (Legislative Council) राज्य की ऊपरी सदन है। इसमें कुल 75 सदस्य होते हैं, जिनमें से कुछ निर्वाचित और कुछ मनोनीत होते हैं। परिषद का मुख्य काम विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर विचार करना, सुझाव देना और राज्य की नीतियों में गहराई लाना है। हालांकि यह सदन विधानसभा जितना शक्तिशाली नहीं होता, लेकिन इसमें अनुभवी नेता और विशेषज्ञ शामिल होने से बहस की गुणवत्ता बढ़ती है।
7 सीटें खाली हो रही हैं क्योंकि मौजूदा 7 MLC का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। इनमें कांग्रेस के नसीर अहमद, टिप्पन्नप्पा और बीके हरिप्रसाद; बीजेपी के एन नागराजू (एमटीबी), प्रताप सिम्हा नायक और सुनील वल्यापुर; तथा JD(S) के गोविंदराजू शामिल हैं। इन सीटों पर नए चेहरे या पुराने खिलाड़ी किस्मत आजमाएंगे।
मैदान में कौन-कौन?
कांग्रेस के उम्मीदवार (5):
- टिप्पन्नप्पा कामकनूर
- पी वी मोहन
- बी के हरिप्रसाद (KPCC अध्यक्ष)
- शिवन्ना बी एस
- विनय कार्तिक प्रकाश
बीजेपी के उम्मीदवार (2):
- लिंगराज पाटिल
- रघु आर
JD(S) के उम्मीदवार (1):
- गोविंदराजू
कांग्रेस ने ज्यादा उम्मीदवार उतारे हैं, जो उसकी संख्या बल पर आधारित रणनीति को दर्शाता है।
राजनीतिक समीकरण: कौन कितनी सीटें जीत सकता है?
कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सदस्य हैं। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
- कांग्रेस: 134 विधायक
- बीजेपी: 62 विधायक
- JD(S): 18 विधायक
अन्य: कल्याण राज्य प्रगति पक्ष (1), सर्वोदय कर्नाटक पक्ष (1), 2 निर्दलीय, 3 अनारक्षित और स्पीकर।
विधान परिषद चुनाव में MLA वोट के आधार पर परिणाम तय होता है। कांग्रेस अपनी ताकत के आधार पर 4 सीटें आराम से जीत सकती है। बीजेपी को 2 सीटें मिलने की उम्मीद है। सातवीं सीट पर रोचक मुकाबला होने वाला है क्योंकि कांग्रेस और JD(S) दोनों ने यहां दावेदारी ठोंकी है, लेकिन किसी के पास अकेले बहुमत नहीं है।
JD(S) की भूमिका यहां किंगमेकर बन सकती है। अगर JD(S) कांग्रेस का साथ देती है तो सातवीं सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है, अन्यथा वोट बंटने से बीजेपी को फायदा हो सकता है।
विवाद की आंच: आपराधिक मामले का मुद्दा
चुनावी सरगर्मी के बीच विवाद भी सामने आया है। JD(S) उम्मीदवार गोविंदराजू ने कांग्रेस उम्मीदवार शिवन्ना बी एस पर आरोप लगाया कि उन्होंने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज 4 आपराधिक मामले छुपाए हैं। गोविंदराजू ने रिटर्निंग ऑफिसर से शिकायत कर शिवन्ना का नामांकन रद्द करने की मांग की।
शिवन्ना ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'मेरे खिलाफ कोई FIR या आपराधिक मामला नहीं है। मैं शिकायतकर्ता हूं, आरोपी नहीं। यह हार के डर से रची गई साजिश है।' उनके वकील ने अधिकारियों को स्पष्टीकरण दे दिया है और मामला फिलहाल शांत नजर आ रहा है।
यह विवाद दिखाता है कि छोटी-छोटी बातें भी चुनावी मैदान को गरमा सकती हैं।
पार्टियों की रणनीति और महत्व
- कांग्रेस के लिए: सिद्धारमैया के लिए यह चुनाव अपनी मजबूत पकड़ दिखाने का मौका है। बीके हरिप्रसाद जैसे वरिष्ठ नेता की उम्मीदवारी पार्टी की गंभीरता दर्शाती है। कांग्रेस विधायकों की एकजुटता बनाए रखना चाहेगी ताकि कोई क्रॉस वोटिंग न हो।
- बीजेपी के लिए: विपक्ष की भूमिका में बीजेपी अपनी संगठनात्मक ताकत दिखाना चाहेगी। दो सीटें पक्की मानकर वह सातवीं सीट पर भी नजर रखेगी। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर कर्नाटक में वापसी के संकेत देना चाहेगी।
- JD(S) के लिए: कुमारस्वामी की पार्टी छोटे नंबर गेम में माहिर है। 18 विधायकों के साथ वह अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकती है और भविष्य के गठबंधनों के लिए leverage बना सकती है।
पिछले चुनावों से सबक
पिछले विधान परिषद चुनावों में गठबंधन, क्रॉस वोटिंग और आखिरी समय की रणनीति ने परिणाम बदले हैं। इस बार भी विधायकों की वफादारी, पर्ची वोटिंग (secret ballot) और पार्टी व्हिप का सख्ती से पालन अहम होगा।
कर्नाटक में विधान परिषद चुनाव अक्सर स्थानीय मुद्दों, जातीय समीकरणों और व्यक्तिगत प्रभाव पर निर्भर करते हैं। बेंगलुरु, मैसूर, हुबली-धारवाड़ जैसे क्षेत्रों के प्रभावशाली नेता यहां दावेदार होते हैं।
क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?
विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस को 4-5 सीटें मिल सकती हैं। बीजेपी 2 सीटें पक्की रखेगी। JD(S) अगर कांग्रेस के साथ समझौता करती है तो सातवीं सीट पर भी कांग्रेस मजबूत हो जाएगी। हालांकि, JD(S) अपने उम्मीदवार को जिताने की पूरी कोशिश करेगी। यह चुनाव 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टियों की ताकत का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
आगे क्या?
18 जून को मतदान होगा और उसी दिन या अगले दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे। नए MLC 1 जुलाई से अपना कार्यकाल शुरू करेंगे। राज्य सरकार के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परिषद में मजबूत उपस्थिति से विधेयकों पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकता है।
कर्नाटक विधान परिषद की 7 सीटों का चुनाव छोटा जरूर है, लेकिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम है। 8 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला कांग्रेस की बहुमत वाली ताकत, बीजेपी की चुनौती और JD(S) की रणनीति का मिश्रण है। विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और अंतिम समय की गोलबंदी इस चुनाव को और दिलचस्प बना रहे हैं। परिणाम न सिर्फ 7 नए MLC तय करेंगे बल्कि आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति की दिशा भी तय करेंगे। सभी नजरें 18 जून पर टिकी हैं।
(PTI इनपुट)













Click it and Unblock the Notifications